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बच्चों के मौत का आंकड़ा 100 के पार, नीतीश के सांसद को बारिश का इंतजार

बिहार में चमकी बुखार से 108 बच्चों की मौत हो गई है. इस बीच नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू के सांसद दिनेश चंद्र यादव ने विवादित बयान दिया है. उन्होंने कहा है कि हर साल गर्मी में बच्चे बीमार पड़ते हैं और मौत होती रहती हैं. बारिश आने के बाद ये सब रूक जाएगा.

जेडीयू के सांसद दिनेश चंद्र यादव (फोटो-ANI) जेडीयू के सांसद दिनेश चंद्र यादव (फोटो-ANI)

बिहार में चमकी बुखार से 108 बच्चों की मौत हो गई है. इस बीच नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू के सांसद दिनेश चंद्र यादव ने विवादित बयान दिया है. उन्होंने कहा है कि हर साल गर्मी में बच्चे बीमार पड़ते हैं और मौत होती रहती हैं. बारिश आने के बाद ये सब रूक जाएगा.

ऩ्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक दिनेश चंद्र यादव ने कहा कि चमकी बुखार से मौत दुर्भाग्यपूर्ण है, क्योंकि कई सालों से जब भी गर्मी का मौसम आता है. बच्चे बीमार पड़ जाते हैं और मौतों की संख्या बड़ी हो जाती है. इससे निपटने के लिए सरकार व्यवस्था करती है. बारिश शुरू होते ही ये बंद हो जाएगा.

चमकी बुखार को लेकर चल रही एक बैठक में राज्य के स्वास्थ्य मंत्री द्वारा क्रिकेट स्कोर पूछे जाने के सवाल पर जेडीयू के सांसद ने कहा कि जब भारत और पाकिस्तान के बीच मैच होता है तो लोगों के दिलों में राष्ट्रवाद की भावना बढ़ जाती है. लोग चाहते हैं कि भारत जीते. बहरहाल, मंत्री बैठक को लेकर गंभीर थे और इसी के साथ काम कर रहे थे. उन्होंने बीच बैठक में यूं ही स्कोर पूछ लिया. लेकिन विपक्षी पार्टियों के आरोप सही नहीं है.

इससे पहले, चमकी बुखार से हो रही मौतों पर बीजेपी सांसद अजय निषाद का बेतुका बयान आया था. मुजफ्फरपुर से सांसद अजय निषाद ने कहा कि चमकी बुखार के लिए 4जी जिम्मेदार है. गांव, गर्मी, गरीबी और गंदगी को बीजेपी सांसद ने 4जी बताया और कहा कि अति पिछड़ा समाज के लोग इस बीमारी से ताल्लुक हैं. उनका रहन-सहन नीचे है. बच्चे बीमार हैं.

उन्होंने कहा, 'यह मामला मुख्यमंत्री के संज्ञान में है. हर आदमी की अपनी व्यस्तता होती है. आज मुख्यमंत्री नीतीश कुमार मुजफ्फरपुर गए, उसके लिए उन्हें आभार है. इस मामले में ठोस कदम उठाने की जरूरत है कि आने वाले समय में बीमारी पर कैसे काबू पाया जाए. बच्चे जो बीमारी की हालत में अस्पताल में आते हैं, उनकी और मरने वाले बच्चों की संख्या कैसे कम हो.'

सांसद अजय निषाद ने कहा, 'अभी तक बीमारी अज्ञात है. हर कोई अपनी राय दे रहा है. मेरा मानना है कि हमें 4जी पर ज्यादा काम करने की जरूरत है. पहले जी से गांव, दूसरे जी से गर्मी, तीसरे जी से गरीबी और चौथे जी से गंदगी. कहीं न कहीं इससे इस बीमारी का ताल्लुक है. जो भी इलाज के लिए मरीज आते हैं, वह गरीब तबके से होते हैं. ज्यादार अनुसूचित जाति के होते हैं. उनका रहन-सहन का स्तर बहुत नीचे है. उसको भी ऊपर उठाने की जरूरत है.'

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