केन्द्रीय मंत्री अश्विनी चौबे के बेटे अर्जित शाश्वत मंगलवार को भागलपुर सेन्ट्रल जेल से रिहा होंगे. सोमवार को भागलपुर की कोर्ट ने उनको सशर्त जमानत दे दी. अर्जित के साथ सभी नौ आरोपियों को नियमित जमानत मिल गई है. अर्जित और उनके साथियों पर आरोप था कि उन्होंने बिना प्रशासन के आदेश के भागलपुर के नाथनगर में शोभा यात्रा निकाली और शोभा यात्रा के दौरान भड़काऊ गाने बनाए, जिससे तनाव पैदा हुआ.
कोर्ट ने उन्हें इस शर्त पर जमानत दी है कि वो अगले 30 दिनों तक किसी तरह की रैली या प्रदर्शन नहीं करेंगे. नाथनगर में दो समुदायों के बीच हुए विवाद मामले में सोमवार को भागलपुर एडीजे चतुर्थ कुमोद रंजन की कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखने के बाद अर्जित को जमानत दी. करीब एक घंटे तक ADJ चतुर्थ कुमोद रंजन ने दोनों वकीलों की दलीलों को सुना और उसके करीब ढाई घंटे बाद फैसला सुनाया.
इस फैसले से बीजेपी कार्यकर्ता बेहद खुश हैं, लेकिन अर्जित की रिहाई पर वो खुलकर खुशी का इजहार नहीं कर पाएंगे, क्योंकि कोर्ट ने इसी शर्त पर जमानत दी है. इससे पहले अर्जित ने अग्रिम जमानत रद्द होने के बाद 31 मार्च की रात को पटना के हनुमान मंदिर के सामने जय श्रीराम के घोष के साथ सरेंडर किया था. अर्जित शाश्वत चौबे पर 17 मार्च को भागलपुर के नाथनगर में बिना प्रशासन की इजाजत के शोभायात्रा निकालने के साथ ही दंगा भड़काने का आरोप है.
हांलाकि अर्जित की तरफ से कहा गया कि उन्होंने प्रशासन को इजाजत देने के लिए आवेदन दिया था, लेकिन प्रशासन ने उस पर कोई जवाब नहीं दिया. उन्होंने कहा कि घटना उनके उस स्थान से जाने के डेढ घंटे बाद घटी. प्रशासन अपनी नाकामी छिपाने के लिए उन्हें बलि का बकरा बना रहा है.