scorecardresearch
 

शख्सियत

मैथिली ठाकुर

सीता और गीता

15 सितंबर 2020

सीता के प्रदेश की मैथिली ठाकुर लॉकडाउन के दौरान मानस से लेकर वेस्टर्न तक में प्रयोग, मोनेटाइजेशन और गीता गाने की योजना पर

चेतन भगत

शब्दों की बुनियाद कत्ल

04 सितंबर 2020

चेतन भगत का ताजा उपन्यास अगले महीने आ रहा है. देखें कि इसमें वे प्रेम और नफरत में कैसे संतुलन बिठाने की कोशिश करते हैं

भारत वाला

30 अगस्त 2020

ब्रिटिश अभिनेता देव पटेल भारत से मिलने वाली प्रेरणा और बतौर निर्देशक अपनी पहली फिल्म के बारे में

ब्रिटिश अभिनेता देव

भारत वाला

27 अगस्त 2020

ब्रिटिश अभिनेता देव पटेल भारत से मिलने वाली प्रेरणा और बतौर निर्देशक अपनी पहली फिल्म के बारे में बता रहे हैं

इला अरुण

लय में लगातार

11 अगस्त 2020

इसमें मैं दिल खोलकर बात कर रही हूं. जब आप अकेले बैठे होते हैं तो फ्लैशबैक, फ्लैश फॉरवर्ड सबमें आते-जाते हैं. नोट्स नहीं बल्कि मुझे लगता है ये ऑटोबायोग्राफी है.






फ़र्रुख़ जाफ़र

फ़र्रुख़ जाफ़र: बेगम अधूरे ख्वाबों की

30 जुलाई 2020

नाटकों में तराशी, रेडियो पर खुली, खनकदार आवाज़ वाली फ़र्रुख़ जाफ़र सिनेमा के दर्शकों को नियमित अंतराल पर चौंकाती हैं. लेकिन रिहर्सल उनके काम का हिस्सा नहीं.

मलैका अरोड़ा

लौट आई मल्लिका

28 जुलाई 2020

मलैका अरोड़ा फिर से शूट शुरू करने, अपनी दुलारी सहेलियों और मानसिक स्वास्थ्य जैसे पहलुओं पर.






अभिषेक बच्चन

भैया की दूसरी पारी

16 जुलाई 2020

अभिषेक बच्चन ओटीटी प्लेटफॉर्म पर अपने आगाज, सिनेमा में दो दशक पूरे करने और अपनी पसंद का काम करने जैसे मुद्दों पर.





स्वरा भास्कर

घर भेजकर लौटी रसभरी

23 जून 2020

लोगों की दुश्वारियों को बैठकर झरोखे से देखते रहना स्वरा भास्कर की फितरत नहीं. प्रवासियों को घर लौटने में मदद करने वाली अभिनेत्री की रसभरी वेब सीरीज जल्द आ रही.



सुधीर मिश्र

सवाल-जवाबः ख्वाहिशें कुछ और शो की

03 जून 2020

लॉकडाउन में मुंबई के ठप पड़े होने के बावजूद फिल्मकार सुधीर मिश्र दो प्रोजेक्ट पूरे करने में जुटे हुए हैं. उनका मानना है कि वे पुराने फैशन के हैं पर खुद को ढालने का भी माद्दा है. बातचीत के अंशः


गायिका आशा भोंसले

स्वर मल्लिका यूट्यूब पर

26 मई 2020

गायिका आशा भोंसले ने भी खुद को लॉकडाउन के मुताबिक ढालते हुए हाल ही में शुरू हुए अपने यूट्यूब चैनल के लिए नए गाने रेकॉर्ड करवाए हैं. उनका मानना है कि बदलाव की अपनी सीमाएं होती हैं. सदाबहार गानों को तो हमें अलग ही रख छोडऩा चाहिए.