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डायबिटीज़ को कंट्रोल में रखेगा कपिवा का आयुर्वेदिक जूस

Impact Feature

ऐसा एक घर मिलना मुश्किल हैं जहां कोई डायबिटीज़ पेशेंट न हो. पर, इसे नियंत्रण में रखा जा सकता है, जीवनशैली में बदलाव से और Ayurvedic Kapiva Dia Free Juice को अपनाने से. पढ़ें और स्वस्थ रहें.

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Ayurvedic Kapiva Dia Free Juice
Ayurvedic Kapiva Dia Free Juice

आजकल के दौर में एक बीमारी जिसने कई परिवारों को परेशान किया हुआ है, वह डायबिटीज़ है. इस बीमारी की गिरफ्त में देश की बड़ी संख्या है. ऐसा एक घर मिलना मुश्किल हैं जहां कोई डायबिटीज़ पेशेंट न हो. डायबिटीज़ एक ऐसा रोग है जो एक बार पकड़ ले तो मुश्किल से ही नियंत्रण में हो पाती है. हां, इसे नियंत्रण में रखा जा सकता है, जीवनशैली में बदलाव से और को अपनाने से भी. डायबिटीज़ के पेशेंट को आंखों की समस्या, किडनी, हार्ट और लिवर से जुड़ी परेशानी भी होने लगती है. कभी यह बीमारी उम्र के 40 पड़ाव पार करने के बाद होती थी लेकिन अब तो बच्चे भी इसका शिकार होना शुरू हो गए हैं, जो एक गंभीर चिंता का विषय है.

डायबिटीज़ होता कैसे है?

इंटरनैशनल डायबिटीज़ फ़ेडरेशन के मुताबिक, भारत में 8 करोड़ लोगों को डायबिटीज़ है जबकि 4.5 करोड़ अतिरिक्त लोग ऐसे हैं जिनमें डायबिटीज़ का पता नहीं चल सका है. शरीर के पैंक्रियाज में कम मात्रा में इंसुलिन पहुंचने से खून में ग्लूकोज़ का स्तर बढ़ जाता है. ऐसी स्थिति को डायबिटीज़ कहते हैं. इंसुलिन एक हार्मोन है, यह हमारे शरीर में पाचक ग्रंथि द्वारा बनता है. यह शरीर के अंदर भोजन को एनर्जी में बदलता है.

यही हार्मोन हमारे शरीर में शुगर की मात्रा को नियंत्रित भी करता है. डायबिटीज़ के पेशेंट्स के शरीर में डाइट को एनर्जी में बदलने की शक्ति कम हो जाती है. ऐसी स्थिति में, ग्लूकोज़ का बढ़ा लेवल शरीर के दूसरे अंगों को भी नुकसान पहुंचाने लगता है. आगे हम बताएंगे कि कैसे आप अपनी जीवनशैली और आयुर्वेद से अपना मेटाबॉलिज़्म बढ़ा सकते हैं और डायबिटीज़ को मैनेज कर सकते हैं.

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डायबिटीज़ को नियंत्रण में रखने के लिए क्या करें?

आयुर्वेद में 30 साल का अनुभव रखने वाले और कपिवा आयुर्वेद अकेडमी के सदस्य डॉ. आनंद द्विवेदी कहते हैं कि सही फ़ूड हैबिट, व्यायाम, नींद और सहयोग के ज़रिए मेटाबॉलिज़्म बढ़ाकर डायबिटीज़ को नियंत्रित किया जा सकता है. कार्बोहाइड्रेट मेटाबॉलिज़्म बढ़ाकर ब्लड शुगर को नियंत्रित करने के लिए, डॉ आनंद आयुर्वेद में करेला, आंवला, जामुन और गिलोय के सम्मिश्रण के इस्तेमाल का सुझाव देते हैं. करेला लिवर को क्रियाशील बनाता है जबकि जामुन कोलेस्ट्रॉल घटाता है और पेशाब करने के दौरान होने वाली तकलीफ को भी दूर करता है. डॉ. आनंद आगे जोड़ते हैं कि बनाते वक्त उन्होंने और उनकी टीम ने डायबिटीज़ पेशेंट की ऐसी कई परेशानियों को ध्यान में रखा.

वह ज़ोर देते हैं कि सही न्यूट्रिशन के साथ ओबेसिटी का ध्यान रखना व यह सुनिश्चित करना कि नींद समुचित हो और जीवनशैली भी सक्रिय हो. कई स्टडीज़ में डायबिटीज़ से ओबेसिटी के खतरे की बात भी सामने आई है. अगर आपका वजन बढ़ता है, तो आपको वजन घटाने पर तेजी से काम करना होगा. ऐसी स्थिति में, हर रोज़ 30 मिनट का व्यायाम एकदम ज़रूरी है. आप योग या कार्डियो जैसी कोई भी फ़िज़िकल एक्टिविटी चुन सकते हैं, जिसे आप पसंद करते हों. हां, नींद का महत्व बिल्कुल भी न भूलें, यह आपकी सेहत बना भी सकती है और बिगाड़ भी सकती है.

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आयुर्वेद है सबसे असरदार

डायबिटीज़ से लड़ने में अहम साबित हो सकता है. डायबिटीज़ केयर के लिए यह एक हर्बल प्रोडक्ट है. यह आंवला, करेला, जामुन, गुडमार, गिलोय और अन्य 11 शक्तिशाली जड़ी बूटियों का एक आयुर्वेदिक मिश्रण है. ब्लड शुगर को नियंत्रित करने और डायबिटीज़ से जुड़ी जटिलताओं से लड़ने में यह आपकी मदद करता है.

संपूर्ण डायबिटीज़ केयर और हॉलिस्टिक वेलनेस के लिए इसे वैज्ञानिक तौर पर 11 सर्वोत्तम स्रोत वाली जड़ी-बूटियों से निर्मित किया गया है. इसमें कोई रंग नहीं शामिल किया गया है, न ही कोई फ्लेवर, GMP सर्टिफाइड लैब में इसे तैयार किया गया है. इसे इस्तेमाल करने वाले 81 फीसदी उपयोगकर्ताओं ने एनर्जी लेवल में बढ़ोतरी महसूस की है और सबसे बड़ी बात ये कि इसे इस्तेमाल करने वाले 86 फीसदी लोगों का ब्लड शुगर कम हुआ है.

(इस्तेमाल करने वाले 100 + लोगों पर किए गए सेल्फ असेसमेंट पर आधारित)

कैसे इस्तेमाल करें

1. 30 ML Dia Free Juice लें.

2. इसमें 30 ML पानी मिलाएं.

3. दिन में दो बार लें.

इस जूस से जुड़ी कुछ और बातें

यह जूस प्रीडायबिटीज़ टाइप-2 डायबिटीज़ और साथ ही टाइप 1 डायबिटीज़ के लिए भी उपयोगी है. इस जूस को लगातार 8 हफ्ते तक इस्तेमाल करने वाले लोगों ने अपने शुगर लेवल के घटने का अनुभव किया है. आप इसे 30ml बगैर पानी के भी ले सकते हैं लेकिन स्वाद के लिए पानी के साथ लेना ज्यादा सही रहता है. आप इसे एलोपैथी मेडिसिन के साथ भी ले सकते हैं. हालांकि आप इसे लेकर अपनी फिजिशियन से सलाह भी ले सकते हैं. इसमें किसी भी तरह का शुगर या आर्टिफिशियल मिठास शामिल नहीं है.

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इस प्रोडक्ट को मैन्युफैक्चरिंग के बाद से 18 महीने तक इस्तेमाल किया जा सकता है और यही इसकी एक्सपायरी डेट भी होती है. हालांकि, बॉटल खुलने पर आपको सुनिश्चित करना होगा कि यह रेफ्रिजरेटर में ही रहे और 30 दिन में आप इसे कन्ज़यूम भी कर लें.

दोस्तों, जीवन बहुत अनमोल है और इससे बढ़कर कुछ भी नहीं. अपनी सेहत को बनाएं, संवारे और लगातार ऐसी चाज़ों का सेवन करें जिससे आप बीमारी की गिरफ्त में न आएं.

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