
Weight Loss Pills or injection: वजन घटाना अब सिर्फ जिम और डाइट तक सीमित नहीं रह गया है क्योंकि मेडिकल साइंस ने वेट लॉस दवाइयां लॉन्च की हैं जो दुनियाभर में जरूरतमंद लोगों को वजन कम करने में मदद कर सकती हैं. लेकिन हेल्थ एक्सपर्ट ने खास चेतावनी दी है कि ये दवाएं मेडिकल स्टोर से अपनी मर्जी से खरीदकर खाने वाली चीजें नहीं हैं. इन्हें लेने के लिए कड़े नियम और डॉक्टरी परामर्श की जरूरत होती है. अगर आप भी दवाओं के जरिए वजन कम करने का सोच रहे हैं, तो यह जान लेना जरूरी है कि इसकी शुरुआत कहां से होती है और कौन से डॉक्टर प्रिस्क्राइब कर सकते हैं.
वेट लॉस ड्रग्स के लिए सबसे पहले सही विशेषज्ञ का चुनाव जरूरी है. आमतौर पर एंडोक्राइनोलॉजिस्ट (Endocrinologist) यानी हार्मोन एक्सपर्ट इन दवाओं को प्रिस्क्राइब करने के लिए सबसे उपयुक्त माने जाते हैं, क्योंकि मोटापा अक्सर हार्मोनल असंतुलन से जुड़ा होता है. इसके अलावा, बेरियाट्रिक फिजिशियन और अनुभवी जनरल फिजिशियन भी मरीज की स्थिति देखकर यह दवाएं लिख सकते हैं. ध्यान रहे कि किसी जिम ट्रेनर या बिना डिग्री वाले सलाहकार के कहने पर इन दवाओं का सेवन जानलेवा हो सकता है.
डॉक्टर दवा लिखने से पहले आपके शरीर का पूरा चेकअप करते हैं. इसमें सबसे महत्वपूर्ण है ब्लड टेस्ट, जिससे शुगर लेवल, कोलेस्ट्रॉल और लिवर फंक्शन का पता लगाया जाता है. इसके अलावा, थायराइड प्रोफाइल की जांच की जाती है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि वजन बढ़ने का कारण थायरॉइड तो नहीं है. डॉक्टर आपका बीएमआई (BMI) कैलकुलेट करते हैं और ब्लड प्रेशर की नियमित मॉनिटरिंग करते हैं. कुछ मामलों में दिल की सेहत जांचने के लिए ईसीजी (ECG) की सलाह भी दी जा सकती है क्योंकि कुछ दवाएं मेटाबॉलिज्म पर असर डालती हैं.

वेट लॉस ड्रग्स हर उस व्यक्ति को नहीं दी जाती जो थोड़ा सा वजन कम करना चाहता है. इसके लिए पहली शर्त यह है कि आपका बीएमआई 30 से अधिक हो, या फिर 27 से अधिक होने के साथ आपको मोटापा के कारण होने वाली बीमारियां जैसे डायबिटीज या हाई ब्लड प्रेशर हो.
दूसरी अहम शर्त यह है कि मरीज ने पहले डाइट और एक्सरसाइज के जरिए वजन घटाने की कोशिश की हो. डॉक्टर यह दवाएं तभी शुरू करते हैं जब प्राकृतिक तरीकों से परिणाम न मिल रहे हों. साथ ही, मरीज को यह वचन देना होता है कि वह दवा के साथ अपनी लाइफस्टाइल में सुधार जारी रखेगा.
यह समझना जरूरी है कि वेट लॉस ड्रग्स कोई 'जादुई गोली' नहीं हैं. इनके अपने साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं, जैसे पाचन में दिक्कत, जी मिचलाना या घबराहट. इसलिए डॉक्टर समय-समय पर फॉलो-अप लेते हैं. अगर कुछ हफ्तों के भीतर दवा का असर नहीं दिखता या मरीज को परेशानी होती है, तो डॉक्टर तुरंत डोज बदलते हैं या दवा बंद कर देते हैं. बिना डॉक्टरी सलाह के इन्हें लेना किडनी और हार्ट पर बुरा असर डाल सकता है.
(Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सामान्य जानकारी और एक्सपर्ट्स की राय पर आधारित है. इसे किसी भी तरह की मेडिकल सलाह या इलाज का विकल्प न समझें.)