Heatwave Dangerous Sign: गर्मी का असर साफ-साफ दिखने लगा है. तेज धूप, उमस ने लोगों का जीना मुश्किल कर दिया है. ऐसे में हाल ही में आई एक स्टडी ने चेतावनी दी है कि सिर्फ तापमान ही नहीं बल्कि हवा में मौजूद नमी भी जानलेवा हो सकती है. रिसर्च के मुताबिक, मॉइस्ट हीटवेव यानी नमी वाली गर्मी, सूखी गर्मी के मुकाबले शरीर पर ज्यादा खतरनाक असर डालती है. खासकर तटीय इलाकों और बड़े शहरों में यह खतरा तेजी से बढ़ रहा है. चेन्नई एयर शो के दौरान हुई मौतों का हवाला देते हुए एक्सपर्ट्स ने बताया कि हाई ह्यूमिडिटी शरीर की कूलिंग सिस्टम को फेल कर देती है जिससे हीट स्ट्रेस तेजी से बढ़ता है और आप उसकी चपेट में आ सकते हैं. इससे बचने का तरीका क्या है, ये भी जान लीजिए.
क्या है मॉइस्ट हीटवेव का खतरा?
मॉइस्ट हीटवेव का मतलब है जब तापमान के साथ हवा में नमी (ह्यूमिडिटी) भी बहुत ज्यादा हो. ऐसे में शरीर पसीने के जरिए खुद को ठंडा नहीं कर पाता. आमतौर पर पसीना शरीर को ठंडा करता है लेकिन नमी ज्यादा होने पर यह प्रोसेस भी धीमी हो जाती है जिससे शरीर का तापमान तेजी से बढ़ता है और हीट स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है.
चेन्नई एयर शो बना चेतावनी का उदाहरण
पीयर-रिव्यू जर्नल क्लाइमेट डायनेमिक्स में पब्लिश स्टडी के मुताबिक, 6 अक्टूबर, 2024 को नुंगमबक्कम (चेन्नई) में हुए एयर शो का जिक्र किया गया है, जहां भारी भीड़ के बीच कई लोगों की मौत हो गई थी. दरअसल, उस समय तापमान केवल 34.3 डिग्री सेल्सियस था जो आमतौर पर गर्मी के मौसम के तापमान के मुताबिक काफी कम था.
उस समय ह्यूमिडिटी 73 प्रतिशत थी जिससे वेट-बल्ब टेम्पेचर 30.1 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था जो मानव शरीर पर काफी अधिक स्ट्रेस डालता है और ये स्तर शरीर के लिए काफी तनावपूर्ण माना जाता है. इस घटना के दौरान 5 लोगों की मौत हो गई थी और 200 से अधिक लोग बेहोश हो गए थे.
विशेषज्ञों का कहना है कि सिर्फ तापमान को देखना काफी नहीं है बल्कि ह्यूमिडिटी और तापमान दोनों मिलते हैं तो असर अधिक होता है.
क्यों ज्यादा खतरनाक है नमी वाली गर्मी?
सूखी गर्मी में पसीना जल्दी सूख जाता है जिससे शरीर ठंडा हो जाता है. लेकिन मॉइस्ट हीटवेव में पसीना सूखता नहीं है जिस कारण शरीर की गर्मी बाहर नहीं निकल पाती. इससे डिहाइड्रेशन, थकान, चक्कर और यहां तक कि जानलेवा हीट स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है. बुजुर्ग, बच्चे और बीमार लोग इसके सबसे ज्यादा शिकार होते हैं.
पहले ही मिल सकते हैं संकेत
रिसर्चर्स ने 1940 से 2023 तक के 84 वर्षों के मौसम संबंधी आंकड़ों का उपयोग करते हुए पाया कि एक बड़ा वायुमंडलीय पैटर्न बोरियल समर इंट्रासीजनल ऑसिलेशन भारत में उमस भरी लू के खतरे को सामान्य स्तर से 125% तक बढ़ा सकता है. इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि इस पैटर्न का पूर्वानुमान 2 से 4 सप्ताह पहले ही लगाया जा सकता है जिससे गाइडलाइंस जारी कर सुरक्षा पाई जा सकती है.
डॉक्टर्स सलाह देते हैं कि ऐसी गर्मी में ज्यादा देर बाहर रहने से बचें, हल्के और ढीले कपड़े पहनें और लगातार पानी पीते रहें. अगर चक्कर, कमजोरी या उलझन महसूस हो तो तुरंत ठंडी जगह पर जाएं और मेडिकल मदद लें.