इस समय पूरी दुनिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तेजी से अपने पैर पसार रहा है जिसकी वजह से लोगों की नौकरियां खतरे में भी आ रही हैं. बाकी क्षेत्रों की तरह अस्पतालों और ऑपरेशन थिएटरों में भी तेजी से अपनी जगह बना रहा है लेकिन रोबोटिक GI सर्जन डॉ. अंशुमन कौशल बताते हैं कि AI हेल्थकेयर सेक्टर को बदलेगा लेकिन वो उस सहानुभूति, सूझबूझ और जिम्मेदारी की जगह नहीं ले सकता जो मरीज को डॉक्टर में नजर आता है.
डॉक्टर अंशुमन सोशल मीडिया पर The Angry Doc के नाम से काफी पॉपुलर हैं क्योंकि वो सांटिफिक प्रूवन फैक्ट्स का इस्तेमाल करके सेहत से जुड़े पुराने और आम लोकप्रिय मिथकों, गलत मेडिकल जानकारियों और बेवजह ही मार्केटिंग का भरपूर तरीके से विरोध करते हैं.
AI नहीं बन सकता डॉक्टर
दिल्ली में हुए इंडिया टुडे कॉन्क्लेव 2026 में बात करते हुए रोबोटिक GI सर्जन और शिक्षक डॉ. अंशुमन कौशल ने कहा कि जहां एक तरफ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तेजी से हेल्थकेयर को बदल रहा है. वहीं अब असली बहस इस बात पर नहीं रही कि AI ऑपरेशन थिएटर में आएगा या नहीं. इसके बजाय अब बड़ा सवाल यह है कि इसकी देखरेख और मार्गदर्शन कौन करेगा.
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पहले से ही मेडिकल के अलग-अलग क्षेत्रों में अपनी मौजूदगी का एहसास करा रहा है. रेडियोलॉजिस्ट और पैथोलॉजिस्ट को बीमारियों का जल्दी पता लगाने में मदद करने से लेकर, सर्जनों को रोबोटिक टेक्नोलॉजी के जरिए ऑपरेशन में ज्यादा सटीकता लाने में मदद करने तक. लेकिन इनोवेशन की इस तेज रफ्तार के बावजूद डॉ. कौशल ने साफ कहा कि हेल्थकेयर सिस्टम में डॉक्टर ही मुख्य भूमिका में रहेंगे.
सर्जरी में AI कितना मददगार
रोबोटिक सर्जरी में पहले से ही सटीकता और नतीजों को बेहतर बनाने के लिए एडवांस्ड टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जाता है. इन प्रक्रियाओं के दौरान बड़ी मात्रा में डेटा जेनरेट और कैप्चर किया जाता है.
डॉ. कौशल के अनुसार, यह डेटा AI सिस्टम को ट्रेन करने में मदद करता है जो एक दिन सर्जनों की ज्यादा खुलकर मदद कर सकते हैं. हालांकि वो इस बात पर जोर देते हैं कि रोबोट बिना इंसानी निगरानी के स्वतंत्र रूप से ऑपरेट नहीं कर सकते.
वो बताते हैं, 'रोबोटिक सर्जरी में हम जो कुछ भी करते हैं, वो डेटा के रूप में कैप्चर हो जाता है. समय के साथ, मशीन लर्निंग इस जानकारी का इस्तेमाल उन सिस्टम को ट्रेन करने के लिए करती है जो भविष्य में सेमी-ऑटोनॉमस काम कर सकते हैं.'