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मीठा, नमकीन या कुरकुरा खाने का बार-बार करता है मन? जानिए आपका शरीर आपको क्या दे रहा है संकेत

क्रेविंग्स सिर्फ खाने की इच्छा नहीं होती. ये इस बात का संकेत भी हो सकती हैं कि आपके शरीर में किस चीज की कमी है या आप स्ट्रेस, नींद की कमी और हार्मोनल बदलाव से कैसे जूझ रहे हैं.

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क्रेविंग्स को इग्नोर करने की न करें भूल! (Photo- Aobe Stock)
क्रेविंग्स को इग्नोर करने की न करें भूल! (Photo- Aobe Stock)

रात में अचानक चॉकलेट खाने का मन करना या नमकीन और कुरकुरी चीजें खाने की इच्छा होना आम बात है. हमें लगता है यह बस मन की चाहत है लेकिन एक्सपर्ट्स के अनुसार यह हमारे शरीर की जरूरतों का इशारा भी हो सकता है. ऐसे में आज हम इस खबर में जानेंगे कि क्रेविंग्स क्यों होती हैं, इन्हें कैसे कंट्रोल किया जा सकता है और क्रेविंग होने पर क्या करना चाहिए.

क्रेविंग्स क्यों होती हैं?

क्रेविंग्स अचानक नहीं होतीं. ये हमारे दिमाग, पेट और हार्मोन के बीच तालमेल का नतीजा होती हैं. जैसे मीठा खाने से दिमाग में डोपामिन निकलता है, जिससे हमें खुशी मिलती है और बार-बार मीठा खाने का मन करता है. वहीं नमकीन खाने की इच्छा शरीर में पानी या इलेक्ट्रोलाइट की कमी का संकेत हो सकती है, खासकर जब शरीर डिहाइड्रेट हो. कुरकुरी चीजें जैसे चिप्स या तले स्नैक्स खाने से भी अलग तरह की संतुष्टि मिलती है, क्योंकि उनका टेक्सचर और आवाज दिमाग को अच्छा महसूस कराती है और कभी-कभी स्ट्रेस भी कम करती है.

कब ये किसी कमी का संकेत हो सकती हैं?
वैसे तो क्रेविंग्स आम हैं लेकिन अगर ये लगातार और लंबे समय तक बनी रहें तो यह किसी इंटरनल प्रॉब्लम या शरीर में किसी कमी का संकेत भी हो सकती हैं, जिसे इंग्रोनर नहीं करना चाहिए. जैसे, शरीर में सोडियम कम हो जाए तो नमकीन खाने का मन ज्यादा करता है. आयरन की कमी होने पर कुछ लोगों को बर्फ या चॉक जैसी अजीब चीजें खाने का मन कर सकता है. वहीं, मैग्नीशियम की कमी से चॉकलेट या मीठा खाने की इच्छा बढ़ सकती है.

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स्ट्रेस और इमोशनल ईटिंग
हम जो स्ट्रेस लेते हैं वो क्रेविंग्स को और ज्यादा बढ़ा देता है. जब हम स्ट्रेस में होते हैं तो शरीर ज्यादा मीठा और तला-भुना खाने की मांग करता है, क्योंकि ये तुरंत एनर्जी और आराम देते हैं. धीरे-धीरे यह आदत बनकर इमोशनल ईटिंग में बदल सकती है. लगातार स्ट्रेस रहने से क्रेविंग्स बार-बार और ज्यादा तेज हो जाती हैं.

हार्मोन का रोल
हमारी भूख और क्रेविंग्स पर हार्मोन का भी बड़ा असर होता है. घ्रेलिन नामक हार्मोन भूख बढ़ाता है और खाने का संकेत देता है. लेप्टिन नामक हार्मोन पेट भरने का संकेत देता है (लेकिन इसकी गड़बड़ी से असर कम हो सकता है) और इंसुलिन ब्लड शुगर कंट्रोल करता है और इसके उतार-चढ़ाव से मीठा खाने की इच्छा बढ़ सकती है. जब ये हार्मोन बैलेंस में नहीं रहते तो क्रेविंग्स ज्यादा और बार-बार होने लगती हैं, खासकर तब जब हम ज्यादा मीठा या रिफाइंड कार्ब्स खाते हैं.

क्रेविंग्स को कैसे कंट्रोल किया जा सकता है?
क्रेविंग्स को दबाने की बजाय उन्हें सही तरीके से मैनेज करना जरूरी है. इसके लिए समय पर बैलेंस डाइट (प्रोटीन, फाइबर और हेल्दी फैट से भरपूर खाना) लें, खूब पानी पिएं, स्ट्रेस कम करने के लिए वर्कआउट करें और अच्छी नींद लें ताकि हार्मोन सही तरीके से बैलेंस रहें. इसके अलावा, माइंडफुल ईटिंग भी मदद करती है. यानी जब क्रेविंग हो तो तुरंत खाने की बजाय उसे समझें और सोच-समझकर खाएं.

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क्रेविंग होने पर क्या खाएं?
जब मीठा खाने का मन करें तो बादाम, काजू, सीड्स या पालक खाएं. नमकीन खाने का मन हो तो  नारियल पानी, भूना चना या सूप लें. वहीं, कुछ कुरकुरा खाने का मन हो तो गाजर, खीरा, मखाना, सेब या सलाद ट्राई करें.

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