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2 साल से छोटे बच्चों को भूलकर भी न दें कफ सिरप, पैरेंट्स जरूर पढ़ें NFI 2026 की नई गाइडलाइन

इंडियन फार्माकोपिया कमीशन (NFI 2026) ने नई गाइडलाइन जारी कर 2 साल से कम उम्र के बच्चों को कफ सिरप देने पर रोक लगा दी है. कफ सिरप से बच्चों में सांस की तकलीफ और सुस्ती जैसे गंभीर खतरे हो सकते हैं, जानिए क्यों खांसी को दबाना खतरनाक है और माता-पिता को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए.

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छोटे बच्चों के लिए कफ सिरप नहीं है. (PHOTO:ITG)
छोटे बच्चों के लिए कफ सिरप नहीं है. (PHOTO:ITG)

बच्चों की सेहत से जुड़ी छोटी-छोटी बातें भी बेहद अहम होती हैं, खासकर जब बात नवजात और छोटे बच्चों की हो. अक्सर खांसी होने पर माता-पिता बच्चों को कफ सिरप पिलाते हैं, ताकि खांसी से जल्दी राहत मिल जाए, लेकिन छोटे बच्चों को खांसी होने पर कफ सिरप देना सुरक्षित होता है, साल 2025 में राजस्थान और मध्यप्रदेश में नकली कफ सिरप के मामले सामने आए थे, जिसमें कई बच्चों की जान भी चली गई थी.

भारत में बच्चों की सेहत को लेकर एक बड़ा और जरूरी अपडेट सामने आया है. इंडियन फार्माकोपिया कमीशन द्वारा जारी नेशनल फॉर्मुलरी ऑफ इंडिया (NFI) 2026 ने साफ शब्दों में कहा है कि दो साल से कम उम्र के बच्चों को कफ सिरप नहीं देना चाहिए. यह सलाह सिर्फ एक चेतावनी नहीं, बल्कि डॉक्टरों और पैरेंट्स के लिए एक अहम गाइडलाइन है, जिसे नजरअंदाज करना छोटे बच्चों की सेहत के लिए खतरनाक साबित हो सकती है.

खांसी को समझना क्यों जरूरी है?

अक्सर ही लोग खांसी को एक बीमारी समझ लेते हैं और उसे तुरंत दबाने के लिए सिरप दे देते हैं. हालांकि NFI 2026 के मुताबिक, खांसी हमारे शरीर का नेचुरल डिफेंस सिस्टम है, यह सांस की नली में जमा बलगम, धूल या बाहरी कणों को बाहर निकालने में मदद करती है. यानी हर खांसी को दबाना जरूरी नहीं होता है, कई बार यह शरीर की सफाई का एक प्रोसेस ही होती है.

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छोटे बच्चों के लिए क्यों खतरनाक हैं कफ सिरप?

दो साल से कम उम्र के बच्चों का शरीर बहुत नाजुक होता है. ऐसे में कफ सिरप में मौजूद दवाएं उनके लिए गंभीर साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं, जैसे-

  • सांस लेने में दिक्कत 
  • ज्यादा नींद या सुस्ती
  • दिल की धड़कन पर असर

सबसे बड़ी बात यह है कि इन दवाओं का छोटे बच्चों में फायदा बहुत कम और खतरा ज्यादा पाया गया है, यही वजह है कि NFI 2026 में इस उम्र के बच्चों के लिए कोई डोज ही तय नहीं की गई है.

कौन-सी दवाएं शामिल हैं?

फॉर्मुलरी में सिर्फ दो कफ सप्रेसेंट्स कोडीन और डेक्स्ट्रोमेथॉर्फन का जिक्र किया गया है.

कोडीन सिर्फ बड़े बच्चों (12 साल से ऊपर) और बड़ों के लिए ही सुरक्षित माना गया है. डेक्स्ट्रोमेथॉर्फन भी 2 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए बिल्कुल रिकमेंड नहीं है. यानी अगर बच्चा दो साल से छोटा है, तो कफ सिरप देना पूरी तरह से अवॉयड करना चाहिए.

सूखी और बलगम वाली खांसी में क्या फर्क है?

NFI 2026 के अनुसार, हर खांसी एक जैसी नहीं होती है, सूखी और बलगम वाली खांसी अलग-अलग होती हैं और इनके लक्षण भी अलग होते हैं और इनकी दवाएं भी अलग होती है.

सूखी खांसी: इसमें दवा दी जा सकती है
बलगम वाली खांसी: इसे दबाना नहीं चाहिए, क्योंकि यह शरीर की सफाई कर रही होती है.

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पैरेंट्स रखें इन बातों का ध्यान

अगर आपका बच्चा छोटा है और उसे खांसी हो रही है, तो घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि ये आसान उपाय आपके काम आ सकते हैं. 

  • बच्चे को पर्याप्त लिक्विड (पानी, दूध) दें
  • कमरे में नमी बनाए रखें
  • डॉक्टर की सलाह के बिना कोई दवा न दें

जरूरत पड़ने पर बाल रोग विशेषज्ञ से संपर्क जरूर करें, क्योंकि हर खांसी का इलाज दवा नहीं होता है.

 

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