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दुनिया में बेमौत मारे गए 42 लाख लोग, बाल से 100 गुना पतले कण बने वजह! चौंकाने वाली स्टडी

प्रदूषण पर हुई स्टडी ने चौंकाया है. इसके मुताबिक, पीएम 2.5 कणों को लेकर अनुमान गलत निकला है. वे पहले के आकलन से ज्यादा जानलेवा हैं. इसकी वजह से दुनियाभर में सालाना 42 लाख लोग वक्त से पहले मौत का शिकार हुए.

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प्रदूषण पर नई स्टडी ने चौंकाया (सांकेतिक फोटो)
प्रदूषण पर नई स्टडी ने चौंकाया (सांकेतिक फोटो)

प्रदूषण ने दिल्ली-एनसीआर को बीते कुछ दिनों से हर साल की तरह परेशान किया हुआ है. ये सेहत को नुकसान पहुंचा रहा है, यह पहले ही साफ हो चुका है लेकिन अब ताजा स्टडी ने और चिंता में डाल दिया है. प्रदूषण के छोटे कण जिनको पीएम 2.5 भी कहा जाता है उनके बारे में नई जानकारी सामने आई है. इसके मुताबिक, ये छोटे कण पहले लगाए गए अनुमान की तुलना में ज्यादा जानलेवा हैं और इसकी वजह से दुनियाभर में कुल मिलाकर 15 लाख और ज्यादा मौत हो रही हैं. 

क्या होता है पीएम2.25 जिसकी वजह से बेमौत मर रहे 42 लाख लोग?

हवा-वातावरण में अलग-अलग तरह के कण पाए जाते हैं. इसमें मौजूद बड़े कणों को पीएम 10 कहा जाता है. यहां पीएम का मतलब Particulate matter होता है. पीएम 10 कण व्यास में 10 माइक्रोन से कम होते हैं. वहीं पीएम 2.5 व्यास में 2.5 माइक्रोमीटर से कम होते हैं. बता दें कि पीएम 2.5 के कण बहुत पतले होते हैं. इनको इंसानों के बालों से 25 से 100 गुना तक पतला बताया जाता है.

वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) के ताजा अनुमान के मुताबिक, प्रदूषण के पीएम 2.5 कणों की वजह से दुनियाभर में हर साल 42 लाख लोग समय से पहले ही मारे जा रहे हैं. मतलब अगर प्रदूषण ने उनके शरीर को नुकसान ना पहुंचाया होता तो वे और जी सकते थे.

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न्यूज एजेंसी PTI के मुताबिक, ताजा स्टडी journal Science Advances में प्रकाशित हुई है. इसके मुताबिक, PM2.5 की वजह से जान गंवा रहे लोगों का आंकड़ा पहले लगाए गए अनुमान से ज्यादा है. शोधकर्ताओं ने पाया है कि हवा में PM2.5 का स्तर कम भी हो तब भी मौत का खतरा कम नहीं होता. इससे पहले कम मात्रा को 'संभावित घातक' माना गया था.

जहर के समान हैं PM2.5 के कण, कैंसर जैसी बीमारियों की वजह

PM2.5 में मौजूद छोटे कणों (microscopic) को जहर जैसा माना गया है. इसकी वजह से दिल और सांस संबंधी बीमारियां हो सकती हैं. इसके साथ-साथ ये कैंसर की वजह भी बनता है. शोध में शामिल स्कॉट वीचेंथल ने बताया कि रिसर्च में पाया गया है कि PM2.5 कम स्तर पर भी जानलेवा है, जबकि पिछली स्टडी में इसको शामिल नहीं किया गया था. Scott Weichenthal कनाडा की McGill University में असोसिएट प्रोफेसर हैं और इस शोध का उन्होंने ही नेतृत्व किया है.

कैसे की गई रिसर्च?

शोधकर्ताओं ने कनाडा का पिछले 25 सालों का आंकड़ा जुटाया था. इसमें कनाडा के 70 लाख लोगों के स्वास्थ्य और मृत्यु दर डेटा शामिल था. इसमें देखा गया कि बीते 25 सालों में हवा में PM2.5 का स्तर कितना रहा है. बता दें कि कनाडा ऐसी जगह है जहां PM2.5 का स्तर काफी कम रहता है. कनाडा से मिली जानकारी को जुटाकर यह देखा गया कि PM2.5 का स्तर बदलने के साथ मृत्यु दर जोखिम कैसे बदलता है. इससे ही यह चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है.

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