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फैक्ट चेक: सात महीने पुराना वीडियो निसर्ग चक्रवात से जोड़कर वायरल

महाराष्ट्र और गुजरात के कुछ हिस्सों में भारी बारिश और तेज हवाओं के साथ बुधवार को चक्रवाती तूफान निसर्ग ने दस्तक दी. इस तूफान से जुड़े कई वीडियो और फोटो सोशल मीडिया पर घूम रहे हैं.

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आजतक फैक्ट चेक

दावा
जलीय सतह के ऊपर विशेष प्रकार की जलाकृति का वीडियो, जो कि चक्रवात निसर्ग की आंख है.
सोशल मीडिया यूजर्स एंड न्यूज वेबसाइट्स
सच्चाई
यह वीडियो करीब सात महीने पुराना है और इसका निसर्ग तूफान से कोई लेना-देना नहीं है.

महाराष्ट्र और गुजरात के कुछ हिस्सों में भारी बारिश और तेज हवाओं के साथ बुधवार को चक्रवाती तूफान निसर्ग ने दस्तक दी. इस तूफान से जुड़े कई वीडियो और फोटो सोशल मीडिया पर घूम रहे हैं.

इसी ​तरह एक 15 सेकेंड का वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें जलीय सतह के ऊपर कीप के जैसी एक विशेष जलाकृति नजर आती है. दावा किया जा रहा है कि यह विशेष आकृति निसर्ग तूफान की आंख है. कई सोशल मीडिया यूजर्स और न्यूज वेबसाइट्स जैसे "Jio News" ने इसी दावे के साथ इस वीडियो क्लिप को शेयर किया है.

नेटवर्क18 ग्रुप की न्यूज वेबसाइट्स भी इसके झांसे में आ गईं, हालांकि बाद में उन्होंने वीडियो को हटा दिया.

cyclone_060420064422.jpgपोस्ट

इंडिया टुडे के एंटी फेक न्यूज वॉर रूम (AFWA) ने पाया कि वीडियो के साथ किया जा रहा दावा गलत है और यह वीडियो करीब सात महीने पुराना है.

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इस वीडियो के साथ कैप्शन में लिखा गया है, “साइक्लोन निसर्ग| तूफान की आंख का एक दृश्य”. पोस्ट का आर्काइव्ड वर्जन यहां देखा जा सकता है.

AFWA की पड़ताल

InVID टूल की मदद से हमने पाया कि इस वीडियो को 25 अक्टूबर, 2019 को एक यूट्यूब यूजर्स ने “Kyarr Cyclone #karnataka” शीर्षक के साथ अपलोड किया गया था.

कन्नड़ न्यूज चैनल “Suvarna News” ने भी उसी तारीख को इस वीडियो का इस्तेमाल किया और इसका शीर्षक दिया, “कर्नाटक के तटीय क्षेत्र में चक्रवात क्यार की दस्तक; हवाओं के झोंके, भारी बारिश ने जनजीवन अस्त-व्यस्त किया.”

चक्रवात क्यार एक शक्तिशाली चक्रवात था जिसने पिछले साल अक्टूबर में महाराष्ट्र, कर्नाटक और गोवा को प्रभावित किया था.

हालांकि, मौसम विज्ञान की जानकारी देने वाली संस्था स्काईमेट वेदर के अध्यक्ष जीपी शर्मा ने हमें बताया कि वीडियो में देखा गई जलाकृति कोई चक्रवात नहीं है, बल्कि एक तरह का जल बवंडर यानी हवा और पानी से बना एक जल स्तंभ है जो एक जलीय सतह के ऊपर अक्सर पाई जाती है.

इसलिए यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि वायरल वीडियो का चक्रवात निसर्ग से कोई संबंध नहीं है क्योंकि यह वीडियो इंटरनेट पर सात महीने से ज्यादा समय से मौजूद है.

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