एक तरफ अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप गाजा पट्टी में युद्ध रुकवाने के बाद वहां रिकंस्ट्रक्शन और नई सरकार तक प्लान कर रहे हैं, दूसरी तरफ हमास दोबारा सिर उठा रहा है. दरअसल, सीजफायर के तहत अक्टूबर में जब इजराइली सेना गाजा के कुछ इलाकों से पीछे हटी, तो वहां खाली जगह बन गई. हमास ने एक खाली जगह को तेजी से भर दिया. उसके लड़ाके दोबारा मनमानी करने लगे. तो क्या ट्रंप का पीस प्लान शुरू होते ही खत्म हो रहा है?
पिछले साल एक के बाद एक शांति प्रस्ताव लाते ट्रंप ने एक प्रपोजल गाजा पट्टी के लिए भी दिया. वहां इजरायल और आतंकी संगठन हमास दो साल से जंग में मुब्तिला थे. इस दौरान गाजा का कुछ किलोमीटरों में फैला इलाका अस्सी फीसदी तक तबाह हो गया. ट्रंप के 20 सूत्रीय प्लान में एक पॉइंट ये भी था कि हमास को हथियार डालने होंगे, साथ ही जो इसके लिए राजी न हों, उन्हें गाजा से दूर किसी और देश में भेज दिया जाएगा.
हमास ने इजरायली बंधकों को लौटाना शुरू किया. बदले में इजरायली फोर्स ने गाजा के कई इलाकों से पांव हटा लिए. अब इन्हीं जगहों पर हमास फिर काबिज होने लगा है.
अक्टूबर 2025 में सीजफायर लागू होने के बाद इजरायली सेना गाजा पट्टी के कई अंदरूनी इलाकों से पीछे हटी थी. खास तौर पर गाजा सिटी के कई हिस्सों, जाबालिया, नुसैरात, अल बुरेज, बेइट लाहिया और खान यूनिस के कुछ इलाकों से सैनिकों की तैनाती कम कर दी गई.
सेना इन इलाकों से हटकर एक तय सीमा के पीछे चली गई, ताकि सीजफायर की शर्तों का पालन किया जा सके. जिन इलाकों से सेना हटी, वहां सत्ता और सुरक्षा की खाली जगह बनी, जिसे हमास ने तेजी से भरना शुरू कर दिया. अब दोबारा ये डर बढ़ रहा है कि सीजफायर पूरी तरह से फेल न हो जाए.

तो क्या सीजफायर के बाद हमास ने अपने हथियार नहीं छोड़े?
नहीं. सीजफायर का मतलब हथियार डालना नहीं होता. इसका मतलब सिर्फ इतना है कि दोनों पक्ष लड़ाई रोक दें. हमास ने इस समझौते के तहत अपने हथियार जमा नहीं किए और न ही फिलहाल उसे ऐसा करने के लिए कहा गया.
हमास गाजा में एक संगठन नहीं, बल्कि एक सिस्टम की तरह काम करता रहा है. उसके लड़ाके, कमांडर और नेटवर्क पूरी तरह खत्म नहीं हुए थे. इजरायली सेना के हटते ही जिन इलाकों में फोर्स नहीं थी, वहां हमास ने तेजी से वापसी की. न्यूयॉर्क टाइम्स में इजरायल की खुफिया एजेंसी के हवाले से बताया गया कि अब भी करीब 20 हजार लड़ाके सक्रिय हैं.
हमास के पास हथियार छिपाने का लंबा अनुभव है. सुरंगें, अंडरग्राउंड स्टोरेज और आम इमारतों में छुपाए गए हथियार पहले से मौजूद थे. लड़ाई के दौरान भले ही कई ठिकाने तबाह हुए, लेकिन पूरा ढांचा खत्म नहीं हुआ. सीजफायर मिलते ही उसने अपने लोगों को दोबारा संगठित किया और हथियार बाहर निकाले.
इसके अलावा हमास सिर्फ हथियारों के दम पर नहीं चलता. उसके पास पुलिस जैसी व्यवस्था भी है. सीजफायर के बाद उसने तुरंत अपनी पुलिस सड़कों पर उतारी. लोगों पर कंट्रोल, डर और सजा का इस्तेमाल करके उसने विरोध की आवाजें दबानी शुरू कर दीं. यह आतंकी संगठन आज भी गाजा में सरकार के मुख्य ढांचे चलाता है. इसमें सुरक्षा सेवाएं भी शामिल हैं. हमास के हथियारबंद लोग हर जगह तैनात दिखने लगे हैं, जहां इजरायली फोर्स हट चुकी.

क्या हमास के रहते अमेरिका गाजा में अपना विजन लागू नहीं कर सकता?
अमेरिका की पॉलिसी बिल्कुल साफ है. ट्रंप प्रशासन हमास को आतंकी संगठन मानता है और उसकी मौजूदगी में गाजा में दोबारा निर्माण, इनवेस्टमेंट और नई प्रशासनिक व्यवस्था को असंभव मानता है. यही वजह है कि अमेरिका सीधे तौर पर हमास के कंट्रोल वाले गाजा में काम करने को तैयार नहीं. लेकिन हकीकत यह है कि लगभग हमास अब भी वहां सुरक्षा व्यवस्था और स्थानीय नियंत्रण संभाले हुए है. चाहे वह कमजोर हुआ हो, लेकिन उसके बिना वहां किसी भी तरह की राहत, प्रशासन या निर्माण गतिविधि चलाना आसान नहीं.
हो सकता है कि ट्रांजिशनल सरकार के जरिए हमास को धीरे धीरे हाशिये पर डाला जा सके लेकिन इस दौरान रिकंस्ट्रक्शन की प्रोसेस और कमजोर हो जाएगी. इस बीच ट्रंप के कई साथी दूर भी हो सकते हैं, जबकि वे पहले ही अपने अनाप-शनाप बयानों और टैरिफ वॉर को लेकर घिर रहे हैं.