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2015 में इन चीजों के बढ़े दामों ने मचाई आफत

महंगाई कम होने का नाम नहीं ले रही. 2015 में बढ़ते दामों ने आम आदमी की जेब पर करारा वार किया और प्याज, टमाटर समेत कई चीजों को इसकी पहुंच से दूर कर दिया.

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महंगाई के बोझ तले पिसा आम आदमी
महंगाई के बोझ तले पिसा आम आदमी

सरकारी आकड़ों में भले ही देश में महंगाई घटने के संकेत मिल रहे हों लेकिन हकीकत यह है कि 2015 के दौरान देश में खाने-पीने के सामानों की महंगाई लगातार बढ़ी है. हमेशा की तरह इस साल की महंगाई ने भी मध्यम वर्गीय परिवारों के बजट को बिगाड़ कर रखा. निम्न वर्ग को तो पूरी तरह छोड़ दीजिए क्योंकि उन्हें तो सपने में भी ये महंगे खाद्य उत्पाद दिखाई नहीं दिए.

आसमान पर कीमतें
पिछले एक साल में जिस तरह खाने-पीने की चीजों के दाम आसमान पर पहुंचे हैं, उसने इस साल मनाए गए त्योहारों को फीका कर दिया. पहले प्याज, टमाटर और फिर दाल की कीमतों में आए उछाल ने देश की जनता को मंहगाई के आंसू रुला दिए. महंगाई इस कदर बढ़ी कि दो वक्त की रोटी के साथ प्याज और दाल एक सपना बन कर रह गया.

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62% महंगा हुआ प्याज

भारतीय रसोई की प्रिय सब्जी प्याज की बढ़ती कीमत ने देश की जनता को प्याज के आंसू रुलाए. इस साल प्याज 62% महंगा हुआ. दिल्ली में जहां प्याज पिछले साल 25-30 रुपये किलो था, वहीं इस साल प्याज की कीमत 80 रुपये प्रति किलो पहुंच गईं. इसके दाम बढ़ने की वजह जहां स्टोरेज की समस्या है वहीं जमाखोरी की परेशानी भी है.

150 फीसदी महंगा हुआ टमाटर

इस साल टमाटर के दाम 80 रुपये प्रति किलो तक पहुंचने से घर के बजट बिगड़ गए. फिलहाल दिल्ली में टमाटर 60-70 रुपये किलो बिक रहा है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, पिछले एक साल में इसकी कीमत में 150 फीसदी का इजाफा हुआ है. मंत्रालय द्वारा जारी एक रिपोर्ट के मुताबिक 2014 नवंबर में टमाटर 24 रुपये किलो था जो 2015 नवंबर 60-70 के बीच में बिक रहा है.

दाल में सब कुछ काला

इस साल दाल की कीमत में अच्छा-खासा उछाल देखने को मिला. जो अरहर की दाल पिछले साल 85 रुपये किलो के आस पास बिक रही थी, इस साल वह 200 रुपये के पार पहुंच गई. एक अनुमान के मुताबिक अरहर दाल 115 फीसदी, उड़द 95 फीसदी, चना दाल 50 फीसदी, मूंग दाल 23 फीसदी और मंसूर दाल 24 फीसदी महंगी हुई हैं. .

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सरसों का तेल

जहां एक साल पहले सरसों के तेल का भाव 85 रुपये के आसपास था वहीं अब कई जगहों पर इसके भाव 150 रुपये के पार हो गया है. बेमौसम बारिश के कारण सरसों के फसल को नुकसान हुआ जिसके चलते कम उत्पादन से इसके दाम बढ़ गए. सस्ते आयात से घरेलू उद्योग को बचाने के लिए त्योहारों से पहले सरकार ने 18 सितंबर को कच्चे और रिफाइंड खाद्य तेल पर आयात शुल्क 5% बढ़ा दिया था. तभी आशंका व्यक्त की जा रही थी कि त्योहारों में मांग बढ़ने पर खाद्य तेल महंगे हो जाएंगे.

इनसे मिली कुछ राहत
इस साल कुछ चीजों की महंगाई ने आफत मचाई तो कुछ चीजों के सस्ते होने से जनता को राहत की सांस मिली. जिसमें से एक है क्रूड ऑयल. अंतरराष्ट्रीय बाजार में पिछले साल क्रूड ऑयल की कीमत 70-80 डॉलर थी वहीं इस साल उसके दाम 40 रुपये डॉलर पर आ गए है. जिसके चलते पेट्रोल और डीजल के दाम में कमी आई है. इसके अलावा इससे बनने वाली और चीजें मसलन प्लास्टिक के सामान भी सस्ते हुए हैं.

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