ने बाबा रामदेव से अपील की है कि वे व्यक्ति विशेष के बारे में न सोचकर देश के बारे में सोचें.
अन्ना हजारे ने कहा कि पता नहीं ड्राफ्टिंग कमेटी के बारे में कहां गलतफहमी हो गई. इससे पहले बाबा रामदेव ने जन लोकपाल बिल के लिए बनी ड्राफ्टिंग कमेटी के बारे में कहा था कि कि इसमें शांति भूषण और प्रशांत भूषण दोनों ही क्यों हैं.
वैसे भ्रष्टाचार अबतक राजनेताओं का महज चुनावी मुद्दा बनता आया था, पर अब अन्ना हज़ारे ने पहली बार इसके खिलाफ एक ईमानदार आवाज उठाई. दुनिया ने देखा कि 4 दिनों के सत्याग्रह के बाद अन्ना की जीत हुई, देश की जनता की जीत हुई.
अन्ना हज़ारे ने शनिवार को अपना अनशन इस अल्टीमेटम के साथ खत्म किया कि अगर 15 अगस्त तक जन लोकपाल कानून पास नहीं, हुआ तो फिर छिड़ेगा जनांदोलन. पांचवें दिन सत्याग्रह के इस सिपाही का अनशन टूटा. हाथ में था सरकार का नया अध्यादेश.
देश के लिए ये दूसरी आजादी जैसा था. लड़ाई खत्म हुई इस कसम के साथ कि अगर सरकार की ओर से इस बिल को लागू करने में जरा भी ढिलाई बरती गई, तो आंदोलन दोबारा शुरू होगा. आंदोलन का सार-संक्षेप इस प्रकार है-
5 अप्रैल: पहला दिन
अन्ना की लड़ाई 5 अप्रैल को शुरू हुई. जन लोकपाल बिल की मांग को लेकर अन्ना दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनशन पर बैठे. शुरू में सरकार ने इसे हल्के में लिया, लेकिन जैसे-जैसे जनता जुड़ती गई, सरकार की बेचैनी बढ़ने लगी.{mospagebreak}
6 अप्रैल: दूसरा दिन
अगले दिन असर दिखा. लोकपाल पर बने ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स से शरद पवार ने हटने का एलान कर दिया. बुधवार की शाम कैबिनेट की बैठक में भी अन्ना का अनशन छाया रहा. मंत्रियों ने चिंता जाहिर की और सारा मसला पीएम पर छोड़ दिया.
7 अप्रैल: तीसरा दिन
गुरुवार को अन्ना का अनशन तीसरे दिन में प्रवेश कर चुका था. अब तक सरकार ने अन्ना से बातचीत की कोई कोशिश नहीं की थी. उधर अन्ना का जनसमर्थन लगातार बढ़ता जा रहा था. देशभर में आंदोलन और धरना-प्रदर्शन का दौर शुरू हो चुका था. सरकार पर दबाव बढ़ने लगा.
ऐसे में कपिल सिब्बल ने बीच का रास्ता निकालने के लिए प्रधानमंत्री से मुलाकात की. पीएम से मुलाकात के बाद सिब्बल ने अन्ना हजारे के प्रतिनिधि स्वामी अग्निवेश औऱ अरविंद केजरीवाल से बातचीत शुरू की. इस बातचीत में लोकपाल बिल पर संयुक्त समिति बनाने पर सरकार ने सहमति जताई.
सरकार ने ये तो मान लिया था कि समिति में आधे सदस्य अन्ना की टीम के होंगे, लेकिन बात अटक गई नोटिफिकेशन और अध्यक्ष को लेकर. सरकार अपना अध्यक्ष चाहती थी. बातचीत रुकी, तो अन्ना ने एक बार फिर हुंकार लगाई. सरकार हिलाने की चेतावनी दी.
8 अप्रैल: चौथा दिन
अन्ना बिना खाये-पिए अपनी जिद पर चौथे दिन भी अड़े रहे. सेहत बिगड़ रही थी. वजन ढाई किलो कम हो चुका था. ब्ल्ड प्रेशर में उतार-चढ़ाव जारी था. हर गुजरता पल सरकार पर दबाव बढ़ा रहा था. दिनभर बातचीत का दौर चलता रहा. आखिर में अन्ना ने अपना रुख थोड़ा नरम किया, तो सरकार भी झुक गई. जिन दो मुद्दों पर सरकार अड़ी हुई थी, उनपर सरकार झुक गई.{mospagebreak}
9 अप्रैल: पांचवां दिन
सहमति शुक्रवार को बन गई थी, लेकिन अन्ना ने एलान कर दिया था कि वे अधिसूचना की प्रति देखने के बाद ही अनशन तोड़ेंगे. हुआ भी यही. अधिसूचना की प्रति हाथ में आई और शनिवार की सुबह रालेगन के इस संत ने अनशन तोड़ दिया.