सबसे स्वच्छ घाट: अस्सी घाट, वाराणसी
वाराणसी में गंगा नदी के पौराणिक घाटों में से एक अस्सी घाट को तीन महीने के भीतर सुलभ इंटरनेशनल व्यापक सफाई अभियान चलाकर उसके मूल स्वरूप में ले आया. यह काम सुलभ के राष्ट्रीय सलाहकार बी.एन. चतुर्वेदी के निर्देशन में हुआ. आज अस्सी घाट बनारस के स्वच्छतम सार्वजनिक स्थलों में एक है.
भारत का सबसे स्वच्छ बाजार: कनॉट प्लेस
अंग्रेजों के जमाने का बेमिसाल वास्तुशिल्प वाला यह बाजार भारत में सबसे साफ-सुथरा बाजार है, जबकि यहां प्रति दिन करीब 10 लाख लोग पहुंचते हैं.
भारत का सबसे स्वच्छ समुद्र तट: हैवलॉक द्वीप, अंडमान-निकोबार
हैवलॉक द्वीप का समुद्र तट, खासकर राधानगर बीच पूरी तरह प्लास्टिक से मुक्त और साफ-सुथरा होकर सैलानियों का स्वागत करता है. राधानगर बीच पर सार्वजनिक शौचालय, हर 50 मीटर पर है, रद्दी की टोकरियां और सफाईकर्मी हैं, जो हर सुबह अच्छी तरह बीच की सफाई करते हैं.
गार्बेज गुरु: मैलहेम इकोस
पिछले 20 साल में देश भर में मैलहेम की 323 इकाइयां 2,23,912 टन कचरे का संशोधन कर उससे 1.47 करोड़ घनमीटर बायो गैस पैदा कर चुकी है. इससे करीब 6,625 टन एलपीजी की बचत हुई है और 1,40,750 टन कार्बन उत्सर्जन को घटाया जा सका है.
कम्युनिटी मोबलाइजर: नदिया जिला, पश्चिम बंगाल
नदिया के पूर्व डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट डॉक्टर पीबी सलीम ने अक्टूबर 2013 में पश्चिम बंगाल के नदिया जिले में ‘सबर शौचागार’ (सभी के लिए शौचालय) कार्यक्रम की शुरुआत की थी. आधिकारिक तौर पर शुरू किए जाने के 18 महीने के भीतर जिला प्रशासन यहां 3,55,609 शौचालय बनाने में कामयाब रहा. अब तकरीबन 51.6 लाख लोग इन शौचालयों का इस्तेमाल कर रहे हैं. 30 अप्रैल 2015 को नदिया जिले को खुले में शौच से पूरी तरह मुक्त घोषित किया गया.
कॉरपोरेट ट्रेलब्लेजर: पीरामल फाउंडेशन
सर्वजल परियोजना वंचित तबके के लोगों को अपनी विकेंद्रीकृत जल प्रबंधन व्यवस्था के जरिए कम पैसों में सुरक्षित पेयजल मुहैया कराती है. इस व्यवस्था में पानी के एटीएम भी शामिल हैं. सर्वजल परियोजना 12 राज्यों में 300 जगहों पर काम कर रही है और 3,00,000 लोगों को पानी उपलब्ध करा रही है.
भारत का सबसे स्वच्छ पार्क: रॉक गार्डन
चंडीगढ़ के रॉक गार्डन को सभी पार्कों में सबसे साफ-सुथरा पाया गया. रॉक गार्डन में रोजाना आने वाले लोगों की औसत संख्या तीन से चार हजार के बीच है, जो दिल्ली के लोदी गार्डन में आने वाले लोगों की संख्या के दोगुने से भी ज्यादा है.
देश का सबसे स्वच्छ हिल स्टेशन: गंगटोक
गंगटोक निगर निगम के आयुक्त सी.पी. ढकाल की निगरानी में वहां स्वच्छ भारत अभियान के हिस्से के रूप में सफाई का काम युद्ध स्तर पर चल रहा है. सफाई का नब्बे फीसदी हिस्सा तो इस हिल स्टेशन पर प्लास्टिक पर पाबंदी लगाकर हासिल किया गया है. सैलानियों को यहां अब एक साफ-सुथरी घूमने की जगह मिलती है.
टेक आइकॉन: आर. वासुदेवन
पर्यावरण अनुकूल ‘प्लास्टिक कोलतार सड़क तकनीक’ को पेटेंट करवाया, इसमें प्लास्टिक कचरे का इस्तेमाल सड़क निर्माण में किया जाता है. ये सड़कें कोलतार से निर्मित सड़कों की तुलना में तीन गुना अधिक टिकाऊ होती हैं. इससे केवल कचरे का प्रबंधन ही नहीं होता, बल्कि करोड़ों रुपये की बचत भी होती है.
सबसे स्वच्छ मंदिर का शहर: तिरुपति
जगह की कमी के बावजूद मंदिर के शहर तिरुपति में रोजाना 75,000 तीर्थयात्रियों का आगमन होता है. तिरुपति नगर निगम न केवल इन पर्यटकों की देखभाल में सक्षम है, बल्कि इससे यहां रहने वाले 3,75,000 निवासी भी खुश हैं.
टॉयलेट टाइटन: ईआरएएम सॉल्यूशन
स्वच्छता के क्षेत्र में अपनी दूरदर्शी मौलिकता ‘ई-शौचालय’ के लिए. भारत का पहला सार्वजनिक इलेक्ट्रॉनिक शौचालय, ये स्व-फ्लश शौचालय हैं और इन्हें रिमोट कंट्रोल के साथ ही रिमोट क्लीन भी किया जा सकता है. भारत के 18 राज्यों में 1,200 से अधिक ई-शौचालय इकाइयां और 200 मल प्रशोधन संयंत्र स्थापित किए गए हैं. ई-शौचालय प्रत्येक उपयोग के बाद सेंसर की मदद से बहुत कम पानी का इस्तेमाल कर स्वतः फ्लश करता है.
भारत का सबसे स्वच्छ स्मारक: विक्टोरिया मेमोरियल
हर साल मेमोरियल के संग्रहालय और बगीचे को देखने के लिए औसतन 21.5 लाख लोग पहुंचते हैं. फिर भी विक्टोरिया मेमोरियल एकदम साफ-सुथरा और व्यवस्थित रहता है. इस तरह यह देश में बाकी स्मारकों के लिए एक मॉडल बन सकता है.
वाटर वॉरियर: नांदी फाउंडेशन
नांदी कम्युनिटी वॉटर सर्विसेज (एनसीडब्ल्यूएस) ने पानी के वितरण का एक टिकाऊ और विकेंद्रित मॉडल ईजाद किया, जिसे कइयों ने अपनाया. रोज पीने लायक साफ पानी के लिए मामूली-सी कीमत चुकानी पड़ती है. इससे एक कदम और आगे बढ़कर एनसीडब्ल्यूएस अब दूर-दराज के गांवों में स्वच्छ पानी पहुंचाने के लिए राज्य सरकारों के साथ भागीदारी भी कर रहा है. नांदी कम्युनिटी वाटर सर्विसेज तक अब 30 लाख से अधिक लोगों की पहुंच है.