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Thappad Movie Review: जोरदार पड़ा तापसी का थप्पड़, बेहतरीन रहा 'अनुभव'

Thappad Review: तापसी पन्‍नू की थप्‍पड़ एक शानदार फिल्‍म है. यह तो बस एक जरिया है यह बताने के लिए कि ना थप्‍पड़ कोई मजाक है और ना औरत कोई चीज.

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Thappad Movie Review: तापसी पन्‍नू
Thappad Movie Review: तापसी पन्‍नू
फिल्म:Thappad
4/5
  • कलाकार :
  • निर्देशक :Anubhav Sinha

वकील- एक औरत को अपना घर जोड़े रखने के लिए थोड़ा बर्दाश्‍त करना पड़ता है...

अमृता (तापसी पन्नू) - जिस चीज को जोड़ना पड़े मतलब वो पहले से ही टूटी हुई है.

बात है तो सच पर क्‍या इस सच को कभी सम्‍मान मिला है. थोड़ी-थोड़ी कुर्बानियां देते-देते औरत कब एक कठपुतली बन जाती है उसे खुद इस बात का एहसास नहीं होता. और जब पति उस पर हाथ उठाता है तो औरत को लगता है कि ये पति का हक है. ऐसे ही घरेलू हिंसा की शुरुआत होती है. जी हां, अत्‍याचार सहना एक अपराध है. वो अपराध जो कल को आपके या आपकी बेटी, बहू के साथ हो सकता है और कहीं आप ये ना कहती रह जाएं कि औरत को थोड़ा बर्दाश्‍त करना होता है.

कहानी

अमृता (तापसी पन्‍नू) एक हाउसवाइफ है लेकिन अपनी च्‍वॉइस से और अपने घर का काम करना, पति का ख्‍याल रखना, सास की देखभाल करना उसे पसंद है. अमृता के पति विक्रम (पावेल गुलाटी) एक कंपनी में अच्‍छे पद पर कार्यरत हैं. कंपनी के एक प्रोजेक्‍ट को लेकर विक्रम जी-जान से काम करता है ताकि वे लोग लंदन जा सके. इस प्रोजेक्‍ट में जितनी मेहनत विक्रम करता है अमृता भी विक्रम का उतना ही ख्‍याल रखती है. लेकिन वह हाउसवाइफ है ना इसलिए उसके एफर्ट किसी को नजर नहीं आते.

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विक्रम को प्रोजेक्‍ट मिल जाता है. इस खुशी में वह घर में पार्टी रखता है लेकिन अचानक उसके बॉस की कॉल आती है और वो कहते हैं कि विक्रम लंदन तो जाएगा लेकिन उसकी पोस्‍ट वो नहीं जिसकी डील हुई थी. पोस्‍ट को लेकर विक्रम काफी गुस्‍सा हो जाता है. पार्टी के बीच वह कंपनी के एक सीनियर से इस बारे में कहता है कि वह सब जानते थे. अपने सीनियर से बहस के दौरान विक्रम के दोस्‍त और भाई उसे रोकने की कोश‍िश करते हैं. जब कोई उसे रोक नहीं पाता है तो विक्रम की पत्‍नी अमृता उसे साइड में ले जाने की कोश‍िश करती है. और अचानक विक्रम अमृता को सबके सामने थप्‍पड़ जड़ देता है.

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लोग तो इस बात को मामूली सी बात समझकर नजरअंदाज कर देते हैं लेकिन अमृता का आत्‍म-सम्‍मान चोटिल हो जाता है. वह कुछ नहीं बोलती पर विक्रम को भी अपनी गलती का एहसास नहीं होता है. उसे लगता है कि वह गुस्‍से में था इसलिए उसने अमृता पर हाथ उठा दिया. बात सिर्फ एक थप्‍पड़ की होती तो शायद माफ भी किया जा सकता था. पर पति को इस हरकत में अपनी गलती का एहसास ही ना हो और उसमें ग्‍लानि नाम की कोई चीज ना हो तो फिर पत्‍नी आगे कैसे उसपर भरोसा करे.

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यहीं से शुरू होती है अमृता की लड़ाई. वह पहले तो कुछ समय के लिए अपने मायके आ जाती है पर उसके घर ना लौटने से जब विक्रम को लगता है कि वह नहीं आएगी तो वह उसे घर वापस आने के लिए लीगल नोट‍िस भेज देता है. विक्रम के कानूनी पहल के बाद अमृता तलाक की अर्जी देती है. जब विक्रम को लगता है कि वह अमृता पर थोड़ा दबाव बनाएगा तो अमृता पर से कानूनी लड़ाई का भूत उतर जाएगा. पर अमृता पीछे नहीं हटती है. उसपर एल्‍कोहॉलिक होने, मेंटल होने के इल्‍जाम लगाए जाते हैं और उसके घर छोड़ने के पीछे विक्रम का लंदन प्रोजेक्‍ट हाथ से निकल जाने का आरोप लगाए जाते हैं पर फिर भी अमृता बिना एलीमनी मांगे बस एक थप्‍पड़ की पेट‍ीशन दायर करती है. इस बीच उसे पता चलता है कि वह प्रेग्‍नेंट है. वह खुश होती है, बच्‍चे के लिए रखी गई पूजा-पाठ में शामिल होती है पर विक्रम के साथ रहना नहीं चाहती.

अब प्रेग्‍नेंसी के बाद क्‍या अमृता अपने बच्‍चे के लिए ये लड़ाई छोड़ देगी? क्‍या फिर विक्रम को अपनी गलती का एहसास होगा? घरेलू हिंसा की शुरुआत जिन छोटी-छोटी चीजों से होती है, उस पर अमृता की यह पहल कितना रंग लाएगी और कितने लोगों को प्रेरित करेगी? इन सवालों के सारे जवाब हैं तो खूबसूरत लेकिन इसके लिए आपको फिल्म देखनी होगी.

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एक्‍ट‍िंग

अपने हर कैरेक्‍टर की तरह इस बार भी तापसी पन्‍नू अमृता के कैरेक्‍टर में सटीक नजर आईं. खुशमिजाज और चहकती महिला से लेकर उदास और अंदर से टूटी महिला के किरदार को तापसी ने काफी अच्‍छे से प्‍ले किया है. तापसी ने इससे पहले भी गंभीर रोल निभाए हैं पर थप्‍पड़ की बात ही अलग है. फिल्‍म में उनका डायलॉग- 'बस एक थप्‍पड़ पर नहीं मार सकता.' इसे कैसे भूल सकते हैं. वहीं विक्रम का रोल प्‍ले कर रहे पावेल गुलाटी ने भी अच्‍छा काम किया है. वह अपनी पत्‍नी से प्‍यार करते हैं लेकिन उन्‍हें अपने काम और इमोशंस का ज्‍यादा ख्‍याल है. उनके लिए अमृता उसकी बेटर-हाफ तो है और इसलिए उसपर विक्रम का पूरा हक है चाहे वह एक थप्‍पड़ ही क्‍यों ना हो. पावेल की एक्‍ट‍िंग उनके कैरेक्‍टर के मुताबिक काफी सही रही. फिल्‍म के बाकी सपोर्ट‍िंग एक्‍टर्स कुमुद मिश्रा, तनवी आजमी, रत्‍ना पाठक, दीया मिर्जा, राम कपूर ने भी बढ़‍िया काम किया है.

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कैसी है फिल्म?

मुल्‍क, आर्ट‍िकल 15 जैसे गंभीर मुद्दों पर काम करने वाले डायरेक्‍टर अनुभव सिन्‍हा की थप्‍पड़ वाकई एक बेहतरीन फिल्‍म है. एक हंसते-खेलते परिवार से कहानी की शुरुआत होती है. फिल्‍म सिर्फ इस एक मुद्दे को हाइलाइट नहीं करती बल्‍क‍ि औरत के कमजोर होने के पीछे छिपी उन सभी वजहों को भी उजागर करती है. जैसे औरत का अत्‍याचार सहना, औरत को पीछे करने के पीछे औरत का हाथ होना, समाज का ख्‍याल. वहीं तापसी पन्‍नू के साथ अनुभव की यह दूसरी फिल्‍म है. तापसी ने इससे पहले अनुभव के साथ मुल्‍क में काम किया था. हालांकि, मुल्‍क की कहानी अलग थी लेकिन इसमें भी एक गंभीर मुद्दे का सच सबके सामने लाया गया था. फिल्‍मों के जरिए समाज के सच को लोगों के सामने रखना अनुभव सिन्‍हा ने अपनी फिल्‍मों में बखूबी दिखाया है.

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ओवरऑल

थप्‍पड़ कुल-मिलाकर एक बढ़‍िया मूवी है. हां कुछ लोगों को यह जरूर लग सकता है कि फिल्‍म में थप्‍पड़ को बतंगड़ बना दिया गया पर ऐसा नहीं है. फिल्‍म तो बस एक जरिया है यह बताने के लिए कि ना थप्‍पड़ कोई मजाक है और ना औरत कोई चीज. प्‍यार हो या फिर शादी किसी भी रिश्‍ते में महिला और पुरुष दोनों एक दूसरे के पूरक हैं. दोनों ही बराबर के हकदार हैं.

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