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Movie Review: ओमार की सच्ची कहानी है 'ओमेर्टा', असरदार हैं राजकुमार

ओमेर्टा को कई फेस्टिवल्स में पहले ही दिखाया जा चुका है जहां इसकी तारीफ़ भी हुई हैं. इस फिल्म को सेंसर में मंजूरी के लिए काफी पापड़ बेलने पड़े. काफी मशक्कत के बाद किसी तरह ये रिलीज को तैयार है. आइए जानते हैं आखिर कैसी बनी है यह फिल्म...

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राजकुमार राव
राजकुमार राव

फिल्म का नाम : मेर्टा

डायरेक्टर: हंसल मेहता

स्टार कास्ट: राजकुमार राव, राजेश तैलंग, रुपिंदर नागरा, केवल अरोड़ा

अवधि: 1 घंटा 38 मिनट

सर्टिफिकेट: U/A

रेटिंग: 3.5 स्टार

नेशनल अवॉर्ड विनिंग निर्देशक हंसला मेहता और राजकुमार राव की जोड़ी ने शाहिद, सिटी लाइट्स, अलीगढ़ जैसी बेहतरीन फिल्में दी हैं. अब ये जोड़ी ओमेर्टा को लेकर एक बार फिर से अलग तरह का सिनेमा दर्शकों को देने जा रही है. फिल्म को कई फेस्टिवल्स में पहले ही दिखाया जा चुका है जहां इसकी तारीफ़ भी हुई हैं. इस फिल्म को सेंसर में मंजूरी के लिए काफी पापड़ बेलने पड़े. काफी मशक्कत के बाद किसी तरह ये रिलीज को तैयार है. आइए जानते हैं आखिर कैसी बनी है यह फिल्म...

कहानी

फिल्म की कहानी ओमार शाहिद शेख (राजकुमार राव) की है जो पैदा तो पाकिस्तान में हुआ, लेकिन उसका पालन-पोषण और परवरिश लंदन में हुई है. ओमार, बोसनिया में मुसलामानों पर हुए हमलों का बदला लेने के लिए पहले पाकिस्तान जाता है और फिर वहां से भारत के दिल्ली में रहकर कई घटनाओं को अंजाम देता है. फिल्म में 1992 से लेकर 2002 तक की अवधि में ओमार के क्रियाकलापों के बारे में बताया गया है. जिसमें दिल्ली में विदेशियों की किडनैपिंग, कांधार विमान समझौता, वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हमला और साथ ही ब्रिटिश जर्नलिस्ट डेनियल पर्ल की हत्या के साथ-साथ और भी कई अहम घटनाओं का जिक्र है. फिल्म में तमाम संदर्भों को किस तरह दिखाया गया है इसके लिए आपको फिल्म देखनी पड़ेगी.

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आखिर क्यों देखें?

यह फिल्म मात्र 98 मिनट की है जो कि हंसल मेहता की आज तक की सबसे छोटी फिल्म है. लेकिन राजकुमार राव ने एक बार फिर से बहुत ही उम्दा अभिनय किया है. वो ओमार के किरदार में पूरी तरह से लिप्त नजर आते हैं और कई ऐसे सीन बन पड़े हैं जहां राजकुमार राव आपको बिल्कुल अलग अवतार में देखा जा सकता है. हम यह भी कह सकते हैं कि इस फिल्म को बनाना आसान काम नहीं था. ऐसी फिल्म हंसल मेहता जैसे फिल्ममेकर ही बना सकते हैं. फिल्म का बैकग्राउंड स्कोर बहुत बढ़िया है. कई ऐसे सीन हैं जो आपको सोचने पर विवश करते हैं कि क्या सच में इतना खतरनाक आतंकवादी था ओमार. फिल्म की रिसर्च वर्क कमाल है. फिल्म देखते हुए ऐसा बिल्कुल नहीं लगता कि इसे बनाने के लिए हंसल मेहता ने एक बार भी ओमार या उसके परिवार से मुलाक़ात नहीं की हो. फिल्म की रफ़्तार बहुत ही शानदार है.

कमजोर कड़ी

फिल्म में कुछ भी ऐसा नहीं है, जो कमजोर दिखे. हालांकि जब यह फिल्म फेस्टिवल में दिखाई गई थी तो कई सीन मौजूद थे, जिन्हे सेंसर किए जाने के बाद अब दर्शक नहीं देख पाएंगे. हालांकि जिस तरह से हंसल मेहता ने फिल्म को बनाया है वो काफी उम्दा है. अगर आप एडल्ट हैं तो फिल्म को मिस नहीं कर सकते.

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बॉक्स ऑफिस

फिल्म का बजट करीब 14  करोड़ बताया जा रहा है. देखना दिलचस्प होगा कि फिल्म को कितनी बड़ी रिलीज मिलती है और साथ ही इसका वीकेंड कलेक्शन भी निर्माताओं के लिए काफी महत्वपूर्ण होने वाला है. अवेंजर्स पहले से ही बॉक्स ऑफिस पर भूचाल मचा रही है, अवेंजर्स और अमिताभ-ऋषि की 102 नॉट आउट की मौजूदगी में इस फिल्म को कितनी स्क्रीन्स मिलने वाली हैं, ये दिलचस्प होगा.

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