scorecardresearch
 

दिल से हिंदुस्तानी थे कादर खान: काबुल में जन्म, मुंबई में काम, कनाडा में मौत

Kader Khan unforgettable journey बॉलीवुड में कई शानदार सुपरस्टार हैं, लेकिन ऐसे कलाकार चुन‍िंदा हैं ज‍िनका एक सीन में होना ही पूरी फिल्म को यादगार बना दे. कादर खान ऐसे ही कर‍िश्माई अदाकार थे.

Advertisement
X
कादर खान PHOTO- PTI
कादर खान PHOTO- PTI

Kader Khan Unforgettable Journey From Kabul to Mumbai बॉलीवुड में कई शानदार सुपरस्टार हैं. लेकिन ऐसे कलाकार चुन‍िंदा हैं ज‍िनका एक सीन में होना ही पूरी फिल्म को यादगार बना दे. ऐसे ही कर‍िश्माई अदाकारी के हुनर से खुदा ने कादर खान को नवाजा था. वो जब भी पर्दे पर नजर आए, उन्होंने दर्शकों के द‍िल तक छाप छोड़ी. लेकिन उनकी ज‍िंदगी पर गौर करें तो ये सफर भी किसी फिल्म की कहानी से कम नहीं रहा.

अफगानिस्तान के काबुल में जन्मे कादर खान को मुंबई शहर ने नाम द‍िया, पहचान द‍िलाई. दिल से पक्के हिंदुस्तानी, कादर खान को मौत के बाद दफन होने के दो गज जमीन भी तीसरे देश यानी में कनाडा मिल रही है. उनके बेटे सरफराज ने बताया है, "मेरे प‍िता को कनाडा में सुपुर्द-ए-ख़ाक किया जाएगा."

Advertisement

हालांकि कादर खान ज‍िंदगी के आख‍िरी पलों को हिंदुस्तान में जीना चाहते थे. वो एक बार फिर पर्दे पर अपना हुनर भी ब‍िखेरना चाहते थे. इस बात का ज‍िक्र कई फिल्मों में उनके साथी कलाकार रहे शक्त‍ि कपूर ने एक इंटरव्यू में किया.

शक्त‍ि कपूर ने बताया, "जब मैंने उनसे आखिरी बार मुलाकात की थी, तो उन्होंने कहा था कि वो वापसी करेंगे. खास बात ये है कि वो दुनिया को समझाना चाहते थे कि इंसानियत होती क्या है."  ज‍िंदगी के आख‍िरी वक्त में बीमारी की वज‍ह से कादर खान की हिंदुस्तान वापसी नहीं हो सकी.

ये बात बेशक उनके लिए ज‍ितनी कसक भरी है, उतनी ही ये बात कादर खान के फैंस के लिए टीस भरी है. लेकिन अपनी मौत पर भी वो फैंस को हंसाते हुए चले गए, इसकी वजह ये है कि मौत पर भी स‍िर्फ उनके शानदार डॉयलाग्स और कॉमेडी सीन याद आ रहे हैं. जो उदास चेहरों पर हंसी छोड़ जाते हैं.

कादर खान के काबुल से कनाडा के सफर पर...

कादर खान का जन्म 22 अक्टूबर, 1937 को अफगानिस्तान के काबुल में हुआ था. बेहद कम उम्र में उनका परिवार मुंबई चला आया. यहीं उन्होंने पढ़ाई की और कॉलेज में प्रोफ़ेसर की नौकरी भी की. 36 साल की उम्र में 1973 में उन्हें 'दाग’ फिल्म से बतौर एक्टर करियर की शुरुआत करने का मौका मिला.

Advertisement

इससे पहले वह रणधीर कपूर और जया बच्चन की फिल्म ‘जवानी-दिवानी’ के लिए संवाद लिख चुके थे. एक पटकथा लेखक के तौर पर कादर खान ने मनमोहन देसाई और प्रकाश मेहरा के साथ कई फिल्में लिखी. इनमें ज्यादातर अमिताभ बच्चन की फ़िल्में शामिल हैं. इनके संवाद ने अमिताभ को हर दिल अजीज बना दिया. अमिताभ के साथ इन तमाम फिल्मों में कादर खान ने अभिनय भी किया.

सीनियर एक्टर ने अपने करियर में छोटे-बड़े कई तरह के किरदार पर्दे पर न‍िभाए. लेकिन उनकी कॉमिक टाइमिंग सबसे शानदार रही. आज भी उनके जैसे कॉमेड‍ियन होना नामुमकिन-सी बात है. करियर के आखिरी दौर में उन्होंने गोविंदा की फिल्मों में जमकर हास्य अभिनय किया. एक समय तो कादर खान, गोविंदा और शक्ति कपूर की तिकड़ी कॉमेडी का पर्याय बन गई थी.

ह‍िंदी स‍िनेमा की तकरीबन 200 फिल्मों में कादर खान के ह‍िट संवाद छाए हुए हैं. ह‍िंदी स‍िनेमा में योगदान के लिए इस फनकार को सद‍ियां याद करेंगीं. क्योंकि कहते हैं इंसान मरते हैं कलाकार याद रह जाते हैं.

Advertisement
Advertisement