हर डायरेक्टर का कोई न कोई आजमाया हुआ फॉर्मूला होता है जो हमेशा कारगर सिद्ध होता है और डायरेक्टर विशाल भारद्वाज का आजमाया हुआ फॉर्मूला है अंग्रेजी साहित्यकार शेक्सपियर के नाटकों को हिंदी फिल्मों में रुपांतरित करना.
फिलहाल ‘मक़बूल’ और ‘ओंकारा’ के बाद विशाल भारद्वाज, हैदर’ के साथ आ रहे हैं. ‘हैदर’ विलियम शेक्सपियर के चर्चित नाटक ‘हैमलेट’ से प्रेरित है. ‘हैदर’ के साथ विशाल विलियम शेक्सपियर के नाटकों पर अपनी तिकडी पूरी करने जा रहे हैं. जहां कुछ लोगों का मानना है कि विशाल ने अपनी पिछली फिल्म ‘मटरू की बिजली की मंडोला’ की असफलता को देखते हुए सोच-समझकर ‘हैदर’ पर दांव लगाया है वहीं कुछ लोग इस उधेड़बुन में हैं कि क्या विशाल का यह फॉर्मूला कारगर सिद्ध होगा?
देखें, हारमोनियम बजाने वाले विशाल भारद्वाज का 'हैदर' तक सफर
इस सवाल के जवाब में विशाल कहते हैं, "यह नुस्खा नहीं यह विलियम शेक्सपियर का साहित्य है. अगर नुस्खा होता तो कब का खत्म हो चुका होता लेकिन यह चार सौ साढ़े चार सौ साल से चला आ रहा है. रही बात मेरी पिछली फिल्म ‘मटरु...’ की असफलता की, तो यकीन कीजिए मेरी पिछली फिल्मों की सफलता या असफलता मेरे लिए कोई मायने नहीं रखती. मैं अतीत में नहीं वर्तमान में रहनेवाला शख्स हूं. हां एक सच यह भी है कि आप अपनी गलतियों से सीखते हैं. सिर्फ ‘हैदर’ ही नहीं अपनी सभी फिल्मों के बारे में मैं यही सोचता हूं." हैदर 2 अक्तूबर को रिलीज हो रही है.