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आयुष्मान खुराना ने की आर्टिकल 15 को टैक्स फ्री करने की मांग, बताया क्यों है जरूरी

आयुष्मान खुराना स्टारर फिल्म आर्ट‍िकल 15 की स्पेशल स्क्रीनिंग के दौरान एक्टर ने कहा कि मूवी को देश में टैक्स फ्री घोषित कर देना चाहिए. आयुष्मान का मानना है कि ये फिल्म ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचनी चाहिए.

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आर्ट‍िकल 15 में आयुष्मान खुराना
आर्ट‍िकल 15 में आयुष्मान खुराना

आयुष्मान खुराना स्टारर फिल्म आर्ट‍िकल 15 शुक्रवार को रिलीज हो गई. सिनेमाघरों में रिलीज से पहले मुंबई में फिल्म की स्पेशल स्क्रीनिंग के दौरान आयुष्मान खुराना ने कहा कि फिल्म को देश में टैक्स फ्री घोषित कर देना चाहिए.

आयुष्मान खुराना ने मीडिया से कहा, फिल्म ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचे इसलिए इसे देश में टैक्स फ्री कर देना चाहिए. यह भारतीय संविधान के आर्ट‍िकल 15 पर आधारित है जो धर्म, जाति, लिंग और जन्म स्थान के आधार पर भारतीयों के बीच भेदभाव करने से रोकती है. यह फिल्म सच्ची घटना से प्रेरित है.

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आयुष्मान ने कहा, इस फिल्म का देश के हर कोने तक पहुंचना जरूरी है. यह कोई कॉमेडी या मनोरंजक फिल्म नहीं है. यह एक बहुत ही अहम मुद्दे पर बनी है और यह ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचे.' वहीं फिल्म के ट्रेलर पर ऑडियंस के रिएक्शन को लेकर आयुष्मान ने कहा, 'हमें फिल्म के ट्रेलर को लेकर ढ़ेर सारा प्यार मिला और फिल्म के लिए अच्छे रिव्यूज भी आ रहे हैं. मुझे लगता है कि यह आज के समय के लिए बहुत ही सही फिल्म है और हर नागरिक को इसे देखना चाहिए.'

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बता दें कि आर्ट‍िकल 15 का लेकर कुछ वर्ग विरोध जता रहे हैं. कुछ संगठनों ने तो इसकी रिलीज के खिलाफ भी आवाज उठाई है. आयुष्मान ने कहा, ''फिल्म के डायरेक्टर अनुभव सिन्हा ने एक बयान जारी किया था. जिसमें लिखा था कि हमने किसी भी समुदाय की नकारात्मक छवि नहीं दिखाई है, खासकर ब्राह्मण समुदाय की. जब लोग फिल्म देखेंगे तो उन्हें पता चलेगा कि फिल्म में जो समर्थक हैं वे ब्राह्मण समुदाय से हैं और इसलिए हमने किसी की भी आलोचना नहीं की है.''

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भारत में मौजूद कास्ट सिस्टम पर आयुष्मान खुराना ने कहा कि 'जब मैं कॉलेज के दिनों में स्ट्रीट प्ले में परफॉर्म करता था तो हम बहुत सारे सामाजिक परेशानियों से डील करते थे. इसके अलावा फिल्म की शूटिंग के दौरान मैंने इस समस्या से जुड़ी कुछ किताबें भी पढ़ी हैं इसलिए मैं देश में मौजूद जातिवाद को जानता हूं. यह ग्रामीण इलाकों में बहुत ही उग्र है. शहरी क्षेत्रों में आप इंटरकास्ट मैरिज देख सकते हैं जबकि गांवों में ऐसा नहीं होता.' फिल्म के सबसे जरूरी विषय पर बात करते हुए आयुष्मान ने कहा कि फिल्म के जरिए उन्होंने लोगों को यह बताने की कोशिश की है कि देश में आज भी जातिवाद मौजूद है और हमें इस समस्या का हल करना होगा.

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