फर्ज कीजिए एक सीन के बारे में, जब कोई लड़का अपनी गर्लफ्रेंड को किसी रेस्टोरेंट में बुलाकर उससे ब्रेकअप की बात कहता है. ऐसी स्थिति में ये लड़की किस तरह की प्रतिक्रिया देगी? वो बेहद उदास होते हुए रो सकती हैं, शायद इस पूरी स्थिति को अजीबोगरीब समझते हुए जोर का ठहाका भी लगा सकती है, अपने बॉयफ्रेंड पर गुस्से में पानी फेंक सकती है, वो पूरी तरह से शॉक हो सकती है या फिर शून्यभाव के साथ एकदम स्तब्ध अवस्था में नज़र आ सकती है.
ये महिला किसी भी तरह से प्रतिक्रिया दे, उसकी वो प्रतिक्रिया विश्वास करने लायक होनी चाहिए और अगर उसके हावभाव से ऐसा नहीं लगता है तो वो कहीं ना कहीं अच्छी एक्टर की श्रेणी में नहीं आएगी. अर्जुन कपूर की भी यही समस्या है. दरअसल, अर्जुन कपूर की नई फिल्म इंडियाज मोस्ट वॉन्टेड का ट्रेलर रिलीज़ हो गया है. रिलीज़ होने के साथ ही ये काफी ट्रेंड भी कर रहा है.
ये कहानी 5 ऐसे आम इंसानों की है जो भारत के सबसे खतरनाक आतंकी को बेहद कम संसाधनों के साथ वापस लाने की कोशिश में है. लंबे अरसे के बाद अर्जुन कपूर बड़े पर्दे पर वापसी कर रहे हैं, लेकिन उनके कुछ सीन्स को देखकर ही एहसास हो जाता है कि ये फिल्म भले कैसी भी हो, लेकिन अर्जुन की एक्टिंग फिलहाल ट्रेलर में दोयम दर्जे की नजर आ रही है.
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किसी एक्टर को देखकर विश्वास होना चाहिए कि उसका किरदार फिल्म में जिस भी परिस्थिति से गुजर रहा है वो एक्टर उन स्थितियों को फील कर पा रहा है. इसलिए कैरेक्टर की आत्मा को पकड़ने के लिए निर्देशक और एक्टर्स तमाम तरह की वर्कशॉप कराते हैं. अगर एक्टर का अपने किरदार के साथ वो कनेक्शन नहीं है तो साफ एहसास हो जाता है कि एक्टर फेक कर रहा है.
अर्जुन कपूर इस मायने में बिल्कुल खरे नहीं उतरते हैं. इंडियाज मोस्ट वॉन्टेड के ट्रेलर के एक सीन में वे आतंकियों से जुड़े खतरे के बारे में फोन पर बात कर रहे होते हैं, लेकिन उनके एक्सप्रेशन्स और आवाज़ के टोन से लगता है कि वे जैसे अपनी किसी गर्लफ्रेंड से इमोशनल बातचीत कर रहे हों.
कोई भी बेहतरीन एक्टर किसी औसत एक्टर से कई मायनों में अलग होता है. कोई भी महान एक्टर खुली किताब की तरह होता है और वे अपनी ज़िंदगी से जुड़ी किसी भी तरह की असुरक्षा, इमोशनल जटिलताएं जैसी चीजों को पर्दे के सामने दिखाने में किसी भी तरह का गुरेज नहीं करते. लेकिन औसत एक्टर्स के लिए ज्यादातर ये संभव नहीं हो पाता है. वे अपने दोषपूर्ण और अतिसंवेदनशील मन के हिस्सों को खोलने में कंफर्टेबल नहीं हो पाते है, इसके चलते बेहद इंटेन्स सीन्स में कहीं ना कहीं उनकी परफॉर्मेंस किसी महान परफॉर्मेंस की बराबरी नहीं कर पाती. अर्जुन के ज्यादातर सीन्स देखकर भी यही लगता है कि वे गार्डेड हैं और इस किरदार में उतनी गहराई में नहीं जा पाए हैं जैसा अक्सर मनोज बाजपेयी जैसे किसी कलाकार को देख कर लगता है.
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किसी एक्टर के लिए ये भी बहुत जरूरी है कि वो दर्शकों को सरप्राइज़ करे. ऐसा नहीं है कि उसे हर फ्रेम में लोगों का ध्यान खींचने के लिए कुछ ना कुछ अटपटा करने की जरूरत है, बल्कि इसे कुछ इस तरह कहा जा सकता है कि उस एक्टर के आने वाले रिएक्शन के बारे में दर्शकों का पता ना लग पाए. अगर दर्शक किसी एक्टर की बॉडी लैंग्वेज और फिल्म के प्लॉट के चलते आने वाले सीन्स को देखकर आराम से पता लगा पा रहे है कि क्या होने वाला है तो वे पूरी तरह से दिलचस्पी खो देते हैं. अर्जुन कपूर फिल्म के ट्रेलर में एक बार भी सरप्राइज़ नहीं करते हैं बल्कि उनकी तो बॉडी लैंग्वेज इतनी ज्यादा ढीली है कि वो कहीं से भी अंडरकवर जासूस तक नहीं लग रहे हैं. ट्रेलर में डायलॉग्स जितने औसत हैं, उससे ज्यादा औसत अर्जुन कपूर की डायलॉग डिलीवरी है.लगभग अपनी सभी फिल्मों में अर्जुन कपूर ऐसे ही नजर आते हैं.
इसके अलावा आंखें किसी भी एक्टर का सबसे महत्वपूर्ण हथियार होता है. लेकिन अर्जुन की आंखें पूरे इंडियाज मोस्ट वांटेड के ट्रेलर में एक निश्चित जोन में ही रहती हैं जिससे ऐसा लगता है कि वे घर से नाराज होकर सेट पर पहुंचे हों और इसी अवस्था में ही उन्होंने फिल्म की पूरी शूटिंग निपटा दी हो. फिल्म आने के बाद इसका बॉक्स ऑफिस पर जो भी हश्र हो, लेकिन इतना निश्चित है कि ऐसी एक्टिंग के साथ अर्जुन कपूर का हश्र खास नहीं होने जा रहा है जो फिल्म के यूट्यूब ट्रेलर पर आए ज्यादातर कमेंट्स से भी साफ हो जाता है.पता नहीं एक्टर के तौर पर अर्जुन कपूर का अच्छा टाइम कब आएगा?
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