शंकर महादेवन भारतीय संगीत जगत में बड़ा नाम हैं. उनके जैसी विविधता पाना इतना आसान नहीं है. शंकर ने क्लासिकल और वेस्टर्न म्यूजिक को साथ में लेकर ऐसे सुरीले नगमें रचे हैं जिस वजह से वे आरडी बर्मन, ए आर रहमान, ओपी नैयर जैसे महान गीतकारों की लिस्ट में शुमार हो चुके हैं. उनके जन्मदिन पर बता रहे हैं शंकर के जीवन से जुड़े कुछ रोचक किस्से.
शंकर महादेव का जन्म 3 मार्च, 1967 को मुंबई में हुआ था. वे पिछले दो दशकों से एक म्यूजिक कंपोजर, और सिंगर के तौर पर भारतीय संगीत जगत का हिस्सा हैं. पंडित श्रीनिवास खाले से उन्होंने शास्त्रीय संगीत की आरंभिक शिक्षा लेनी शुरू की.
शंकर ने बॉलीवुड में कई फिल्मों के लिए सुपरहिट म्यूजिक दिया है. मिशन कश्मीर, दिल चाहता है, कल हो ना हो, लक्ष्य, बंटी और बबली, माई नेम इज खान, रॉक ऑन, जिंदगी ना मिलेगी दोबारा, टू स्टेट्स और चिटगांव जैसी फिल्मों में संगीत दे चुके हैं.
सिर्फ हिंदी ही नहीं, महादेवन तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मराठी और बंगाली भाषा में भी गा चुके हैं. फिल्मों के अलावा वे लाइफ कंसर्ट्स का भी हिस्सा बनते रहते हैं. संगीत में करियर शुरू करने से पहले महादेवन, Oracle में सॉफ्टवेयर प्रोग्रामर का काम करते थे.
अपने करियर में शंकर ने 4 बार नेशनल अवॉर्ड जीते हैं. कल हो ना हो में श्रेष्ठ संगीत निर्देशन के लिए शंकर एहसान लॉय को नेशनल अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था. इसके अलावा उन्हें साल 2000 में 'Yenna Solla Pogirai', 2007 में तारे जमीन पर के गाने 'मां', और साल 2012 में आई फिल्म चिटगांव के गाने '' बोलो ना '' के लिए श्रेष्ठ गायक के नेशनल अवॉर्ड से सम्मानित किया जा चुका है.
सिर्फ गायकी ही नहीं, शंकर महादेवन अभिनय के क्षेत्र में भी हाथ आजमा चुके हैं. 1995 में दूरदर्शन पर प्रसारित टीवी सीरियल, एक से बढ़ कर एक में नजर आए थे. इसके अलावा साल 2015 में वे मराठी फिल्म Katyar Kaljat Ghusali में भी अभिनय करते नजर आए थे.
शंकर महादेवन के वाइफ की मानें तो वे खाना भी बहुत अच्छा बनाते हैं. शंकर की वाइफ तो यहां तक कहती हैं कि वे अगर एक संगीतकार ना होते तो वे शेफ होते.