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'खुद को गोली मार लूंगा', बेटे युवराज को पिता योगराज ने जिद्द से बनाया क्रिकेटर, फेंक दिए थे मेडल

योगराज सिंह ने याद किया कि बेटे युवराज सिर्फ 5-6 साल के थे जब उन्होंने उनके मेडल और स्केट्स कार से बाहर फेंक दिए थे, क्योंकि वे एक क्रिकेट चैंपियन तैयार करना चाहते थे जो एक दिन उनके लिए बदला लेगा.

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योगराज सिंह की जिद्द से क्रिकेटर बने बेटे युवराज सिंह (Photo: Screengrab)
योगराज सिंह की जिद्द से क्रिकेटर बने बेटे युवराज सिंह (Photo: Screengrab)

युवराज सिंह के पिता योगराज सिंह उनके पहले कोच थे. योगराज आज भी बच्चों को कोचिंग देते हैं. साथ ही योगराज, पंजाबी फिल्मों में एक्टर के रूप में काम करते हैं. योगराज सिंह ने हाल ही में उस समय के बारे में खुलकर बात की जब उन्होंने छोटे युवराज को परिवार की इच्छा के खिलाफ ट्रेनिंग शुरू की थी. उन्होंने याद किया कि युवराज सिर्फ 5-6 साल के थे जब उन्होंने उनके मेडल और स्केट्स कार से बाहर फेंक दिए थे, क्योंकि वे एक क्रिकेट चैंपियन तैयार करना चाहते थे जो एक दिन उनके लिए बदला लेगा.

'मैं खुद को गोली मार लूंगा'

यूट्यूब चैनल Sports Launchpad By Saurav Yaduvanshi पर एक बातचीत में योगराज सिंह ने युवराज के कुछ महीने के होने के समय की एक घटना को याद किया. उन्होंने कहा, 'एक दिन मैं बहुत दुखी था, बहुत रो रहा था और सोच रहा था कि भगवान ने मेरे साथ क्या किया है. रात के 2-3 बजे मैंने युवी को उठाया और उसे गले लगा लिया. मैंने सोचा कि अगर मैं ऐसे ही मर गया तो इसका कोई मतलब नहीं होगा. मेरे परिवारवाले भी कहेंगे कि इस आदमी ने कुछ नहीं किया. मैंने युवी को गुरु ग्रंथ साहिब के सामने रखा और कहा कि या तो मुझे ले जाओ या उसे आशीर्वाद दो.' उन्होंने आगे बताया कि वे हारने वाले की तरह जीना नहीं चाहते थे. योगराज बोले, 'मैं खुद को गोली मार लूंगा.'

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योगराज सिंह ने याद किया कि जब युवराज डेढ़ साल के करीब थे, तो उन्होंने उन्हें प्लास्टिक का बल्ला दिया था और गेंद मारते ही उन्होंने इतनी ताकत लगाई कि खिड़की का शीशा तोड़ दिया. योगराज ने कहा कि उस समय तक उन्होंने बेटे को कुछ नहीं सिखाया था. उन्होंने बताया, 'मैंने सोचा कि यह बच्चा एक पैकेज है. उसने अभी-अभी चलना शुरू किया था.'

योगराज ने बताया कि जैसे-जैसे युवराज बड़े होने लगे, वे टेनिस और स्केटिंग खेलने लगे और क्रिकेट में उनकी रुचि कम होने लगी. उन्हें क्रिकेट की ओर वापस लाने के लिए योगराज ने कुछ कठोर कदम उठाया. उन्होंने कहा, 'मैं चाहता था कि मेरा बेटा मेरे लिए बदला ले, सिस्टम से, सिलेक्टर्स से और उन सब से जो मुझ पर हंसते थे.' योगराज ने कभी कपिल देव के साथ क्रिकेट खेला था, जो बाद में अपने दौर के सबसे लोकप्रिय खिलाड़ियों में से एक बने.

युवराज के मेडल फेंकें बाहर

योगराज सिंह ने याद किया, 'युवराज एक दिन स्केटिंग कॉम्पिटिशन में खेल रहा था और उसे बहुत सारे मेडल मिले. हम कार में बैठे और मैंने उसके मेडल लेकर कार से बाहर फेंक दिए. यह गलत काम था. फिर मैंने उसके स्केट्स लेकर बाहर फेंक दिए और वह रोने लगा.' जैसे ही छोटे युवराज रोने लगे, योगराज ने गरजकर कहा, 'चुप रहो.' चूंकि उनका 'बहुत खराब गुस्सा' था, इसलिए युवराज और उनकी मां कार में ज्यादा कुछ नहीं बोले.

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घर पहुंचने पर योगराज की मां ने उन्हें कहा कि अगर वे युवराज को इस तरह परेशान करते रहेंगे तो घर से निकल जाएं. उन्होंने बताया, 'उन्होंने कहा कि तुम्हारा मर जाना बेहतर है. उन्होंने कहा कि अगर तुम मेरे पोते के साथ ऐसा व्यवहार करोगे तो घर से निकल जाओ. उन्होंने मुझे बहुत गालियां दीं. मैंने उन्हें कहा, 'या तो मैं इस घर में रहूंगा या वह रहेगा. मैं चाहता हूं कि वह क्रिकेट खेले, और मैं तब तक नहीं छोड़ूंगा जब तक वह नहीं खेलता. तुम जो चाहो कर लो.' योगराज ने गर्व से घोषणा की कि उन्होंने युवराज को कैंसर से लड़ते हुए भी क्रिकेट खेलने वाला बना दिया था. योगराज ने अंत में कहा, 'चैंपियन ऐसे ही बनते हैं.'

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