हमारे देश के साथ-साथ पाकिस्तानी सिनेमा में भी ऐसे कई आर्टिस्ट हैं, जिनकी कला तो कमाल है, लेकिन उन्हें फेम खास नहीं मिला. इन्हीं में से एक हैं पाकिस्तानी लोक गायिका नसीबो लाल. नसीबो की आवाज का अपना अलग फन और दम है. मगर उन्हें पहचानते कम ही लोग हैं. कम से कम उनके एक्स (पहले ट्विटर) पर वायरल हो रहे वीडियो को देखकर तो ऐसा ही लगता है.
भीड़ में गाती दिखीं पाकिस्तानी लेजेंड
एक्स पर एक वीडियो सामने आया है, जिसमें एक महिला भीड़ में बैठी बॉलीवुड का फेमस रोमांटिक गाना गा रही हैं. भीड़ के बीच जमीन पर बैठी महिला ने ब्राउन स्वेटर के साथ येलो शॉल और सलवार पहनी हुई है. महिला जिस कमरे में बैठी हैं, वो गंदा-मंदा-सा है और उनके आसपास कई मर्द बैठे उनकी तारीफ कर रहे हैं. ढोलक की थाप पर महिला, लता मंगेशकर का फेमस गाना 'बाहों में चले आओ' अपने अंदाज में गा रही हैं. वो ऐसा राग पकड़ती हैं कि सुनकर सभी का दिल खुश हो जाता है.
यूजर्स ने पूछे सवाल
लेकिन कमेंट सेक्शन में ज्यादातर यूजर्स पहचान ही नहीं पा रहे कि आखिर वीडियो में नजर आ रही सादे अंदाज वाली सादी महफिल में बैठी ये महिला असल में हैं कौन. बहुत सारे यूजर्स वीडियो पर कमेंट कर ये सवाल पूछ रहे हैं. न जानने वालों को बता दें कि ये महिला पाकिस्तानी की लेजेंडरी लोक गायिका नसीबो लाल हैं. अगर आपने उन्हें नाम से नहीं पहचाना तो उनका काम भी गिनवा देते हैं.
इस सुपरहिट को गाने को था गाया
नसीबो लाल को आपने पाकिस्तानी कोक स्टूडियो के बेहद फेमस गाने 'तू झूम' में जरूर सुना होगा. कोक स्टूडियो सीजन 14 में आए इस गाने को उन्होंने, एक और लेजेंडरी पाकिस्तानी लोक गायिका आबिदा परवीन के साथ मिलकर गाया था. 4 साल पहले रिलीज हुआ ये गाना आज भी चाहनेवालों की जुबान पर चढ़ा हुआ है. इसे अभी तक 122 मिलियन से ज्यादा व्यूज मिल चुके हैं. साथ ही 1 मिलियन से ज्यादा दर्शकों ने इसे लाइक किया है. इतना ही नहीं, ये गाना मार्वल की टीवी सीरीज 'मिस मार्वल' के 5वें एपिसोड के अंत में भी फीचर हुआ था.
10 जनवरी 1970 को जन्मीं नसीबो लाल 56 साल की हैं. वो पाकिस्तान के पंजाब में स्थित चिश्तिया की रहने वाले हैं. अपने करियर की शुरुआत नसीबो ने 1980 में की थी. उन्होंने 'दिल दा बूहा खोल', 'असां जग नू मना के' और 'मेरी वीनी विच टूट गाइयां वांगा' संग कई अन्य बढ़िया गानों को गाया है. उनका यूं अनजान महफिल में गाना और पहचाना न जाना फैंस को बुरा भी लग रहा है. यूजर्स का कहना है कि पाकिस्तानी लेजेंड्स को देश में वो दर्जा और पहचान नहीं मिलती, जिसके वो हकदार हैं.