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Film Review: प्यार के नाम पर बोर करती है 'इश्क फॉरएवर'

फरवरी 'प्यार' का महीना है और इस लिहाज से इस हफ्ते कई सारी लव से जुड़ी फिल्में रिलीज हो रही हैं, इनमें से एक है 'इश्क फॉरएवर'. आइए जानें क्‍या है फिल्‍म में खास...

फिल्म का नाम: इश्क फॉरएवर
डायरेक्टर: समीर सिप्पी
स्टार कास्ट: जावेद जाफरी, लीजा रे, रूही सिंह, कृष्णा चतुर्वेदी
अवधि: 2 घंटा 05 मिनट
सर्टिफिकेट: U
रेटिंग: 1 स्टार

फरवरी 'प्यार' का महीना है और इस लिहाज से इस हफ्ते कई सारी लव से जुड़ी फिल्में रिलीज हो रही हैं, इनमें से एक है 'इश्क फॉरएवर'. आइये इस फिल्म की समीक्षा करते हैं...

कहानी
यह कहानी रिया (रूही सिंह) की है, जो साउथ अफ्रीका में पढ़ाई कर रही है. जब उसके पिता को प्रधानमंत्री बना दिया जाता है तो जिसकी जिंदगी में उथल-पुथल मच जाती है. रिया जहां भी जाती है उसके साथ सुरक्षा कर्मी मौजूद होते हैं जिसकी वजह से उसकी आजादी खत्‍म सी होने लगती है. इसी दौरान एक दिन रिया की मुलाक़ात आर्यन शेखावत (कृष्णा चतुर्वेदी) से होती है. साउथ अफ्रीका में रिया अपनी सुरक्षा एजेंसी को झांसा देते हुए आर्यन के साथ भाग जाती है. फिर एंट्री होती 'रॉ' सिक्योरिटी के इंचार्ज अमिताभ (जावेद जाफरी) और नैना (लीजा रे) की जो इस पूरी गुत्थी को सुलझाने में लग जाते हैं. क्या रिया और आर्यन के प्यार का प्‍यार अंजाम तक पहुंचेगा? क्‍या अमिताभ और नैना उन दोनों को ढूंढ निकालेंगे? क्‍या होगा आगे जानने के लिए आपको फिल्म देखनी पड़ेगी.

स्क्रिप्ट
फिल्म की कहानी शब्बीर बॉक्सवाला ने लिखी है, जिन्होंने इस फिल्‍म को सस्पेंस बनाने की कोशिश है. लेकिन वह ऐसा कर नहीं पाएं हैं. एक तरफ लड़की की फ्रीडम का सवाल है तो दूसरी तरफ 'रॉ' एजेंसी के लोगों का प्यार भी दिखाया गया है. एक ही वक्त पर दो बातों को पर्दे पर स्क्रीनप्ले के माध्यम से उतार पाना सफल नहीं हो पाया है. बहुत ही कमजोर स्क्रीनप्ले है. फिल्म का इंटरवल से पहले तक का हिस्सा थोड़ा बेहतर है, लेकिन सेकेंड हाफ पूरा खींचा हुआ नजर आता है. ना ही इश्क है और ना ही सस्पेंस.

अभिनय
कई सालों के बाद फिल्मों में वापसी करने वाली लीजा रे का अभिनय ठीकठाक रहा है. वहीँ जावेद जाफरी को रॉ एजेंट के रूप में देखना एक अलग अनुभव है. फिल्म में लीड किरदार निभा रहे रूही सिंह और कृष्णा चतुर्वेदी ने भी ठीकठाक काम किया है. लेकिन कोई भी एक्टर ऐसा नहीं था जिसका काम सबसे उम्दा हो.

संगीत
फिल्म का संगीत नदीम सैफी ने दिया है जो नदीम श्रवण की जोड़ी से हैं. फिल्म के गीत रोमांस से भरपूर हैं और आपको 90 के दशक की याद दिलाते है. हालांकि कुछ गाने ऐसे भी थे जिसकी वजह से फिल्म बड़ी लगने लगती है.

कमजोर कड़ी
फिल्म की सबसे कमजोर कड़ी इसका स्क्रीनप्ले है. बहुत ही धीमी और रुकी हुई सी कहानी है. फिल्म का सब्जेक्ट बहुत अच्छा था लेकिन उसे कैश कर पाने में मेकर्स विफल रहे हैं.

क्यों देखें
जावेद जाफरी और लीजा रे के दीवाने हैं तो एक बार देख सकते हैं.

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