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फिल्‍म समीक्षा: दिखी एक कमजोर 'आत्मा'

कहानी में कितना दम डायरेक्टर फिल्म की जान होता है. वह एक सामान्य स्क्रिप्ट को अच्छे ट्रीटमेंट के साथ बढ़िया फिल्म में तब्दील कर सकता है. इस मामले में आत्मा कहीं चूक गई लगती है. फिल्म की कहानी का थीम अच्छा है.

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आत्‍मा
आत्‍मा

बजटः लगभग 10 करोड़ रु.
कलाकारः बिपाशा बसु, नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी और डॉयल धवन
डायरेक्टरः सुपर्ण वर्मा
कहानी में कितना दम डायरेक्टर फिल्म की जान होता है. वह एक सामान्य स्क्रिप्ट को अच्छे ट्रीटमेंट के साथ बढ़िया फिल्म में तब्दील कर सकता है. इस मामले में आत्मा कहीं चूक गई लगती है. फिल्म की कहानी का थीम अच्छा है.

यह मां, बाप और बेटी के बीच का ट्राइएंगल है. एक सिंगल मदर माया (बिपाशा बसु) है. उसकी छह साल की बेटी निया (डॉयल धवन) है जो अपने पिता अभय (नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी) से बहुत प्यार करती है. उसे नहीं पता उसका पिता उसकी मां पर शक करता था और उसे पीटता था. वह यह भी नहीं जानती कि वह मर चुका है.

निया हमेशा अपने पिता से मिलने की बात करती है और एक दिन अभय की आत्मा निया को लेने के लिए लौट आती है. बस, यहीं से कहानी की शुरुआत होती है. फर्स्ट हाफ में कहानी सरपट दौड़ती है. लेकिन सेकंड हाफ में फिल्म अपनी लय खोती नजर आती है. फिल्म कई सीन्स में डराती है लेकिन कई सीन थोपे हुए से लगते हैं. जैसे सड़क किनारे बैठी एक बुढ़िया का यह कहना कि वह लौट आया है.

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स्टार अपील ऐसा लगता है कि सुपर्ण वर्मा ने नवाज़ पर भरोसा दिखाने की बजाए टेक्नोलॉजी पर ज्यादा यकीन किया है. सेकंड हाफ के बाद सिर्फ टेक्नोलॉजी के रथ पर सवार नवाज़ुद्दीन की आत्मा दिखती है. उनकी ऐक्टिंग के कायल दर्शकों को काफी धक्का लग सकता है. पहले हाफ में छाने वाले नवाज़ को देखकर मन करता है कि वे सीन में बार-बार आएं लेकिन ऐसा नहीं होता. डॉयल ने बेहतरीन ऐक्टिंग की है. इतनी कम उम्र में उनके इंप्रेशन वाकई काबिलेतारीफ रहे. बिपाशा बसु को हॉरर फिल्में करना आता है.

टेक्नोलॉजी फिल्म का साउंड बहुत बढ़िया है, फिल्म के निर्माताओं ने हॉलीवुड की साउंड टेक्नॉलॉजी का इस्तेमाल किया है. निया का माया पर टूट पड़ना, चाकुओं का हवा में उड़ना और आइने में आत्मा का दिखना कई बेहतरीन दृश्य हैं. फिल्म 3डी में होती इसका इंपैक्ट जबरदस्त होता.

कमाई की बात सुपर्ण वर्मा फिल्म को हॉलीवुड की तर्ज पर बनाना चाहते थे. पहले हाफ तक सब ठीक रहा, लेकिन सेकंड हाफ में फिल्म उनके हाथों से निकलती दिखती है. हॉरर फिल्मों के शौकीन दर्शकों को कुछ निराशा हो सकती है, थ्रिलर कॉन्टेंट भी कम है. कहानी काफी ऑब्वियस लगती है. सुपरनैचुरल फिल्मों के शौकीन, बिपाशा और नवाज़ के जबरदस्त फैन इसे देखना जरूर पसंद करेंगे.

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