लिजेंड्री सिंगर आशा भोसले का 12 अप्रैल को निधन हुआ. उनके जाने से बॉलीवुड जगत को गहरी क्षति पहुंची हैं. लेकिन सिंगर सोनू निगम का कहना है कि उनके जाने का शोक नहीं, जश्न मनाना चाहिए. सिंगर का मानना है कि वो बहुत महान सिंगर थीं, उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी जी, वो सलाम करने लायक हैं. उन्हें आशा के जाने का दुख है लेकिन वो नहीं मानते कि इसका शोक मनाना चाहिए.
सोनू को आई आशा भोसले की याद
सोनू ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर एक वीडियो शेयर किया,जहां वो आशा भोसले के बारे में बात करते दिखे. उन्होंने बताया कि आशा जी गला खराब होने के बावजूद गाना गा लेती थीं. वो रुकती नहीं थीं. उन्होंने आखिरी समय तक काम किया. सोनू कुछ पुराने इंसीडेंट्स याद करते हुए दिग्गज सिंगर को याद करते नजर आए.
उन्होंने कहा कि यूएस टूर के समय उनके पैर की एड़ी में स्पर (हड्डी जैसी नुकीली समस्या) थी. मेरी मां को भी ये समस्या थी, इसलिए मुझे पता था कि हाथों से इसे कैसे ठीक किया जाता है. वो ठीक से खड़ी भी नहीं हो पा रही थीं. मैंने उनसे कहा कि मुझे इसे ठीक करना आता है. कुछ देर के बाद मैं उनके कमरे में गया और उनके पैरों की मालिश की, जिससे उन्हें आराम मिला.
ये याद करते हुए कि आशा भोसले ने कई साल बाद भी उनके इस अच्छे व्यवहार को याद रखा, उन्होंने बताया- वो मुझसे बार-बार पूछती थीं, ‘क्या तुम्हें याद है, तुमने वहां मेरे पैर दबाए थे?’ और मैं हां कहता था, क्योंकि मैंने अपनी मां को भी यही समस्या झेलते देखा था. ये एड़ी में हड्डी के कांटे जैसा होता है, जो कैल्शियम बढ़ने की वजह से होता है.
आशा भोसले के निधन का शोक नहीं जश्न मनाना चाहिए
इसी के साथ सोनू ने कहा कि उन्हें उनके जाने का दुख है, लेकिन वो इसे सिर्फ दुख तक सीमित नहीं करना चाहते. आशाजी ने बहुत भरपूर जीवन जिया. आखिरी समय तक काम करती रहीं. क्या ऐसी जिंदगी के लिए रोना चाहिए? हर कलाकार ऐसी ही जिंदगी का सपना देखता है, कि वो अंत तक काम करता रहे.
उन्होंने आगे कहा- मैं भी लंबा जीवन जीना चाहता हूं और अंत तक अपना काम जारी रखना चाहता हूं, बिल्कुल उनकी तरह. उन्होंने जैसी जिंदगी जी, वो सलाम करने लायक है. ये हमारा सौभाग्य है कि हमें उनके साथ समय बिताने और उनसे सीखने का मौका मिला. वो सख्त थीं, लेकिन उन्हें ऐसा होने का पूरा हक था. वो हमारी गुरु थीं.
उन्हें एक दौर का आखिरी सितारा बताते हुए सोनू ने कहा- वो महान लोगों के उस समूह का हिस्सा थीं, जिन्होंने फिल्म संगीत को नई पहचान दी. वो आखिरी योद्धा थीं, और अब वो अध्याय खत्म हो गया है.
आशा भोसले के करियर की बात करें तो उन्होंने 1940 के दशक के अंत में अपना संगीत सफर शुरू किया था. उन्होंने सबसे पहले एक मराठी फिल्म के लिए गाना रिकॉर्ड किया. हिंदी सिनेमा में उनका पहला गाना 1948 में फिल्म चुनरिया का 'सावन आया'था. दो साल पहले, 90 साल की उम्र में भी उन्होंने एक हाउसफुल कॉन्सर्ट में लाइव परफॉर्म करके अपने जुनून को साबित किया.