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'8 साल की उम्र में मां को खोया', संजय दत्त की बेटी ने झेला रेसिज्म-वजन पर सुने ताने, छलका दर्द

संजय दत्त की बेटी त्रिशाला ने अपने बचपन के संघर्षों का खुलासा किया है. उन्होंने बताया कि उन्हें रेसिज्म और बुलिंग का सामना करना पड़ा, खासकर इंडियन होने और वेट इश्यूज को लेकर. त्रिशाला ने मां को बचपन में खोने का दर्द भी साझा किया.

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Sanjay dutt-Trishala dutt (Photo: Instagram @trishaladutt)
Sanjay dutt-Trishala dutt (Photo: Instagram @trishaladutt)

संजय दत्त की बेटी त्रिशाला एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री से दूर न्यूयॉर्क में रहती हैं. अपने हालिया इंटरव्यू में त्रिशाला ने रेसिज्म, बुलिंग का सामना करने का खुलासा किया है. त्रिशाला, संजय और उनकी पहली पत्नी ऋचा शर्मा की बेटी हैं. ऋचा की 1996 में मौत हो गई थी. मां को खोने के बाद स्टारकिड को न्यूयॉर्क में उनके नाना-नानी ने पाला.

त्रिशाला ने सहा दर्द
संजय इंडिया में अपना फिल्मी करियर बनाने में बिजी रहे. हालांकि वो बेटी से मिलने अक्सर अमेरिका जाते थे. सालों बाद संजय ने इंडिया में मान्यता संग शादी की. कपल के दो बच्चे हैं. एक यूट्यूब चैनल Inside Thoughts Out Loud में त्रिशाला का दर्द छलका. उन्होंने बताया कि 5-6 साल की उम्र में उन्हें सबसे पहले बुली किया गया था. सिर्फ इसलिए क्योंकि वो इंडियन थीं. उनके आसपास के बच्चे उन्हें ताने मारते थे. जब थोड़ा बड़ी हुईं तो स्कूल में वजन को लेकर ताने सुनने को मिले.

जब वो हाई स्कूल में गईं तो लोग उनके और फैमिली बैकग्राउंड को खगालने लगे. उन दिनों को याद करते हुए त्रिशाला ने बताया कि उनके पास कोई नहीं था जिसे वो अपना दर्द बता सकती थीं. उनके पास कोई बात करने को नहीं था.

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बचपन में मां को खोया

त्रिशाला जब 8 साल की थीं, उनकी मां ऋचा का ब्रेन कैंसर की वजह से निधन हुआ था. वो कहती हैं- 1996 में मां चली गई थीं. मैं 8 साल की थी. उन्हें ब्रेन ट्यूमर था. 1989 में इस बीमारी का पता चला था. उस वक्त वो चौथी स्टेज पर थीं. तब पापा इंडिया और यूएस के लगातार चक्कर काट रहे थे. वो अमेरिका आते जाते रहते थे. क्योंकि पापा इंडिया में काम कर रहे थे, इसलिए पूरी तरह से अमेरिका में रहना उनके लिए मुश्किल था. बचपन में मुझे वजन का इश्यू हुआ. क्योंकि मैंने खाने में कंफर्ट ढूंढ़ लिया था. लोग सोचते थे सेलेब्रिटी की बेटी है तो ऐसा ही दिखना चाहिए. मैं संजय दत्त की बेटी जैसी नहीं दिखती थी. 

त्रिशाला ने बताया कि जब वो इंडिया आती थीं, लोग उनकी अपीयरेंस पर कमेंट करते थे. उनके बारे में काफी बुरा लिखते थे. वो कहती हैं- मैं अपनी जिंदगी में ढेर सारे तूफानों से गुजरी हूं. मुझे थाली में परोसकर चीजें नहीं मिलीं. आज मैं जहां हूं उसके लिए मैंने मेहनत की है. मेरे भी सबकी तरह इंटरनल इश्यू रहे हैं. कोई परफेक्ट नहीं होता. मैं थेरेपिस्ट बनीं क्योंकि मुझे लोगों को बताना था कि स्ट्रगल करना ओके है. आप इस जर्नी में अकेले नहीं हैं.

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वर्कफ्रंट पर, त्रिशाला न्यूयॉर्क बेस्ड 'लाइसेंस्ड मैरिज एंड फैमिली थेरेपिस्ट (LMFT) और साइकोथेरेपिस्ट हैं.
 

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