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जब दिलीप कुमार को मिला अवॉर्ड, बैक सीट पर बैठीं करीना-करिश्मा को पहचाना?

बॉलीवुड की ए-लिस्ट एक्टर्स में शुमार करीना कपूर और करिश्मा कपूर, किसी पहचान की मौहताज नहीं है. बॉलीवुड के कपूर खानदान की बेटी करीना कपूर आज नवाब खानदान की बहू भी हैं. लेकिन एक वक्त था जब ये दोनों एक्ट्रेस दिलीप साहब के पीछे बैठा करती थीं. इस तस्वीर को पहचाना आपने?

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दिलीप कुमार, सायरा बानो, करिश्मा कपूर, करीना कपूर दिलीप कुमार, सायरा बानो, करिश्मा कपूर, करीना कपूर

दिलीप कुमार (Dilip Kumar) की ख्याती से कौन फैमिलियर नहीं होगा. बॉलीवुड में दशकों बिता लेने के बाद भी दिलीप साहब की पॉपुलैरिटी लोगों के सिर चढ़कर बोलती थी. कोई भी किरदार हो, दिलीप साहब उसमें ऐसी जान फूंकते थे कि किरदार लोगों के जेहन में बैठ जाए. वो उन लेजेंड्री एक्टर्स में से थे, जिनका नाम किसी लिस्ट से कैटेगराइज नहीं किया जा सकता था. कोई भी इवेंट हो या फिल्म पार्टी दिलीप कुमार, जहां जाते अपनी छाप छोड़ जाते थे. वो जमाना और हुआ करता था जब, एक्टर्स के नाम पर किसी अवॉर्ड को देने की शुरुआत हुआ करती थी. उन्ही में से एक थे दिलीप कुमार. 

दिलीप साहब का वो दौर...

आपको बताते उस दौर की कहानी जब दिलीप जी के पीछे आज के जमाने के सुपरस्टार्स बैठा करते थे. जो आज मिलेनियल सेलेब्स कहलाते हैं, दिलीप कुमार के दौर में पीछे हुआ करते थे. 1998 के लक्स जी सिने अवॉर्ड के इस वीडियो को देख आप भी कहेंगे कि दिलीप कुमार का चार्म कितना खास हुआ करता था. 1998 में जी सिने की तरफ से पहली बार किसी एक्टर को लाइफ टाइम अचीवमेंट अवॉर्ड देने की पहल की जा रही थी. शेखर सुमन (Shekhar Suman) , मोनिका बेदी (Monika Bedi) ने मशहूर लेखक जावेद अख्तर (Jabed Akhtar) को अवॉर्ड की घोषणा के लिए स्टेज पर बुलाया था और ये पहला अवॉर्ड मिलना था दिलीप कुमार को. उन्होंने उनकी तारीफ में जो कहा वो एक-एक शब्द आपके दिल को छू जाने वाला है.

लेकिन...लेकिन...लेकिन...बात सिर्फ दिलीप साहब की ही नहीं है. हम आपका ध्यान लाना चाहते हैं दिलीप साहब के पीछे की कुर्सी पर बैठी उन सेलेब्स पर, जो आज के फैंस के दिलों की धड़कन कही जाती हैं. जिन्हें आज की बॉलीवुड डीवाज का खिताब दिया जाता है. ये दो एक्ट्रेस बॉलीवुड के कपूर खानदान की सबसे मशहूर पर्सनालिटीज में गिनी जाती हैं. दिलीप कुमार के साथ उनकी वाइफ सायरा बानो (Saira Bano) बैठी हैं. वहीं ठीक पीछे की लाइन में करिश्मा कपूर (Karisma Kapoor) हैं और उनके बगल में उनकी बहन करीना कपूर (Kareena Kapoor) बैठी हुई हैं. पहचान के लिए ये फोटो जरूर देखिए...

सायरा बानो के साथ करिश्मा और करीना

जब पीछे की सीट पर बैठी दिखीं कपूर खानदान की बेटियां

यूं तो, बॉलीवुड की ए-लिस्ट एक्टर्स में शुमार करीना कपूर और करिश्मा कपूर, किसी पहचान की मौहताज नहीं है. बॉलीवुड के कपूर खानदान की बेटी करीना कपूर आज नवाब खानदान की बहू भी हैं. लेकिन एक वक्त था जब ये दोनों एक्ट्रेस दिलीप साहब के पीछे बैठा करती थीं. उस वक्त उनकी चमक अपने आप में भले ही कितनी भी तेज हों, लेकिन दिलीप कुमार के आगे फीकी पड़ जाती थी. दोनों ही एक्ट्रेस के फैन फॉलोइंग की लंबी फेहरिस्त है. बात करें उस दौर की यानी 1998 की तो, उस वक्त करिश्मा की फिल्म दिल तो पागल है रिलीज हुई थी. उनके साथ इस फिल्म में बॉलीवुड के किंग शाहरुख खान, माधुरी दीक्षित और अक्षय कुमार भी थे. वहीं करीना कपूर ने तो फिल्मों में अपने करियर का खाता तक नहीं खोला था. 

दिलीप साहब की चमक के आगे सब फीका

यहां ये बात समझने लायक है कि बॉलीवुड का वो दौर कितना गोल्डन रहा है, जब कलाकारों को सम्मानित तरीके से उनकी जगह दी जाती थी. ना कि सिर्फ ग्लैमर को सबसे आगे परोसा जाता था. करिश्मा कपूर उस वक्त काफी हिट एक्ट्रेस मानी जाती थी. उसी साल करिश्मा को फिल्म दिल तो पागल है के लिए कई अवॉर्ड्स मिले थे. एक्ट्रेस को बेस्ट सपोर्टिंग एक्ट्रेस के लिए नेशनल अवॉर्ड भी मिला था. ये भी बेहद अमेजिंग फैक्ट है कि इसी अवॉर्ड फंक्शन में करिश्मा को भी बेस्ट सपोर्टिंग एक्ट्रेस का अवॉर्ड मिला था, जहां करीना उनके साथ मौजूद थीं. 

आज के दौर में करीना कपूर एक मिलेनियल सुपरस्टार मानी जाती हैं. एक्ट्रेस की जबरदस्त फैन फॉलोइंग है. एक-एक फिल्में करने के लिए करोड़ों की फीस ली जाती है. कई फिल्मों को देखने के लिए तो एक्ट्रेस के नाम से ही लोगों की भीड़ जमा हो जाती है. करिश्मा और करीना कहीं भी जा रहे हों, उनके आगे फोटोग्राफर्स की भीड़ लग जाती हैं, हर कोई इनकी एक झलक पाने को बेताब रहता है. लेकिन उस दौर में दिलीप कुमार की शख्सियत के आगे सब पीछे छूट जाता दिखाई पड़ता है. अवॉर्ड के इस वीडियो में दोनों एक्ट्रेस को पीछे बैठे देख हम भी एक पल के चौंक गए थे, लेकिन दिलीप कुमार का चार्म ही ऐसा है कि इसमें कोई हैरानी बात नहीं रह जाती है. 

वीडियो में जब जावेद अख्तर कहते हैं कि, 'उन महान शख्सियत के लिए कुछ कहना ही बहुत आसान भी है और बहुत मुश्किल भी है. आसान इसलिए कि दिलीप साहब का नाम ही उनके लिए पूरी तारीफ है...और मुश्किल इसलिए कि कोई किस तरह से बताए कि सूरज में कितनी रौशनी है, कि कोई किस तरह से बताए कि समंदर में कितनी लहरे हैं...' तो वो गलत नहीं हैं. दिलीप कुमार थे ही ऐसे कि उनके जाने के बाद आज भी लोग उनका नाम अदब से लेते हैं.

 

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