आज के दौर में सुमित अरोड़ा का नाम बॉलीवुड के सबसे डिमांडिंग फिल्म राइटर्स की लिस्ट में शुमार है. उनकी कलम से निकले डायलॉग को शाहरुख खान, सनी देओल, राजकुमार राव और मनोज बाजपेयी जैसे दिग्गज कलाकार पर्दे पर जीते हैं. हालांकि उनकी शुरुआत आसान नहीं थी. अपने शोबिज के उतार-चढ़ाव भरी जर्नी को लेकर उन्होंने खुलकर बात की है.
अपने अब तक के करियर में सुमित ने फिल्मों के साथ-साथ टीवी शोज और वेब सीरीज के लिए भी खूब काम किया है. हिंदुस्तान टाइम्स को दिए इंटरव्यू में उन्होंने क्या कुछ कहा. जानिए
बिना मन के टीवी में शुरुआत
पिछले कुछ सालों में सुमित ने फिल्मों, टीवी शो और वेब सीरीज के लिए लिखा है और उन्हें सभी मीडियम अलग-अलग लगते हैं. उन्होंने कहा, 'मैं 18 साल की उम्र में मुंबई आया था, मुझे इंग्लिश की ज्यादा जानकारी नहीं थी और क्राफ्ट की तो बिल्कुल भी नहीं. मुझे लिखने का हुनर जन्मजात था. मुझे फिल्मों में कोई काम नहीं मिला. लेकिन मुझे जिंदा रहना था. मेरे पास सिर्फ ₹4000 थे, जो 10 दिनों में खत्म हो जाते. मैंने बालाजी टेलीफिल्म्स में एक ट्रेनी राइटर के तौर पर जॉइन किया, जिसने मुझे रहने की जगह और एक अच्छी सैलरी दी. अब मैं उस अनुभव के लिए शुक्रगुजार हूं. इसने मुझे बहुत कुछ सिखाया और मुझे जल्दी सफलता और पैसा दिया.'
पैसे के साथ कई परेशानियां आई
सुमित ने एक मजेदार किस्सा सुनाते हुए कहा, 'पैसे ने अपने साथ कई तरह की मजेदार परेशानियां भी लाईं. क्योंकि घर पर लोग यह समझ नहीं पा रहे थे कि 2000 के दशक में एक 20 साल का लड़का हर महीने लाखों कैसे कमा रहा था. 'मैं कम उम्र में बहुत सारा पैसा कमा रहा था. मैं उस पैसे को फिल्म राइटिंग के लिए अपने स्किल्स को बेहतर बनाने के लिए बचाना चाहता था. दो साल के अंदर, मैं अपने पिता की सैलरी से 10-15 गुना ज्यादा कमा रहा था.'
'मेरे पिता को बताया गया कि मैंने मुंबई में किसी गैंग, किसी अंडरवर्ल्ड गैंग को जॉइन कर लिया है. उन्हें बताया गया, 'तुम्हारा बेटा क्या कर रहा है, इतने पैसे कहां से आ रहे हैं'. अब मैं हंसता हूं, लेकिन उस समय यह एक गंभीर बातचीत थी.'
शाहरुख खान और सनी देओल के लिए लिखना
'स्त्री' जैसी जमीनी कहानियों और 'द फैमिली मैन' जैसे रियलिस्टिक शो के लिए लिखने के बाद, सुमित शाहरुख खान की जवान के साथ मेनस्ट्रीम में आए. उन्होंने कहा, 'लोगों को लग सकता है कि मेनस्ट्रीम में जाकर मैं बदल गया हूं. लेकिन यह भी एक फिल्म है. मकसद इसमें अपना टच डालना है. शाहरुख सर जो कविता (जवान में) सुनाते हैं, वह बहुत आध्यात्मिक है. मैंने पहले ऐसा कुछ नहीं किया था, और मैं खुद को इसके लिए तैयार करूंगा. मैं वहां सिर्फ एक जॉनर की सर्विस नहीं करूंगा.'
अगर जवान मासी थी, तो बॉर्डर 2 उससे भी ज्यादा मासी थी. यह वॉर ड्रामा उनके द्वारा लिखी गई सबसे ओवर-द-टॉप फिल्म थी. एक आइकॉनिक फिल्म के सीक्वल के लिए डायलॉग लिखते समय राइटर को प्रेशर, चैलेंज और एक्साइटमेंट का मिला-जुला एहसास हुआ. उन्होंने कहा, 'कोई भी एडवेंचर तभी मजेदार होता है जब उसमें ये सब हो. स्वभाव से, मैंने हमेशा उस एड्रेनालाईन रश की तलाश की है. जब मुझे बॉर्डर 2 ऑफर हुई, तो मैं उस बच्चे जैसा था जिसे कोई सपना ऑफर किया गया हो. मैंने इसे बचपन में मेरठ में देखा था. मुझे डायलॉग याद हैं, और अब मुझे उस विरासत में कुछ जोड़ने का मौका मिला है.'