सनी देओल की फिल्म ‘बॉर्डर 2’ बस कुछ ही घंटों में रिलीज होने वाली है. ट्रेलर और गानों को मिले पॉजिटिव रिस्पॉन्स के बाद उम्मीद की जा रही है कि फिल्म भी धमाल करेगी. सनी देओल की फैन फॉलोइंग हमेशा से तगड़ी थी और ‘गदर 2’ के बाद पहले से भी मजबूत हो गई है. अब सवाल रिव्यूज का है… क्या ‘बॉर्डर 2’ को क्रिटिक्स से वैसे चमचमाते रिव्यू मिलेंगे, जिनसे लोगों में जल्दी से जल्दी फिल्म देखने की एक्साइटमेंट उमड़ने लगे? लेकिन इस सवाल का जवाब असल में मायने ही नहीं रखता, क्योंकि ‘बॉर्डर 2’ एक क्रिटिक्स-प्रूफ फिल्म है.
बॉलीवुड की क्रिटिक्स-प्रूफ फिल्में
एक बार शाहिद कपूर की फिल्म ‘कबीर सिंह’ (2019) को याद कीजिए. क्रिटिक्स ने इस फिल्म की आलोचना में जमकर शब्द खर्च किए थे. लेकिन ‘कबीर सिंह’ न सिर्फ शाहिद कपूर के करियर की सबसे बड़ी फिल्म बनी, बल्कि ये 2019 की दूसरी सबसे बड़ी बॉलीवुड फिल्म भी थी. ‘एनिमल’ के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ.
पिछले साल आई विक्की कौशल की फिल्म ‘छावा’ के रिव्यूज भी बहुत चमचमाते हुए नहीं थे. लेकिन ये 11 महीनों तक बॉलीवुड की सबसे बड़ी फिल्म बनी रही और ‘धुरंधर’ के आने पर ही दूसरे नंबर पर गई. ये इसलिए हुआ क्योंकि ये भी एक क्रिटिक्स-प्रूफ फिल्म थी.
ऐसी फिल्मों को क्रिटिक्स-प्रूफ इसलिए कहा जाता है कि फिल्मी लेंस से देखने पर ये भले कमजोर मालूम होती हों, मगर इन कहानियों में इमोशन, जनता का कनेक्ट और फिल्म के स्टार का भौकाल बाकी सभी चीजों पर भारी पड़ता है.
लोगों के पास फिल्म देखने की ऐसी वजह होती है, जिसे फिल्म की टेक्निकल कमियों, पेस, स्टोरीटेलिंग की डिटेल्स या उनके सोशल मैसेज से कोई फर्क नहीं पड़ता. फिल्म में बस सही स्टार और दमदार पैकेजिंग का कॉम्बो हो. फिल्म बस वो डिलिवर कर दे जिसकी उम्मीद उससे है, तो जनता रिव्यूज की परवाह किए बिना थिएटर्स तक पहुंच जाती है. और ‘बॉर्डर 2’ ऐसी ही क्रिटिक्स-प्रूफ फिल्म है.
क्यों क्रिटिक्स-प्रूफ फिल्म है ‘बॉर्डर 2’?
हर फिल्म जनता से कुछ अलग वादा करती है और जनता की हर फिल्म से उम्मीद भी अलग होती है. ‘बॉर्डर 2’ सिनमैटिक इनोवेशन या तकनीक में कुछ क्रांतिकारी करने का वादा करने वाली फिल्म नहीं है. ये करीब 30 साल पहले आई ‘बॉर्डर’ का सीक्वल है, जिसे आज भी देशभक्ति का सॉलिड डोज देने वाली इंडिया की बेस्ट वॉर फिल्मों में गिना जाता है.
भौकाली डायलॉगबाजी, पाकिस्तान बैशिंग, खून का आखिरी कतरा निछावर कर देने को तैयार जांबाज फौजी, इन फौजियों की इमोशनल कहानी और हर इमोशन को गहराई में ले जाने वाले गाने— इस स्ट्रक्चर ने ‘बॉर्डर’ को दिमाग पर हमेशा के लिए छप जाने वाला सिनमैटिक एक्सपीरियंस बना दिया था. ऊपर से सनी देओल की अद्भुत परफॉरमेंस. वो ‘बॉर्डर’ में मेजर कुलदीप का किरदार नहीं निभा रहे थे, बल्कि खुद मेजर साहब बन गए थे.
पहली बार स्क्रीन पर सनी का सरदार अवतार और दमदार आवाज आज भी लोगों के जेहन में ताजा है. हम में से बहुत सारे लोग टीवी पर ‘बॉर्डर’ के रिपीट टेलेकास्ट देखते हुए बड़े हुए हैं और हमें इसके डायलॉग रटे हुए हैं. ‘बॉर्डर 2’ इसी नॉस्टैल्जिया को वापस लाने का वादा कर रही है.
पिछले साल हुए पहलगाम हमले और उसके जवाब में हुए ऑपरेशन सिंदूर के बाद एंटी-पाकिस्तान सेंटीमेंट जोर पर है. रणवीर सिंह की ‘धुरंधर’ के बाद जनता में ये सेंटीमेंट और भी उबाल मार रहा है.
अपने वक्त में स्क्रीन पर ‘बॉर्डर’ से बेहतर पाकिस्तान बैशिंग शायद ही किसी फिल्म ने की हो. और ‘बॉर्डर 2’ का ट्रेलर भर ये बताने के लिए काफी है कि सीक्वल में ये पाकिस्तान बैशिंग और नई ऊंचाई पर जाने वाली है.
‘बॉर्डर 2’ के गाने खूब पॉपुलर हो रहे हैं और इनमें इमोशन का डोज बहुत तगड़ा है. इमोशन के आगे लॉजिकल रीजनिंग या फिल्ममेकिंग तकनीकों का एनालिसिस नहीं टिकता. यही वजह है कि बेहद औसत रिव्यूज के बावजूद ‘गदर 2’ ने 500 करोड़ कमा डाले थे. और यही वजह है जो ‘बॉर्डर 2’ को क्रिटिक्स-प्रूफ फिल्म बनाती है.