विक्की कौशल की फिल्म 'छावा' ने साल 2025 में बॉक्स ऑफिस पर विवाद के बीच जमकर कमाई की. फिल्म में मराठा योद्धा छत्रपति संभाजी महाराज और मुगल बादशाह औरंगजेब के बीच के संघर्ष दिखाया गया. इस फिल्म के बाद महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में तनाव भी देखने को मिला. अब इस पर संगीतकार एआर रहमान ने खुलकर अपनी बात रखी है.
'छावा' फिल्म के संगीतकार एआर रहमान ने न केवल फिल्म के विवादित पहलुओं को स्वीकार किया, बल्कि यह भी बताया कि एक कलाकार के तौर पर ऐसी फिल्मों के साथ जुड़ने का उनका एक्सपीरियंस कैसा रहा.
छावा पर रहमान की बेबाक राय
हाल ही में बीबीसी एशियन नेटवर्क के साथ एक इंटरव्यू में एआर रहमान ने माना कि 'छावा' एक ऐसी फिल्म है जिसने ध्रुवीकरण यानी समाज को दो हिस्सों में बांटने वाले माहौल का फायदा उठाया. रहमान ने कहा, 'फिल्म की कहानी में निश्चित रूप से कुछ ऐसे तत्व थे जो बांटने वाले थे, लेकिन उनके पीछे का मुख्य उद्देश्य वीरता और बहादुरी को दिखाना था. मैंने खुद डायरेक्टर से पूछा था कि उन्हें इस फिल्म के लिए उनकी जरूरत क्यों है, जिस पर उन्हें जवाब मिला कि इस विषय के साथ न्याय करने के लिए उन्हीं के संगीत की आवश्यकता है.'
आजकल जिस तरह की फिल्में बन रही हैं, उनमें अक्सर किसी खास एजेंडे या ध्रुवीकरण की बात कही जाती है. इस पर बात करते हुए रहमान ने कहा, 'भगवान कलाकारों को शक्ति इसलिए देता है ताकि वे अपनी कला और काम के जरिए बुराई को अच्छाई में बदल सकें.' जब उनसे पूछा गया कि क्या वे अब फिल्में चुनने में ज्यादा सावधानी बरतते हैं, तो उन्होंने साफ कहा कि उनके लिए 'इरादा' सबसे ऊपर है. रहमान के मुताबिक, अगर कोई फिल्म बुरे इरादे से बनाई जाती है, तो वे उससे दूरी बनाना ही बेहतर समझते हैं.
औरंगजेब का चित्रण और दंगों पर रिएक्शन
फिल्म 'छावा' में औरंगजेब के चित्रण को लेकर जनता में काफी गुस्सा देखा गया था. महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी माना था कि इसी गुस्से की वजह से नागपुर जैसे शहरों में अशांति और दंगों जैसी स्थिति पैदा हुई थी. रहमान ने इन हालातों पर अपनी चिंता व्यक्त की और कहा कि समाज में बढ़ता ध्रुवीकरण एक गंभीर मुद्दा है, जिससे फिल्में अछूती नहीं रह गई हैं.
पुरानी घिसी-पिटी सोच पर उठाया सवाल
इंटरव्यू के दौरान रहमान ने फिल्म के उन सीन की भी आलोचना की जो एक खास तरह के 'स्टीरियोटाइप' (घिसी-पिटी सोच) को बढ़ावा देते हैं. उन्होंने उन सीन्स का जिक्र किया जहां हिंसा के दौरान किरदार 'सुभानअल्लाह' या 'अल्हम्दुलिल्लाह' जैसे शब्दों का इस्तेमाल करते हैं. रहमान ने इसे बहुत ही साधारण और 'आलसी' स्तर का चित्रण बताया. उन्होंने कहा कि इस तरह के सीन दिखाना अब काफी पुराना और अजीब हो गया है.
जनता बेवकूफ नहीं है- रहमान
तमाम विवादों के बावजूद रहमान का मानना है कि ऑडियंस बहुत समझदार हैं. उन्होंने कहा, 'मुझे लगता है कि इसमें बहुत कुछ है और इसका अंत भी देखने लायक है, लेकिन निश्चित रूप से मुझे लगता है कि लोग फिल्मों से प्रभावित तो होते हैं, लेकिन उनका अपना विवेक और जमीर उन्हें यह बताने के लिए काफी है कि सच क्या है और क्या सिर्फ हेरफेर करके दिखाया जा रहा है.' रहमान ने अंत में कहा कि उन्हें छत्रपति संभाजी महाराज की गौरव गाथा से जुड़कर बहुत सम्मानित महसूस हुआ. उनके लिए यह फिल्म हर मराठा की धड़कन और आत्मा के समान है, जिस पर उन्हें हमेशा गर्व रहेगा.