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'खान या कपूर होता तो काम आसान होता', बॉलीवुड में नेपोटिज्म पर छलका एक्टर का दर्द

अभिलाष थापलियाल का कहना है कि बॉलीवुड में 'इनसाइडर्स' को फायदा मिलता है. उन्होंने आगे कहा कि अगर उनका सरनेम कपूर या खान होता, तो टैलेंट होने के बावजूद उनका सफर ज्यादा आसान होता.

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एक्टर अभिलाष थपलियाल (Photo: Instagram/@abhilashthapliyal)
एक्टर अभिलाष थपलियाल (Photo: Instagram/@abhilashthapliyal)

अभिलाष थपलियाल एक ऐसे एक्टर हैं, जिन्होंने अपनी मेहनत और एक्टिंग से सभी को प्रभावित किया है. चाहे 'एस्पिरेंट्स' के 'एसके सर' हों या अनुराग कश्यप की 'कैनेडी' में उनका रोल. अभिलाष ने साबित किया है कि उनमें हुनर की कोई कमी नहीं है. अब एक्टर ने इंडस्ट्री में स्ट्रगल को लेकर खुलकर बात की है. 

HT को दिए इंटरव्यू में उन्होंने बेहद स्वीकार किया कि इंडस्ट्री में 'सरनेम' का कितना बड़ा महत्व होता है और कैसे एक 'स्टार किड' को वह पहचान और समर्थन आसानी से मिल जाता है, जिसके लिए एक आम कलाकार को बरसों तक स्ट्रगल करना पड़ता है.

इंडस्ट्री के बाहर से आने वाले कलाकारों के लिए सबसे बड़ी चुनौती काम का चुनाव करना है. अभिलाष बताते हैं कि एक आउटसाइडर के पास विकल्पों की भरमार नहीं होती. उन्हें वही चुनना पड़ता है जो उन्हें परोसा जाता है. उन्होंने कहा कि एक कलाकार के तौर पर आप लंबे समय तक उन प्रोजेक्ट्स को मना करते रहते हैं जो आपकी पसंद के नहीं होते, और यह सिलसिला तब तक चलता है जब तक आपको वह काम न मिल जाए जो आप असल में करना चाहते हैं. यह इंतजार और रिजेक्शन का दौर किसी भी कलाकार के धैर्य की कड़ी परीक्षा लेता है.

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काश खान और कपूर होता
जब अभिलाष से पूछा गया कि क्या कभी उन्हें फिल्मी परिवार में पैदा न होने का मलाल होता है, तो उन्होंने बड़ी ईमानदारी से 'हां' कहा. उनके मुताबिक, एक फिल्मी खानदान से होना किसी विशेषाधिकार (privilege) से कम नहीं है. उन्होंने कहा, 'अगर मेरा सरनेम भी 'कपूर' या 'खान' होता, तो चीजें बिल्कुल अलग होती या आसान होती.'

अभिलाष का मानना है कि अगर कोई स्टार किड एक विलेन, एक शराबी या किसी साधारण फोटोग्राफर का किरदार शिद्दत से निभाता, तो उसे हाथों-हाथ लिया जाता. उनके काम की सुर्खियां बनतीं और पूरी इंडस्ट्री उन्हें सपोर्ट करने खड़ी हो जाती. जबकि एक आउटसाइडर को बार-बार यह साबित करना पड़ता है कि उसने क्या हासिल किया है.

हालांकि, अभिलाष केवल नेपोटिज्म की शिकायत नहीं करते, बल्कि वह वास्तविकता को भी समझते हैं. उनका कहना है कि सिर्फ एक बड़ा सरनेम होना आपको स्टार नहीं बना सकता. आगे बढ़ने के लिए 'टैलेंटेड' होना अनिवार्य शर्त है. वह मानते हैं कि प्रतिभा ही वह एकमात्र चाबी है जो सफलता के दरवाजे खोलती है. लेकिन हां, वह इस बात से भी पूरी तरह सहमत हैं कि यदि आपके पास टैलेंट के साथ-साथ इंडस्ट्री का बैकग्राउंड भी है, तो सफर यकीनन काफी आसान और तेज हो जाता है.

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कैनेडी से मिली पहचान
वर्क फ्रंट की बात करें तो अभिलाष के करियर की बात करें तो उनकी बहुचर्चित फिल्म 'कैनेडी' लंबे समय तक चर्चा में रही. यह फिल्म मूल रूप से 2023 में आने वाली थी, लेकिन किन्हीं कारणों से इसमें देरी हुई और अब 2026 में जाकर इसका प्रीमियर 'जी5' (Zee5) पर हुआ है. अनुराग कश्यप के निर्देशन में बनी इस फिल्म में राहुल भट्ट और सनी लियोन मुख्य भूमिकाओं में हैं. जी स्टूडियोज और गुड बैड फिल्म्स के बैनर तले बनी इस क्राइम थ्रिलर को आलोचकों ने भी सराहा है. 

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