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उत्तराखंड चुनाव: एनडी तिवारी के नाम को भुनाएगी BJP! CM धामी ने चला बड़ा दांव

बीजेपी ने पंतनगर औद्योगिक क्षेत्र को कांग्रेस के दिग्गज नेता एनडी तिवारी के नाम पर रखने की घोषणा की है. सीएम पुष्कर सिंह धामी ने एनडी तिवारी के बहाने एक तीर से कई निशाने साधने की कोशिश की है.

सीएम पुष्कर धामी पूर्व सीएम एनडी तिवारी को श्रद्धांजलि देते हुए सीएम पुष्कर धामी पूर्व सीएम एनडी तिवारी को श्रद्धांजलि देते हुए
स्टोरी हाइलाइट्स
  • चुनाव से पहले बीजेपी-कांग्रेस में शह-मात
  • बीजेपी एनडी तिवारी के नाम को भुनाएगी
  • कांग्रेस यशपाल आर्य को पार्टी में लेकर आई

उत्तराखंड विधानसभा चुनाव (Uttarakhand Assembly Election 2022) से पहले बीजेपी और कांग्रेस के बीच सियासी जद्दोजहद जारी है. बीजेपी सत्ता को बचाए रखने की कवायद में जुटी है तो कांग्रेस सत्ता में वापसी के लिए संघर्ष कर रही है. ऐसे में कांग्रेस ने बीजेपी सरकार के मंत्री रहे यशपाल आर्य और उनके बेटे विधायक को अपने साथ मिलाया तो अब मुख्यमंत्री पुष्कर धामी ने कांग्रेस के दिग्गज नेता रहे और पूर्व सीएम नारायणदत्त तिवारी (एनडी तिवारी) के नाम को भुनाने का दांव चला है. 

किसान आंदोलन से उत्तराखंड के कुमाऊ मंडल के तराई बेल्ट में बीजेपी की चुनौती बढ़ती जा रही है. लखीमपुर खीरी की घटना से बीजेपी की मुश्किलें और भी बढ़ गई हैं. ऐसे में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रविवार को ऊधमसिंह नगर जिले का पंतनगर औद्योगिक क्षेत्र को पूर्व मुख्यमंत्री स्व. नारायण दत्त तिवारी के नाम पर करने की घोषणा की है. सीएम धामी ने कहा है कि स्व. नारायण दत्त तिवारी ने उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के साथ केंद्रीय मंत्री के रूप में राज्य के सर्वांगीण विकास के लिए प्रयास किया.

उन्होंने कहा कि तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने उत्तराखंड को औद्योगिक पैकेज दिया थ. उस समय नारायण दत्त तिवारी ही मुख्यमंत्री थे. तिवारी ने अपने प्रयासों से नवसृजित राज्य में औद्योगिक विकास की नींव रखी थी. सीएम ने कहा कि दलगत राजनीति से ऊपर उठकर नारायण दत्त तिवारी के राज्य के प्रति योगदान को सम्मानित करने और उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए पंतनगर औद्योगिक क्षेत्र का नामकरण उनके नाम पर किया जाएगा. 

एनडी तिवारी के बहाने बीजेपी का प्लान

सीएम धामी के इस ऐलान को सियासी तौर पर भी देखा जा रहा है. एनडी तिवारी का जन्मदिवस और पुण्य तिथि दोनों ही सोमवार (18 अक्टूबर) को है. उत्तर प्रदेश के साथ उत्तराखंड के मुख्यमंत्री रहे तिवारी की राजनीति में एक अलग पहचान थी. राज्य गठन के बाद 2002 में पहली निर्वाचित सरकार तिवारी मुख्यमंत्री बने थे. पर्वतीय राज्य में औद्योगिक विकास की नींव एनडी तिवारी ने रखी थी और उनके कार्यकाल में राज्य में कई बड़े उद्योग स्थापित हुए थे. 

देश में नरेंद्र मोदी की अगुवाई में सरकार बनने के बाद बीजेपी केंद्रीय नेतृत्व की ओर से जिस तरह विपक्ष के दिग्गज नेताओं का सम्मान कर भावनात्मक रूप से श्रेय लिया गया है. उसी तरह से पुष्कर धामी ने भी कांग्रेस के दिग्गज नेता नारायण दत्त तिवारी को सम्मान देकर उत्तराखंड चुनाव से पहले बड़ा सियासी दांव चला है. एनडी तिवारी उत्तराखंड की सियासत में एकलौते सीएम रहे हैं, जिन्होंने पांच साल का कार्यकाल पूरा किया है. ब्राह्मण समाज से सबसे बड़े नेता रहे हैं, लेकिन उनकी सियासी पकड़ सभी समाज के बीच रही है.

धामी ने एक तीर से साधे कई समीकरण 

सीएम पुष्कर सिंह धामी ने एनडी तिवारी के बहाने एक तीर से कई निशाने साधने की कोशिश की है. कांग्रेस पर तिवारी की उपेक्षा करने के आरोप बीजेपी लगाती रही है. समावेशी राजनीति का बड़ा चेहरा रहे तिवारी को उत्तराखंड में, खासतौर पर ऊधमसिंह नगर, हरिद्वार और देहरादून में औद्योगिक विकास का श्रेय भी जाता है. ऐसे में बीजेपी ने पंतनगर औद्योगिक क्षेत्र को तिवारी के नाम पर रखने की घोषणा करके कांग्रेस और प्रदेश चुनाव अभियान समिति की कमान संभाल रहे पूर्व सीएम हरीश रावत, दोनों को असहज करने वाली साबित हो सकती है.

एनडीए तिवारी को अपने पांच वर्ष के मुख्यमंत्रित्व काल में पार्टी के अंदर सबसे ज्यादा चुनौती हरीश रावत से ही मिलती रही थी. हरीश रावत के साथ उनका राजनीतिक तौर पर छत्तीस का आंकड़ा रहा है. कांग्रेस ने सोमवार को विजय शंखनाद रैली स्थगित कर अब 20 अक्टूबर नई तारीख तय की है, इसमें पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत समेत कांग्रेस के दिग्गज नेता मौजूद रहेंगे. 

एनडी तिवारी के बहाने कांग्रेस के विजय शंखनाद फूंकने से पहले ही पुष्कर धामी सरकार ने तुरुप की चाल चल दी. सरकार के इस कदम के बाद कांग्रेस को तिवारी की उपेक्षा के आरोपों से जूझना पड़ेगा. एनडी तिवारी को राजनीतिक गुरु मानने वाले यशपाल आर्य पर भी बीजेपी ने अपने तरीके से पलटवार किया है. यशपाल आर्य हाल ही में बीजेपी छोड़कर कांग्रेस में घर वापसी की है तो बीजेपी ने उनके गुरु के नाम को अपनाने का दांव चला है. 


 

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