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Badrinath Assembly Seat: पिछले दो सालों से बंद है यात्रा, रोजगार बन सकता है मुद्दा

बद्रीनाथ विधानसभा सीट: बद्रीनाथ विधानसभा सामरिक दृष्टि से भी काफी महत्वपूर्ण है. भारत चीन सीमा से लगा यह विधानसभा क्षेत्र कभी भारत तिब्बत व्यापार का केंद्र हुआ करता था. जो 1962 के बाद बंद हुआ. आर्थिक दृष्टि से भी यह विधनसभा बहुत महत्वपूर्ण है.

Uttarakhand Assembly Election 2022( Badrinath Assembly Seat) Uttarakhand Assembly Election 2022( Badrinath Assembly Seat)

चारधामों में एक होने के कारण चमोली जिले की बद्रीनाथ विधासभा सीट हिन्दुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है. उत्तराखंड बनने से पहले केदारनाथ धाम और बद्रीनाथ एक विधानसभा होती थी. तब इसे बद्री केदार विधानसभा के नाम से जाना जाता था. उत्तराखंड राज्य बनने के साथ ही बद्रीनाथ विधानसभा अलग हो गई. यहां अब तक दो बार कांग्रेस और दो बार भाजपा के विधायक चुने गए हैं.

बद्रीनाथ विधानसभा उत्तराखंड के सीमांत जिला चमोली में मौजूद है. 2011-12 की गणना के आधार पर यहां वोटरों की संख्या 85,758 है. लेकिन 2017 के चुनाव के मुताबिक यहां 99,288 वोटर हैं. वर्तमान में इस सीट पर भाजपा के महेंद्र भट्ट विधायक हैं. वह 2017 में पहली बार विधायक चुने गए हैं और अब 2022 के चुनावी संग्राम में एक बार फिर से किस्मत आजमाने को बेताब हैं.

बद्रीनाथ विधानसभा सामरिक दृष्टि से भी काफी महत्वपूर्ण है. भारत चीन सीमा से लगा यह विधानसभा क्षेत्र कभी भारत तिब्बत व्यापार का केंद्र हुआ करता था. जो 1962 के बाद बंद हुआ. आर्थिक दृष्टि से भी यह विधनसभा बहुत महत्वपूर्ण है. पर्यटन और तीर्थाटन की दृष्टि से बद्रीनाथ धाम, हेमकुंड साहिब, रुद्रनाथ, गोपीनाथ, औली, फूलों की घाटी और नीति माणा घाटी, लार्ड कर्जन ट्रेक सहित दर्जनों ट्रैकिंग रूट के हिसाब से बद्रीनाथ विधानसभा काफी महत्वपूर्ण माना जाता है. यह राजधानी देहरादून से 280 से 320 किलोमीटर दूर है. यहां रेल की सुविधा नहीं है.

चमोली जिले में बद्रीनाथ विधानसभा कर्णप्रयाग विधानसभा और थराली विधानसभा मौजूद है. बद्रीनाथ विधानसभा में चमोली जिले का जिला मुख्यालय गोपेश्वर है. क्षेत्रफल के हिसाब से देखा जाए तो बद्रीनाथ विधानसभा, सबसे बड़ा क्षेत्र है. बद्रीनाथ विधानसभा में 3 ब्लॉक पोखरी, दसोली और जोशीमठ ब्लॉक आते हैं. बद्रीनाथ विधानसभा में मुख्य भाषा गढ़वाली, भोटिया और हिंदी बोली जाती है.

राजनीतिक पृष्ठभूमि

उत्तराखंड के अलग राज्य बनने के बाद से अब तक बद्रीनाथ विधानसभा में चार बार चुनाव हुए हैं. यहां बारी-बारी भाजपा-कांग्रेस दोनों ने राज किया है. इस सीट पर आजतक कोई उपचुनाव नहीं हुआ है. यहां पर भगवान बद्री का विशाल मंदिर है. जिस कारण इस विधानसभा का नाम बद्रीनाथ विधानसभा है. इस सीट पर 2002 में कांग्रेस के विधायक स्वर्गीय अनुसूया प्रसाद मैखुरी विधायक चुने गए. वहीं 2007 में भाजपा के केदार सिंह फोनिया विधायक चुने गए. वहीं 2012 के चुनाव में कांग्रेस के राजेंद्र सिंह भंडारी विधायक चुने गए. 2017 के चुनाव में भाजपा के महेंद्र भट्ट विधायक चुने गए.

सामाजिक ताना-बाना 
2017 के आंकड़ों के अनुसार बद्रीनाथ विधानसभा क्षेत्र में 51,612 पुरूष एवं 47,676 महिला मतदाता हैं. जिनमें से बद्रीनाथ में 61.77 फीसदी लोगों ने मतदान किया था. यहां जातीय समीकरण के हिसाब से देखा जाए तो सबसे ज्यादा आबादी राजपूत, ब्रह्मण, भोटिया, दलित, ओबीसी एवं अन्य जातियां हैं लेकिन किसी जाती का यहां दबदबा नहीं रहा है. 

2017 का जनादेश

बदरीनाथ विधानसभा में 2017 में मुख्य मुकाबला भाजपा और कांग्रेस पार्टी के बीच ही रहा. चुनाव से पूर्व कांग्रेस प्रत्याशी एवं पूर्व कृषि मंत्री राजेन्द्र भंडारी काफी मजबूत माने जा रहे थे. लेकिन चुनाव में भाजपा के महेंद्र भट्ट ने कांग्रेस प्रत्याशी को 5,634 मतों से हरा दिया. भाजपा के महेंद्र भट्ट 29,676 और कांग्रेस के राजेन्द्र भंडारी को 24,042 मत मिले. 

विधायक का रिपोर्ट कार्ड
बद्रीनाथ विधायक महेंद्र भट्ट का जन्म 4  अगस्त 1970 को चमोली जिले के पोखरी ब्लॉक के बामणथल्ला में हुआ. उनके पिता का नाम पुरुषोत्तम भट्ट है. उन्होंने HNB गढ़वाल विश्वविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएशन में एमकॉम किया है. इस दौरान वे विद्यार्थी परिषद के साथ भी जुड़ गए. साल 1992 में राममंदिर आंदोलन में भी जुड़े और संघ के साथ भाजपा का दामन थाम लिया. 2002 में पहली बार नंदप्रयाग विधानसभा सीट से भाजपा के विधायक चुने गए. 2007 में अपने प्रतिद्वंदी और निर्दलीय उमीदवार राजेंद्र भंडारी से नंदप्रयाग विधानसभा सीट पर चुनाव हार गए. इसके बाद वे 2012 में चुनाव नहीं लड़े और 2017 में एक बार फिर भाजपा के टिकट पर बद्रीनाथ विधानसभा सीट से चुनाव जीतकर विधायक चुने गए. यानी कि बद्रीनाथ विधानसभा सीट पर पहली बार विधायक चुने गए हैं. लेकिन वह दूसरी बार विधायक चुने गए है.

बद्रीनाथ विधायक महेंद्र भट्ट राजनीतिक तौर पर काफी सक्रिय रहते हैं और सबसे ज्यादा सोशल मीडिया पर सक्रिय रहते हैं. यहां वह हर व्यक्ति का जवाब देते हैं. वह हिंदूवादी नेता माने जाते हैं, चाहे वह कोई भी हो. सही हो या गलत हो हर किसी को जवाब देने से नहीं चूकते हैं. बद्रीनाथ विधानसभा में दूर-दराज तक सड़कों का जाल इन के दौर में बिछाया गया है. जिसे वे अपनी सबसे बड़ी उपलब्धि मानते हैं. 

2017 के चुनाव में प्रदेश में कैबिनेट मंत्री रहे कांग्रेस उम्मीदवार राजेंद्र भंडारी को जीत का प्रबल दावेदार माना जा रहा था. लेकिन मोदी लहर के चलते महेंद्र भट्ट यहां चुनाव जीत गए और मौजूदा दौर में उनकी गिनती जिले के शीर्ष नेताओं में होने लगी है. 

समस्याएं एवं मुद्दे

बद्रीनाथ विधानसभा, बद्रीनाथ चारधाम यात्रा, हेमकुंड साहिब यात्रा सहित पर्यटन पर ही निर्भर है. लेकिन पिछले 2 वर्षों से बद्रीनाथ यात्रा सहित पर्यटन तीर्थाटन कोविड-19 के चलते ठप पड़ा हुआ है. वहीं इस समय उत्तराखंड में सोशल मीडिया पर तेजी से गरमाया भूमि कानून, स्वास्थ्य शिक्षा व्यवस्था, बेरोजगारी आने वाले 2022 के चुनाव में मुद्दे बनने वाले हैं.

विविध
बद्रीनाथ विधानसभा का अगर पिछला रिकॉर्ड देखें तो उत्तर प्रदेश के दौर से बद्रीनाथ विधानसभा भाजपा का गढ़ रहा है. बद्रीनाथ विधानसभा में राजपूत और ब्राह्मण समुदाय में पकड़ बनाना ही, जीत निश्चित करती है. बताते चलें, 2002 में कांग्रेस ने यहां ब्राह्मण चेहरा स्वर्गीय अनुसूया प्रसाद मैखुरी  को टिकट देकर मैदान में उतारा था. यह पहला मौका था जब बद्रीनाथ विधानसभा सीट पर, कांग्रेस का विधायक बना था. हालांकि इससे पहले यहां भाजपा के भोटिया जनजाति के केदार सिंह फोनिया का गढ़ रहा. लेकिन 2002 में कांग्रेस ने यहां ब्राह्मण चेहरा खड़ा कर पूरे समीकरण ही बदल दिए थे. 

हालांकि 2007 में एक बार फिर भाजपा के केदार सिंह फोनिया ने वापसी की. लेकिन इस समय भी वापसी भुवन चंद्र खंडूरी के सीएम उम्मीदवार बनाए जाने की वजह से हुई थी. इसके बाद 2012 में फिर से कांग्रेस के राजेंद्र सिंह भंडारी ने जीत हासिल की और 2017 में एक बार फिर मोदी लहर के चलते भाजपा के महेंद्र भट्ट ने बद्रीनाथ विधानसभा में जीत हासिल की. 

और पढ़ें- Bajpur Assembly Seat: पिछले चुनाव में BJP ने छीनी थी सीट, क्या कांग्रेस की होगा वापसी?

क्या है वोटिंग पैटर्न
उत्तर प्रदेश के दौर में चमोली जिले में पिंडर और बद्रीनाथ केदार विधानसभा क्षेत्र थे. जो उत्तराखंड राज्य बनने के बाद परिसीमन होने से 2002 में बद्रीनाथ, नंदप्रयाग, कर्णप्रयाग और पिंडर विधानसभा क्षेत्र हुए और 2012 के चुनाव मैं परिसीमन होने से जिले में 3 ही विधानसभा क्षेत्र रहे. जिसमें 1-बद्रीनाथ 2-कर्णप्रयाग और 3-पिंडर. पिंडर का नाम बदल कर थराली विधानसभा रखा गया. इसमें नंदप्रयाग को भी शामिल किया गया. वहीं नंदप्रयाग विधनसभा के पोखरी वाले क्षेत्र को बद्रीनाथ विधानसभा में शामिल किया गया.

चमोली में वोटिंग पैटर्न एक जैसा ही रहा है. यहां एक विधानसभा में जिस पार्टी को चुना जाता है. पूरे जिले में तीनों विधानसभा सीट पर उसी पार्टी की जीत होती है. चमोली जिला, पौड़ी गढ़वाल संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत आता है. यहां भाजपा के संसद पूर्व मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत जी हैं. यहां 2014 में पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व सड़क एवं परिवहन मंत्री भुवन चंद्र खंडूरी सांसद चुने गए थे, जिले और प्रदेश में विधानपरिषद नहीं हैं. 

 

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