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बनारस के बुनकर खुशहाल या हालत खस्ताहाल? देखें बुलेट रिपोर्टर

बनारस के बुनकर खुशहाल या हालत खस्ताहाल? देखें बुलेट रिपोर्टर

संत कबीरदास फक्कड़ फकीर थे. बनारस का फक्कड़पन उनके व्यक्तित्व में था तो उनकी कविताई में भी फक्कड़पन समाया था. संत कबीरदास की जाति जुलाहे की थी और काम था बुनकर का. कबीरदास अपनी जिंदगी बसर करने के लिए बुनाई का काम करते थे. उनके निधन के छह सदी बीत जाने के बाद तमाम बुनकरों की जिंदगी अभी भी रोटी कपड़ा और मकान की बुनियादी जरूरतों से जूझ रही है. महंगी से महंगी साड़ी बुनने में अपनी हड्डियां गलाने वाले मजदूरों को मजदूरी उनके पसीने भर की भी नहीं मिलती. ऊपर से महंगाई की मार, बुनकरों की तो जैसे कमर ही टूट गयी है. साड़ियों का ताना बाना सुलझाने वाले बुनकरों की जिंदगी का ताना बाना बैठ ही नहीं रहा है. बनारस में कबीरदास के आंगन से देखें बुलेट रिपोर्टर.

In this episode of Bullet Reporter, we will try to find out that in the homeland of Sant Kabir Das, Varanasi, how the life of weavers has changed under the BJP government. What changes these weavers are witnessing and what are their political moods about the upcoming UP elections. Watch.

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