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यूपी चुनाव: 2017 में West में Best रही थी बीजेपी, इस बार पहले चरण में ही है तगड़ी चुनौती

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के पहले चरण की 11 जिलों की 58 सीटों पर नामांकन शुक्रवार से शुरू हो रहा है. पहले चरण का चुनाव बीजेपी के लिए अपनी सीटें बचाने की चुनौती होगी तो सपा-आरएलडी गठबंधन सहित बसपा और कांग्रेस जैसे विपक्षी दलों के लिए अपनी खोए हुए सियासी आधार को पाने का चैलेंज है. पिछले चुनाव में बीजेपी ने विपक्ष का सफाया कर दिया था और मौजूदा समय में यहां उसके 54 विधायक हैं.

/योगी आदित्यनाथ, अखिलेश यादव, मायावती /योगी आदित्यनाथ, अखिलेश यादव, मायावती
स्टोरी हाइलाइट्स
  • पहले चरण की 58 सीटों पर 10 फरवरी को वोटिंग
  • बीजेपी ने 2017 के चुनाव में क्लीन स्वीप किया था
  • सपा-आरएलडी गठबंधन बीजेपी को दे पाएगा चुनौती

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के पहले चरण के लिए शुक्रवार यानी आज से अधिसूचना जारी हो जाएगी. पश्चिमी यूपी के 11 जिलों की 58 सीटों पर नामांकन प्रक्रिया शुक्रवार से शुरू होकर 21 जनवरी तक जारी रहेगी. पहले चरण के नामांकन पत्रों की जांच 24 जनवरी तो नाम 27 जनवरी तक वापस लिए जा सकेंगे जबकि मतदान 10 फरवरी को होगा. पिछले चुनाव में बीजेपी के लिए गेमचेंजर साबित हुआ था पश्चिमी यूपी, लेकिन इस बार सपा-आरएलडी गठबंधन से कड़ी चुनौती है. 

पहले दौर की 58 सीटों में से 54 बीजेपी के पास

पहले चरण में प्रदेश के 11 जिलों शामली, मेरठ, मुजफ्फरनगर, बागपत, हापुड़, गौतमबुद्धनगर, गाजियाबाद, बुलंदशहर, मथुरा, आगरा और अलीगढ़ की कुल 58 सीट शामिल है. पिछले चुनाव में इनमें से छह जिलों में बीजेपी ने क्लीन स्वीप किया था और विपक्ष खाता भी नहीं खोल सका था. पहले चरण 58 सीटों में से बीजेपी ने 53 सीटें जीती जबकि सपा और बसपा के खाते में दो-दो सीटें आई थी. एक सीट आरएलडी ने जीती थी, जो बाद में बीजेपी में शामिल हो गए थे. इस तरह से पहले चरण की 58 सीटों में से बीजेपी के पास 54 सीटें है. 

यूपी के पहले चरण में सभी पश्चिमी यूपी की विधानसभा सीटें है, जहां पिछले चुनाव में बीजेपी ने क्लीन स्वीप किया था. इसके चलते बीजेपी सूबे के बाकी चरणों में माहौल बना सकी थी. 2017 के चुनाव के तर्ज पर पश्चिमी यूपी से एक बार फिर चुनाव शुरू हो रहे है, लेकिन इस बार बीजेपी के लिए राह आसान नहीं है. विपक्ष के लिए पहले चरण में कुछ खास खोने के लिए नहीं है जबकि बीजेपी की सत्ता में वापसी का सारा दारोमदार टिका है. 

किसान आंदोलन का फायदा किसे

तीन कृषि कानून के खिलाफ आवाज बुलंद करने वाले किसान आंदोलन का गढ़ पश्चिमी यूपी रहा है. विपक्ष का मानना है कि पश्चिमी यूपी से चुनाव शुरू होने से किसानों की नाराजगी का बीजेपी को नुकसान और गैर बीजेपी दलों खासकर समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय लोकदल गठबंधन को सियासी फायदा हो सकता है. ऐसे में बीजेपी को अपनी सीट बचाने और गैर बीजेपी दलों को अधिक सीट पाने की जंग में जोर आजमाइश करनी होगी. 

विधानसभा चुनाव के पहले चरण में ही सपा और आरएलडी गठबंधन की दोस्ती की भी परख होगी. मुजफ्फरनगर दंगे के बाद आरएलडी से छिटका वोटबैंक किसान आंदोलन के बाद एकजुट माना जा रहा है. जाट और मुस्लिम मुजफ्फरनगर की खलिश भुलाकर साथ तो आए हैं, लेकिन बूथ पर यह कितना कारगर होंगे, यह आने वाले समय में ही साफ होगा. 2017 के चुनाव में आरएलडी अकेले लड़ी थी जबकि सपा-कांग्रेस साथ थी. चौधरी जयंत के लिए भी यह पहला चुनाव है, जब वह बिना चौधरी अजित सिंह के मैदान में होंगे.


वेस्ट में बेस्ट रही है बीजेपी

2017 के चुनाव में वेस्ट यूपी में की मुरादाबाद मंडल को छोड़कर ज्यादातर सीटों पर कमल खिला था. वेस्ट यूपी में मेरठ, सहारनपुर अलीगढ़, मुरादाबाद और बरेली मंडल माना जाता है. 2017 में मेरठ मंडल में 28 में से 25 बीजेपी जीती थी और सपा, बसपा, आरएलडी के हिस्से में तीन सीटें आई थीं. सहारनपुर मंडल में 16 सीटों में से 12 बीजेपी, कांग्रेस और सपा के हिस्से में चार सीटें आई थीं. मुरादाबाद मंडल में 27 सीटों में से 14 पर बीजेपी जीती थी, 13 पर सपा, बसपा और अन्य ने जीत दर्ज की थी. 

दरअसल, 2014 और 2019 के लोकसभा साथ-साथ 2017 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी का गढ़ पश्चिमी यूपी को सियासी जानकार कहने लगे थे, लेकिन इस बार किसान आंदोलन के बाद सरकार के खिलाफ न नाराजगी पनपने से गैर बीजेपी खासकर सपाआरएलडी गठबंधन को सियासी फायदा हो सकता है. इसके अलावा गन्ने का भुगतान, एमएसपी पर फसलों की खरीद और खेतों में छुट्टा पशुओं से हो रहे नुकसान को बड़ा मुद्दा विपक्ष ने बना रखा है. अब ये गठबंधन बीजेपी के लिए चुनौती बनता जा रही है. सबसे महत्वपूर्ण सवाल ये उठता है कि क्या इस गठबंधन से बीजेपी को कोई नुकसान होगा. 2022 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी का मुकाबला सपा-आरएलडी गठबंधन से है तो बसपा और कांग्रेस भी पूरी ताकत के साथ मैदान में है. 

किस जिले में किसे कितनी सीटें मिली थी

पहले चरण के जिलें शामली जिले की तीन चुनाव है, जिनमें 2 बीजेपी और एक सपा के पास है. मेरठ की 7 में से 6 बीजेपी और एक सपा के पास है. बागपत जिले की तीन में से 2 सीटें बीजेपी ने जीती और एक आरएलडी को मिली थी, जो बाद में बीजेपी में शामिल हो गए थे. बुलंदशहर की सभी सातों सीटों पर बीजेपी का कब्जा है. नोएडा की तीनों सीटें बीजेपी के पास हैं. गाजियाबाद की सभी 5 सीटें बीजेपी ने जीती थी. अलीगढ़ की सभी सातों बीजेपी ने जीती थी. हापुड़ की 3 सीटों में से 2 बीजेपी और एक बसपा ने जीती थी, लेकिन बसपा विधायक सपा में शामिल हो गए हैं. मुजफ्फनगर की सभी 6 सीटें बीजेपी के पास हैं. मथुरा की पांच में चार बीजेपी और एक बसपा ने जीती हैं. आगरा की सभी 9 सीटों पर बीजेपी का कब्जा है. 

पहले चरण की विधानसभा सीटें

पहले चरण की सीटों नोएडा, दादरी, जेवर, सिंकदराबाद, बुलंदशहर, मेरठ कैंट, मेरठ, मेरठ साउथ, छपरौली, बरौत, बागपत, लोनी, मुरादनगर, साहिबाबाद, गाजियाबाद, मोदी नगर, दौलाना, हापुड़, कैराना, थाना भवन, शामली, बुढ़ाना, छरतावल, पुरकाजी, मुजफ्फरनगर, खतौली, मीरापुर, सिवालखास, सरधना, हस्तीनापुर, किठौर, गढ़मुक्तेश्वर,  सयाना, अनूपशहर, देबाई, शिकारपुर, खुर्जा, खैर, बरौली, अतरौली, छर्रा, कोइल, अलीगढ़, इगलास, छाता, मंत, गोवर्धन, मथुरा, बलदेव, एतमादपुर, आगरा कैंट, आगरा साउथ, आगरा नॉर्थ, आगरा रूरल, फतेहपुर सीकरी, फतेहाबाद और बाह विधानसभा सीट पर मतदान होना है. 

 

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