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UP Election: यूपी में 80 बनाम 85 का दंगल! BJP ने दलित और महिलाओं को साधने के लिए चला बड़ा दांव

बीजेपी ने यूपी चुनाव के लिए अपने उम्मीदवारों की जो लिस्ट जारी की है, उसके जरिए बड़े सियासी संदेश देने का प्रयास हुआ है. पार्टी ने ओबीसी समाज को भी ध्यान में रखा है और जाटों को भी. हर वर्ग के उम्मीदवार को सीट देने की कोशिश है.

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सीएम योगी आदित्यनाथ सीएम योगी आदित्यनाथ
स्टोरी हाइलाइट्स
  • बीजेपी ने एक साथ साधे कई सियासी समीकरण
  • जाट-ओबीसी-गैर यादव पर नजर
  • महिला वोटरों को भी केंद्र में रखा गया

यूपी चुनाव के पहले और दूसरे चरण के लिए बीजेपी ने अपने उम्मीदवारों की लिस्ट जारी कर दी है. सवाल ये था कि क्या बीजेपी ओबीसी समाज को ज्यादा तवज्जो देने वाली है? सवाल ये भी था कि दूसरी जातियों को बीजेपी कैसे साधेगी? अब उम्मीदवारों की लिस्ट जारी कर बीजेपी ने कई समीकरणों को बदल दिया है. ओबीसी समाज का भी ध्यान रखा है, महिला वोटर पर भी नजर है और सवर्ण वर्ग को भी तवज्जो दी है.

स्वामी प्रसाद मौर्य, दारा सिंह चौहान और धर्म सिंह सैनी के बीजेपी छोड़ते ही बीजेपी पर आरोपों की बौछार शुरू हो गई कि बीजेपी ने पिछड़ों के हितों की अनदेखी की है और स्वामी प्रसाद मौर्य ने तो 80 बनाम 20 की जगह अब 85 बनाम 15 का नारा दे दिया और चुनाव के रूप को सीधे-सीधे बैकवर्ड फॉरवर्ड करने की कोशिश की. लेकिन बीजेपी ने इसका जवाब अपने पहले उम्मीदवारों की लिस्ट से देने की कोशिश की है.

बीजेपी की रणनीति क्या है?

दिल्ली में जब पहले और दूसरे चरण के उम्मीदवारों का ऐलान हुआ तो 68 फ़ीसदी टिकट पिछड़ों, दलितों और महिलाओं को बीजेपी ने दिए, यही नहीं पहली बार सामान्य सीट के लिए अनुसूचित जाति के उम्मीदवार को टिकट भी दिए गए. समाजवादी पार्टी गठबंधन की पूरी कोशिश यह है कि योगी सरकार को अगड़ों की सरकार ब्रांड कर दिया जाए और उसमें भी ठाकुरों की सरकार. हालांकि बीजेपी ने अपनी जो उम्मीदवारों की सूची जारी की उसमें एक साथ इस मिथक को तोड़ने की कोशिश की और साथ ही जाटों को लुभाने की भी पूरी कोशिश टिकट बंटवारे में दिखाई देती है.

बीजेपी की तरफ से 105 सीटों में 44 सीटें ओबीसी को और 19 सीटें दलितों को दी गई हैं. बीजेपी ने सहारनपुर देहात से जयपाल सिंह को टिकट दिया है. जयपाल सिंह अनुसूचित जाति से आते हैं लेकिन यह सीट सुरक्षित नहीं है. ऐसे में पहली बार अनुसूचित जाति के किसी नेता को सामान्य सीट से लड़ने का मौका भी मिला है. बीजेपी ने एक प्रमुख एससी चेहरे के रूप उत्तराखंड की पूर्व राज्यपाल बेबी रानी मौर्य को आगरा ग्रामीण से उम्मीदवार बनाया है. इस सबके अलावा बीजेपी के उम्मीदवारों की सूची में सामान्य वर्ग में राजपूतों का दबदबा है. 43 उम्मीदवारों में 18 राजपूत हैं जबकि 10 ब्राह्मणों को टिकट दिया गया. वहीं वैश्य समुदाय से 8, पंजाबी 3 और 2 कायस्थ तथा 2 त्यागी, 1 सिख जातियों से उम्मीदवार बनाए गए

6 प्वाइंट में समझिए बीजेपी का जातीय समीकरण

- 105 में से 68 फीसदी सीटें ओबीसी, एससी और महिलाओं के लिए आवंटित

- 44 सीटें ओबीसी, 19 सीटें एससी और 10 सीटों पर महिलाओं को टिकट

- बीजेपी की पहली दो सूची में सवर्ण वर्ग को 40 टिकट मिले

- ठाकुर -18, ब्राह्मण – 10, वैश्य -8, त्यागी – 2, कायस्थ- 2

- ओबीसी के 44 उम्मीदवारों को टिकट मिला

- इनमें जाट -16, गुर्जर- 7, लोधी- 6, सैनी- 5, शाक्य- 2 कश्यप – 1, खडागबंशी- 1, मौर्य- 1, कुर्मी- 1, कुशवाहा-1, निषाद- 1, प्रजापति- 1, यादव-1 

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पहले और दूसरे चरण में चुनाव है और बीजेपी ने जाट समुदाय पर अपना भरोसा जताया है. यही वजह है कि सबसे ज्यादा 16 सीटें जाटों को बीजेपी ने दी है. जाट नाराजगी को काउंटर करने के उद्देश्य से बीजेपी ने इस बड़ी तादाद में जाटों को यह सीट दी है. कुल मिलाकर बीजेपी के खिलाफ बन रहे जातीय नैरेटिव को बीजेपी ने कैंडिडेट्स के जरिए जवाब देने की कोशिश की है.

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