scorecardresearch
 

मुस्लिम वोटों के लिए उलेमाओं की शरण में सपा, अबु आजमी से अखिलेश यादव तक सक्रिय

मुस्लिम वोटों के दम पर ही मुलायम सिंह यादव तीन बार और अखिलेश यादव एक बार उत्तर प्रदेश में सत्ता की कमान संभाल चुके हैं. अब 2022 के य़ूपी चुनाव में मुसलमानों को सपा अपने साथ मजबूती से जोड़ने के लिए मुस्लिम उलेमाओं का सहारा लेने की कवायद में जुट गई है. 

खालिद रशीद फिरंगी महली और सपा प्रमुख अखिलेश यादव खालिद रशीद फिरंगी महली और सपा प्रमुख अखिलेश यादव
स्टोरी हाइलाइट्स
  • उलेमाओं के जरिए मुस्लिमों को जोड़ने का प्लान
  • सपा नेता अबु आसिम उलेमाओं से मिल रहे हैं
  • यूपी में मुस्लिम वोटर काफी अहम माने जाते हैं

उत्तर प्रदेश की सियासत में मुसलामानों की भूमिका अहम मानी जाती है, यह बात समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव और पार्टी के अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से बेहतर कौन समझ सकता है. मुस्लिम वोटों के दम पर ही मुलायम सिंह तीन बार और अखिलेश एक बार सूबे में सत्ता की कमान संभाल चुके हैं. अब 2022 के विधानसभा चुनाव में मुसलमानों को सपा अपने साथ मजबूती से जोड़ने के लिए मुस्लिम उलेमाओं का सहारा लेने की कवायद में जुट गई है. 

मुस्लिम उलेमाओं से मिले सपा प्रमुख

सपा प्रमुख अखिलेश यादव पिछले सप्ताह ईद-मिलादुन्नबी के मौके पर लखनऊ के ऐशबाग ईदगाह पहुंचकर ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के मौलाना खालिद राशीद फरंगी महली से मिले थे और मोहम्मद साहब के जन्मदिन की बधाई दी थी. वहीं, सपा के मुस्लिम नेता व विधायक अबु आसिम आजमी ने रविवार को लखनऊ में मुस्लिमों के धार्मिक संगठन सुन्नी मजलिस-ए-अमल के अध्यक्ष मौलाना वली फारूकी सहित तमाम उलेमाओं के साथ मुलाकात और बैठक की. इस बैठक की फोटो भी आजमी ने खुद अपने सोशल मीडिया पर शेयर की है. 

मुस्लिमों के बीच ओवैसी की सक्रियता

उत्तर प्रदेश में इस बार के चुनाव में बीजेपी के हार्ड हिंदुत्व के सामने अखिलेश यादव खुलकर मुस्लिम कार्ड खेलने से अभी तक बच रहे थे. लेकिन, ऑल इंडिया मजलिस-ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी की यूपी में बढ़ती सक्रियता और कांग्रेस की मुस्लिम वोटों पर नजर को देखते हुए सपा के सामने अपने कोर वोटबैंक को साधे रखने की चुनौती है. ऐसे में अखिलेश यादव के बाद सपा नेता अबु आसिम आजमी की सूबे के उलेमाओं के साथ हुई मुलाकात को 2022 के विधानसभा चुनाव से जोड़कर देखा जा रहा है. 

मौलाना वली फारूकी के साथ अबु आसिम आजमी

दरअसल, ओवैसी ने सूबे की 100 मुस्लिम बहुल सीटों पर कैंडिडेट उतारने का ऐलान किया है. पिछले आठ महीने से ओवैसी यूपी का लगातार दौरा कर रहे हैं और उन्होंने मुस्लिम बहुल इलाके की सीटों को टारगेट किया है. ओवैसी मुस्लिम लीडरशिप को स्थापित करने और मुस्लिम प्रतिनिधित्व को सबसे बड़ा सियासी हथियार बना रहे हैं. मुस्लिम युवाओं के बीच ओवैसी का सियासी ग्राफ तेजी से बढ़ रहा है तो कांग्रेस भी मुस्लिम वोटों को अपने पक्ष में लाने के तमाम जतन कर रही है. उलेमाओं से लेकर मस्जिदों तक सहारा ले रही है. 

आजम की जगह आजमी मुस्लिम चेहरा

वहीं, सपा के कद्दावर मुस्लिम चेहरा व रामपुर से सांसद आजम खान के जेल में बंद होने के चलते पार्टी के पास कोई दूसरा बड़ा नेता नहीं है. ऐसे में अखिलेश यादव ने महाराष्ट्र के मुंबई से विधायक अबु आसिम आजमी को यूपी के मुसलमानों को साधे रखने का जिम्मा सौंपा है. आजमी सूबे में अलग-अलग जिलों का दौरा करके मुस्लिमों को सपा से जोड़ने के मुहिम में जुटे हैं. इसी कड़ी में उन्होंने सुन्नी मजलिस-ए-अमल के अध्यक्ष मौलाना वली फारूकी के साथ बैठक की है. 

यूपी में 20 फीसदी मुस्लिम वोटर अहम

उत्तर प्रदेश में करीब 20 फीसदी मुस्लिम मतदाता हैं. सूबे की कुल 143 सीटों पर मुस्लिम अपना असर रखते हैं. इनमें से 70 सीटों पर मुस्लिम आबादी बीस से तीस फीसद के बीच है. 73 सीटें ऐसी हैं जहां मुसलमान तीस फीसद से ज्यादा है. सूबे की करीब तीन दर्जन ऐसी विधानसभा सीटें हैं, जहां मुस्लिम उम्मीदवार अपने दम पर जीत दर्ज कर सकते हैं जबकि करीब 107 विधानसभा सीटें ऐसी हैं जहां अल्पसंख्यक मतदाता चुनावी नतीजों को खासा प्रभावित करते हैं. इनमें ज्यादातर सीटें पश्चिमी उत्तर प्रदेश, तराई वाले इलाके और पूर्वी उत्तर प्रदेश की हैं. 

मुस्लिमों की पहली पसंद बनेगी सपा? 

उत्तर प्रदेश में मुस्लिम मतदाताओं के बीच सपा की अच्छी पैठ मानी जाती है. सूबे में 20 फीसदी मुस्लिम और 10 फीसदी यादव वोटरों के साथ सपा के एम-वाई समीकरण के दम पर मुलायम सिंह यादव से लेकर अखिलेश यादव यूपी की सत्ता के सिंहासन पर विराजमान हो चुके हैं. 1990 का अयोध्या गोलीकांड और उसके बाद बाबरी विध्वंस के चलते सूबे में जो माहौल बदला उसमें मुस्लिम वोटों का सबसे ज्यादा फायदा मुलायम सिंह यादव की पार्टी सपा को मिला. इसी मुस्लिम वोटों के दम पर मुलायम सिंह से लेकर अखिलेश यादव तक सूबे के मुख्यमंत्री बने. 

यूपी के सियासी माहौल में अखिलेश यादव मुस्लिम और यादव वोटों को अपना कोर वोटबैंक मानकर चल रहे हैं. 2022 में सत्ता में वापसी के लिए मुस्लिम-यादव वोटबैंक में अन्य ओबीसी के वोटों के कुछ हिस्से को जोड़ने की कोशिश में अखिलेश यादव जुटे हैं. बीजेपी के पास सत्ता होने के चलते जिस तरह का माहौल बना हुआ है, उसमें अभी तक मुस्लिमों के बीच सपा सबसे पहली पंसद मानी जा रही है, लेकिन कांग्रेस से लेकर बसपा और मुस्लिम पार्टियां यादव-मुस्लिम समीकरण को तोड़ने की कवायद में जुटी हैं. इसीलिए सपा भी मुस्लिमों के बीच अपनी पैठ कायम रखने के लिए उलेमाओं का सहारा ले रही है. 

 

आजतक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें डाउनलोड करें
ऐप में खोलें×