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यूपी में 'जिताऊ और टिकाऊ' उम्मीदवार तलाशना कांग्रेस के लिए सबसे बड़ी टेंशन

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी 2022 की चुनावी जंग फतह करने के लिए सबसे बड़ी चुनौती 403 सीटों पर उम्मीदवार की तलाश करना. प्रियंका ने यूपी दौरे पर कहा था कि उन्हीं नेताओं को तरजीह दी जाएगी जो 'विनेबल' और 'स्टेबल' हों.

राहुल गांधी और प्रियंका गांधी राहुल गांधी और प्रियंका गांधी
स्टोरी हाइलाइट्स
  • कांग्रेस यूपी में अकेले 403 सीटों पर लड़ेगी चुनाव
  • प्रियंका गांधी ने 45 सीटों पर कैंडिडेट फाइल किए
  • कांग्रेस को नहीं मिल रहे जिताऊ और टिकाऊ प्रत्याशी

उत्तर प्रदेश में कई दशक तक राज करने वाली कांग्रेस पिछले 32 सालों से सत्ता का वनवास झेल रही है, जिससे चलते पार्टी के पास न मजबूत संगठन बचा है और न ही जनाधार वाले नेता. ऐसे में कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी 2022 की चुनावी जंग फतह करने के लिए सबसे बड़ी चुनौती 403 सीटों पर उम्मीदवार की तलाश करना. प्रियंका ने यूपी दौरे पर कहा था कि उन्हीं नेताओं को तरजीह दी जाएगी जो 'विनेबल' और 'स्टेबल' हों. ऐसे में सवाल उठता है कि सूबे की सियासत में बीजेपी से मुकाबला करने और सपा-बसपा जैसे विपक्षी दलों से दो-दो हाथ करने के लिए कांग्रेस 'जिताऊ और टिकाऊ' उम्मीदवार कहां से लाए? 

प्रियंका का जोर 'जिताऊ और टिकाऊ' प्रत्याशी पर

प्रियंका गांधी ने लखनऊ बैठक में कहा कि पार्टी 'जिताऊ (जीतने योग्य)' और 'टिकाऊ (स्थिर)' उम्मीदवारों को चाहती है, जो अगले 20 वर्षों तक पार्टी का नेतृत्व कर सकें. मौजूदा सात में से पांच विधायक और पिछले चुनाव में नंबर दो रहे नेताओं का टिकट फाइल हो गया. यूपी की 45 विधानसभा सीटों पर कांग्रेस ने उम्मीदवारों के नाम तय कर लिए गए हैं, लेकिन कांग्रेस ने 100 सीटों पर चुनाव जीतने का लक्ष्य रखा है. ऐसे में बाकी 55 सीटों के लिए मजबूत प्रत्याशी तलाशना कांग्रेस के लिए टेढ़ी खीर है. 

कांग्रेस का 2022 के विधानसभा चुनाव में किसी भी पार्टी से अभी तक गठबंधन नहीं हुआ है. ऐसे में कांग्रेस सूबे की सभी 403 सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है, लेकिन 100 सीटों पर मजबूती के साथ उतरना चाहती है. कांग्रेस ने मौजूदा सीटों के अलावा बीते दो चुनावों में पूर्व विधायकों की भी सीटें फाइल की है. कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू सहित वरिष्ठ नेता और कुछ उपाध्यक्ष चुनाव लड़ेंगे. इसके अलावा दूसरे दलों के मजबूत नेताओं पर भी कांग्रेस की नजर है, जिन्हें पार्टी में लाने की कवायद चल रही है. 

कांग्रेस से चुनाव लड़ने वालों के आवेदन मांगे गए

कांग्रेस के टिकट पर  विधानसभा चुनाव इच्छुक उम्मीदवारों को 25 सितंबर तक प्रदेश मुख्यालय या जिलों में पार्टी इकाइयों के साथ अपने आवेदन जमा करने के लिए कहा गया है. हालांकि, कांग्रेस के टिकट के लिए आवेदन करने वालों को पार्टी को 11 हजार रुपये देना होगा, जो पार्टी के लिए सहयोग राशि के रूप में देने होगा. कांग्रेस यूपी में अपने मजबूत गढ़ माने जाने अमेठी और रायबरेली में मजबूत प्रत्याशी नहीं तलाश पाई है. 

रायबरेली-अमेठी में कांग्रेस से कौन लड़ेगा चुनाव

कांग्रेस यूपी की सभी 403 सीटों पर कैंडिडेट के चयन में जुट गई है, जिसमें से 45 नेताओं को प्रियंका गांधी ने हरी झंडी दे दी है. लेकिन, गांधी परिवार के गढ़ माने जाने वाले अमेठी और रायबरेली में जिताऊ प्रत्याशी अभी तक तलाश नहीं सकी. कांग्रेस का 2017 में अमेठी जिले की एक भी सीट नहीं मिली थी जबकि रायबरेली में कांग्रेस के टिकट पर जीते दोनों ही उम्मीदवार बगावत कर बीजेपी के साथ हो गए हैं. ऐसे में कांग्रेस यूपी में कैसे मजबूती के साथ बीजेपी और सपा-बसपा का मुकाबला करेगी. 

वहीं, यूपी के 2022 विधानसभा चुनाव की सरगर्मी के साथ आयाराम और गयाराम का दौर भी तेजी से शुरू हो गया है. सूबे में योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में बीजेपी सत्तासीन है, लेकिन दल बदल करने वाले नेताओं का राजनीतिक ठिकाना और पहली पसंद समाजवादी पार्टी बनती जा रही है. 

यूपी में सपा बन रही पहली पसंद

2019 के लोकसभा चुनाव के बाद से करीब तीन दर्जन से ज्यादा बसपा नेताओं ने पार्टी को अलविदा कहकर सपा का दामन थामा तो करीब एक दर्जन से ज्यादा बड़े नेता कांग्रेस का हाथ छोड़कर अखिलेश यादव की साइकिल पर सवार हो चुके हैं. इतना ही नहीं प्रियंका के राजनीतिक एंट्री के बाद जो नेता कांग्रेस में आए थे, वो भी सपा में वापसी कर गए है. ऐसे में सूबे में विपक्षी दलों में सबसे ज्यादा टिकट की डिमांड सपा की है. 

समाजवादी पार्टी के पूर्व मंत्री और प्रवक्ता अताउर रहमान ने कहते हैं कि उत्तर प्रदेश की सियासी तस्वीर साफ है कि बीजेपी का विकल्प सिर्फ सपा है. यही वजह है कि कांग्रेस ही नहीं बल्कि बसपा के भी बड़े नेता सपा में शामिल हो रहे हैं.  2022 की सीधी लड़ाई योगी बनाम अखिलेश की होगी. मायावती बीजेपी की बी-टीम बन चुकी हैं. ऐसे में सपा ही यूपी के लिए मजबूत विकल्प है. इसीलिए सभी नेताओं की चाहत सपा के टिकट पर चुनाव लड़ने की है. 

कांग्रेस जीतने की स्थिति में नहीं दिख रही

वरिष्ठ पत्रकार सैय्यद कासिम कहते हैं कि फिलहाल यूपी में बीजेपी का विकल्प के रूप में सपा अपने आपको स्थापित करने में काफी हद तक कामयाब है. इसके पीछे एक वजह यह भी है कि सपा के पास एक अपना वोटबैंक है, जो पूरी मजबूती के साथ है. कांग्रेस अभी तक यूपी यह विश्वास नहीं पैदा कर सकी है कि वो बीजेपी को चुनाव हरा सकती है. ऐसे में विपक्ष का कोई भी बड़ा और मजूबत नेता कांग्रेस से क्यों चुनाव लड़ना चाहेगा. हर नेता चुनाव जीतने के लिए लड़ता है, हारने के लिए नहीं. यूपी के ऐसे माहौल में कांग्रेस को मजबूत नेता तलाशना आसान नहीं है. 

सूबे में सपा के साथ 10 फीसदी यादव और 20 फीसदी मुस्लिम वोट हैं. यह 30 फीसदी वोट उत्तर प्रदेश की सियासत में काफी अहम माना जाता है. वहीं, कांग्रेस जिस तरह से मेहनत कर रही है, वो अभी वोटों में तब्दील नहीं होता दिख रहा है. इसीलिए कांग्रेस के लिए इस बार के चुनाव में जिताऊ और टिकाऊ उम्मीदवार तलाशना बड़ी चुनौती है, क्योंकि कांग्रेस के बड़े नेता चाहते हैं कि सपा और बसपा में किसी भी दल के साथ गठबंधन हो जाए ताकि उनकी चुनावी राह आसान हो सके. 

 

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