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मिशन 2022: CM योगी, केशव, दिनेश...BJP सभी बड़े नेताओं को बनाएगी 'पन्ना प्रमुख'

आने वाले दिनों में 'पन्ना प्रमुखों' में बीजेपी के सभी बड़े नेता दिखाई देंगे, जिनमें प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्रदेव सिंह और संगठन के शीर्ष पदाधिकारियों के अलावा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और दिनेश शर्मा शामिल हो सकते हैं.

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ डिप्टी सीएम केशव मौर्य और दिनेश शर्मा (फाइल फोटो) मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ डिप्टी सीएम केशव मौर्य और दिनेश शर्मा (फाइल फोटो)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • 23 सितंबर से शुरू होगा पन्ना प्रमुखों का सम्मेलन
  • बीजेपी सभी बड़े नेताओं को बनाएगी पन्ना प्रमुख

मिशन 2022 के लिए भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने तैयारी तेज़ कर दी है. बीजेपी जहां Hi-tech तरीक़े अपनाकर लोगों तक पहुंचने की रणनीति बना रही है, वहीं अपनी परम्परागत शैली में बूथ मैनेजमेंट में भी कोई कोर कसर नहीं छोड़ना चाहती. बूथ की छोटी इकाई पर भी बीजेपी के रणनीतिकारों की नज़र है.

आने वाले दिनों में 'पन्ना प्रमुखों' में बीजेपी के सभी बड़े नेता दिखाई देंगे, जिनमें प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्रदेव सिंह और संगठन के शीर्ष पदाधिकारियों के अलावा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और दिनेश शर्मा शामिल हो सकते हैं.

11 सितम्बर को जेपी नड्डा शक्ति केंद्रों को वर्चुअली सम्बोधित करेंगे. प्रदेश मीडिया सह प्रभारी हिमांशु दूबे का कहना है कि बूथ के कार्यकर्ताओं को राष्ट्रीय अध्यक्ष के इस संबोधन के साथ ही शनिवार से पन्ना प्रमुख बनाने का अभियान भी शुरू हो जाएगा.

क्या है बीजेपी की रणनीति

दरअसल, जनवरी में लखनऊ दौरे पर आए बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने बूथ अध्यक्षों के सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए बताने की कोशिश की थी कि पन्ना प्रमुखों की पार्टी में कितनी अहमियत है. इसके लिए गृह मंत्री अमित शाह को भी पन्ना प्रमुख के तौर पर ज़िम्मेदारी देने की बात कहकर जोश भरने की कोशिश की थी.

चुनाव क़रीब आते ही पन्ना प्रमुखों को लेकर बीजेपी ने रणनीति को धार देना शुरू कर दिया है. 23 सितम्बर को पन्ना प्रमुखों का सम्मेलन होने वाला है जिसे जेपी नड्डा वर्चुअली सम्बोधित करेंगे.

क्या है पन्ना प्रमुख? 

पन्ना प्रमुख चुनाव के माइक्रो मैनेजमेंट में सबसे अहम हैं. वोटर लिस्ट पर मतदाताओं के नाम दर्ज़ होते हैं. उन्हीं में अलग-अलग पेज यानी पन्ने पर वोटरों के नाम रहते हैं. अमूमन 60 वोटरों के नाम एक पन्ने पर होते हैं. उसी क्षेत्र का भाजपा का कोई कार्यकर्ता उनका प्रमुख होता है यानी उस पन्ने का इंचार्ज होता है. 

पन्ना प्रमुख के ज़िम्मे उस पन्ने के वोटर्स को मनाने, वोट डलवाने और बूथ तक उनका पहुंचना सुनिश्चित करने की ज़िम्मेदारी होती है. पन्ना प्रमुख मतदान के दिन भी इस लिस्ट को अपडेट करते हैं कि इस पन्ने से कितने लोग वोट डालने आए. दरअसल बीजेपी के लिए वोटर्स तक पहुंचने का सीधा ज़रिया पन्ना प्रमुख है.

'पन्ना प्रमुख अमित शाह'

गुजरात चुनाव में गृहमंत्री अमित शाह गांधीनगर के नारणपुरा के बूथ नम्बर 38 के पन्ना नम्बर 7 के प्रमुख थे. उनको पन्ना प्रमुख बनाकर और इस बात को प्रचारित कर बीजेपी ने ये संदेश देने की कोशिश की कि पार्टी में ज़मीनी स्तर तक सभी नेताओं की ज़िम्मेदारी होती है. यूपी विधानसभा चुनाव में भी यही तरीक़ा देखने को मिलेगा.

संगठन के सभी पदाधिकारी यहां तक कि मुख्यमंत्री और दोनों उपमुख्यमंत्री भी पन्ना प्रमुख होंगे. जहां बीजेपी के एक से ज़्यादा वरिष्ठ नेता हैं, वहां पन्ना समिति भी काम करेगी और वोटरों के लिए उनकी ज़िम्मेदारी होगी. 

प्रदेश उपाध्यक्ष विजय बहादुर पाठक के अनुसार, 'बीजेपी कार्यकर्ता आधारित पार्टी है, ऐसे में वोटों को सहेजने की ज़िम्मेदारी सबकी है, पन्ना प्रमुख पार्टी का कार्यविभाजन है.' बूथ मैनेजमेंट को अपनी ताक़त मानने वाली बीजेपी की यह रणनीति है कि प्रभावशाली चेहरों को पन्ना प्रमुख बनाकर चुनावी रण आसान होगा.

 

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