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UP Election: बीजेपी के चुनावी एजेंडे में अल्पसंख्यक, रथयात्रा का है प्लान

उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव की तैयारियां शुरू हो गईं हैं. बीजेपी ने अल्पसंख्यकों तक मोदी और योगी के फैसलों की जानकारी पहुंचाने के लिए रथ यात्रा निकालने का फैसला किया है.

प्रधानमंत्री मोदी और सीएम योगी (फाइल फोटो) प्रधानमंत्री मोदी और सीएम योगी (फाइल फोटो)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • यूपी चुनाव के लिए रणनीति
  • रथ यात्रा निकालेगी बीजेपी

उत्तर प्रदेश में बीजेपी ने 'मिशन 2022' के लिए तैयारी तेज कर दी है. योगी सरकार ने पिछले महीने ही अपना रिपोर्ट कार्ड जारी किया था और अब अल्पसंख्यकों तक मोदी सरकार और योगी सरकार के फैसलों को पहुंचाने के लिए बीजेपी ने 'रथयात्रा' निकालने का फैसला लिया है. इस रथयात्रा के जरिए बीजेपी अल्पसंख्यकों तक जाकर मोदी और योगी के फैसलों की जानकारी पहुंचाएगी.

जानकारी के मुताबिक, बीजेपी 'अल्पसंख्यक जन जागरुक यात्रा' के नाम से रथयात्रा निकालेगी. इसके लिए बीजेपी हर विधानसभा में जाकर अल्पसंख्यकों की भागीदारी और अन्य फैसलों को गिनाएगी.

इस यात्रा में केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी, बिहार सरकार में मंत्री शाहनवाज हुसैन और राज्यसभा सांसद जफर इस्लाम जैसे नेताओं को भी शामिल किया जाएगा. इतना ही नहीं, हर जिल में अल्पसंख्यकों के लिए एक इंटेलेक्चुअल कॉन्फ्रेंस का आयोजन भी किया जाएगा. माना जा रहा है कि यूपी में AIMIM नेता असदुद्दीन ओवैसी की सक्रियता को बढ़ते देख बीजेपी ने ये फैसला लिया है.

क्या है भाजपा का मायनॉरिटी प्लान?

- पार्टी ने तय किया है कि अल्पसंख्यकों तक पार्टी अपनी अच्छी बातों और जनहित के फ़ैसले को पहुंचाएगी. इसके लिए पार्टी ने हर विधानसभा क्षेत्र में रथ यात्रा निकालने का फैसला किया है. इनके जरिए मोदी-योगी ने जो फैसले लिए हैं, उनका प्रचार किया जाएगा, साथ ही बताया जाएगा कि ये सभी के लिए हैं. केंद्रीय योजनाओं का लाभ अल्पसंख्यकों को कैसे मिला, इस बारे में भी बताया जाएगा.

- साथ ही योगी सरकार में भी अल्पसंख्यकों का बहुल क्षेत्रों का विकास हुआ है और विकास को लेकर कोई भेदभाव नहीं हुआ है. यूपी बीजेपी अल्पसंख्यक मोर्चा के महामंत्री दानिश आज़ाद कहते हैं कि ‘पीएम आवास हो या आयुष्मान योजना, आप किसी भी योजना के आंकड़े देख लीजिए, अल्पसंख्यकों को भी इससे फायदा हुआ है. ये बहुत महत्वपूर्ण बात है. हम लोगों की जिम्मेदारी इसी बात को और सच्चाई को आगे रखने की है.’ इसके अलावा पार्टी सभी जिलों में इंटेलेक्चुअल कॉन्फ़्रेन्स भी करेगी जिसमें अल्पसंख्यक बुद्धिजीवियों को शामिल किया जाएगा.

क्या ओवैसी हैं चुनौती?

- हाल ही में योगी सरकार ने उर्दू अखबारों में विज्ञापन देकर इस बात को विस्तार से बताने की पहल की थी कि सरकार के फैसलों से अल्पसंख्यकों को अन्य सभी वर्गों की तरह कितना लाभ हुआ है. दरअसल, यूपी में सभी राजनीतिक दलों की मुस्लिम वोटों पर नजर और खासतौर पर असद्दुद्दीन ओवैसी के दौरे और भाषण को देखते हुए बीजेपी के लिए ‘मायनॉरिटी प्लान’ जरूरी है. 

- हालांकि, विपक्षी दल इस बात पर ही सवाल उठाते नजर आ रहे हैं. कांग्रेस प्रवक्ता अब्बास हैदर का कहना है, 'बीजेपी ने लोकसभा और विधानसभा चुनाव में एक भी मुसलमान को टिकट नहीं दिया. क्या बीजेपी को लगता है कि मुसलमानों को प्रतिनिधित्व देने की जरूरत नहीं है? खासतौर पर तब जब बीजेपी जाति के आधार कर टिकट बांटती है. क्या बीजेपी को लगता है कि मुस्लिम समाज ये सवाल उनसे नहीं करेगा? ऐसी भेदभाव करने वाली और साम्प्रदायिक पार्टी के साथ क्यों जाएगा मुस्लिम युवा?' 

- वरिष्ठ पत्रकार दिनेश पाठक कहते हैं कि ‘बीजेपी चुनावी तैयारी में तो आगे है लेकिन पुरानी सीटों का आंकड़ा छूना पार्टी के लिए चुनौती है. इसलिए बीजेपी के लिए एक-एक वोट कीमती है. यही कैलकुलेशन पार्टी लेकर चल रही है. ऐसे में उन सीटों पर जहां कम मार्जिन से हार हुई थी उन सीटों पर भी पार्टी की नजर है. ऐसे में इस तरह के प्लान कुछ फर्क लाने की कोशिश है.’

सदस्यता का लक्ष्य भी तय किया

जानकारी के अनुसार, अभी चल रहे सदस्यता अभियान में करीब 44 हज़ार अल्पसंख्यक सदस्य बनाने का लक्ष्य पार्टी ने तय किया है. पार्टी ने अल्पसंख्यक मोर्चे को सक्रिय करते हुए ये जिम्मेदारी दी है. 2018 में बीजेपी में शामिल हुए डॉ. खतीब को पार्टी में बहराइच का जिला उपाध्यक्ष बनाया था. बहराइच के चकसौग़ान गांव के प्रधान डॉ. खतीब का कहना है कि ‘मेरी तरह बहुत से युवा पार्टी से जुड़ना चाहते हैं. खासतौर पर वो युवा जो पढ़े लिखे हैं.’ हर जिले में आयोजित होने वाले ‘इंटेलेक्चुअल कॉन्फ़्रेन्स’ में ऐसे युवाओं पर ख़ास ध्यान दिया जाएगा.

उर्दू अखबारों में भी दिए थे विज्ञापन

यूपी में मिशन 2022 के लिए बीजेपी अल्पसंख्यकों को लुभाने में जुट गई है. मिशन 2022 में बीजेपी 'मोदी का नाम और 'योगी का काम' लेकर जनता के बीच जाएगी. कुछ हफ्तों पहले ही योगी सरकार ने उर्दू अखबारों में 'नंबर वन यूपी' बताते हुए योगी के काम का जिक्र किया था, जिसमें एक ओर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तस्वीर लगी थी तो दूसरी ओर यूपी सरकार की तमाम उपलब्धियों और फैसलों को सिलसिलेवार तरीके से बताया गया था. इसमें स्लोगन दिया था 'मुल्क में सरे फ़ेहरिस्त' यानी देश में यूपी अव्वल है.  

कुछ ही महीनों में होंगे चुनाव

उत्तर प्रदेश में अगले साल फरवरी-मार्च में विधानसभा चुनाव हो सकते हैं. 2017 के चुनाव में बीजेपी ने यहां की 403 में से 312 सीटों पर जीत दर्ज की थी. सपा और कांग्रेस ने साथ मिलकर चुनाव लड़ा था. सपा ने 47 और कांग्रेस ने 7 सीटें ही जीती थीं. मायावती की बसपा 19 सीटें जीतने में कामयाब रही थी.

 

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