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यूपी चुनावः बीजेपी ने तैयार की नई रणनीति, हर वर्ग तक पहुंचेगी, बताएगी मोदी-योगी ने क्या किया?

यूपी में मिशन 2022 फतेह करने के लिए बीजेपी ने नई रणनीति बनाई है. अब तक विधानसभावार प्रबुद्ध सम्मेलन करने के बाद बीजेपी अलग-अलग वर्गों के लिए सम्मेलन करने जा रही है. इसके जरिए केंद्र और राज्य सरकार के कामों को हर वर्ग तक पहुंचाने की कोशिश होगी.

हर वर्ग तक पहुंचने की कोशिश करेगी बीजेपी. (फाइल फोटो-PTI) हर वर्ग तक पहुंचने की कोशिश करेगी बीजेपी. (फाइल फोटो-PTI)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • कश्मीर से राम मंदिर तक पर होगी चर्चा
  • वकीलों, डॉक्टरों, पत्रकारों तक पहुंचेगी बीजेपी

यूपी में मिशन 2022 के लिए ‘वर्चुअल से एक्चुअल’ हुई बीजेपी अब हर वर्ग को अलग-अलग साधने की तैयारी में है. पार्टी ने विधानसभावार प्रबुद्ध सम्मेलनों के बाद अब अलग-अलग वर्गों के लिए सम्मेलन करने की रणनीति तैयार की है.

इसमें यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ, दोनों डिप्टी सीएम केशव मौर्य और डॉ. दिनेश शर्मा, पार्टी के सांसद, प्रदेश के सभी नेता शामिल होंगे. सम्मेलनों में अलग-अलग वर्गों के लोगों को बताएंगे कि केंद्र की मोदी सरकार और राज्य की योगी सरकार ने क्या-क्या काम किया है और क्या फैसले लिए हैं.

प्रबुद्ध सम्मेलन के जरिए माइक्रो मैनेजमेंट

बीजेपी के प्रबुद्ध सम्मेलनों का दौर चल रहा है. विधानसभावार होने वाले प्रबुद्ध सम्मेलनों में पार्टी केन्द्र और राज्य सरकार उपलब्धियों का बखान कर रही है. बीजेपी के रणनीतिकारों ने रणनीति बनायी है कि अब पार्टी अलग-अलग वर्गों का भी सम्मेलन करेगी. यह प्रबुद्ध सम्मेलन का दूसरा चरण होगा.

दीपावली के बाद शुरू होने वाले द्वितीय चरण में प्रोफेशन के आधार पर डॉक्टर, इंजीनियर, पत्रकार, शिक्षक, साहित्यकार, व्यापारी, प्रवासी भारतीय (वर्चुअल) जैसे वर्गों के लोगों को आमंत्रित किया जाएगा. ये भी तय किया गया है कि महानगरों में ही इसका सम्मेलन किया जाए. यूपी बीजेपी के प्रबुद्ध सम्मेलनों के प्रभारी और कन्नौज के सांसद सुब्रत पाठक कहते हैं कि ‘ये सम्मेलन महानगरों में किए जाएंगे और प्रदेश स्तर के होंगे. जबकि अभी होने वाले प्रबुद्ध सम्मेलन विधानसभा स्तर पर हो रहे हैं.’ 

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कश्मीर से लेकर राम मंदिर तक की चर्चा 

प्रबुद्ध सम्मेलनों में कश्मीर में बदलाव से केंद्र और राज्य सरकार के फैसलों पर बात की जा रही है. राम मंदिर निर्माण का ज़िक्र भी ज़रूर किया जा रहा है. प्रबुद्ध सम्मेलनों को लगातार सम्बोधित कर रहे पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और सांसद रमापति राम त्रिपाठी कहते हैं ‘प्रबुद्ध वर्ग देश के बारे में क्या सोचता है हम ये भी जानना चाहते हैं. आज केन्द्र की मोदी सरकार ने पुराने समय को बदला है. अब देश भ्रष्ट नहीं श्रेष्ठ है, विपन्न नहीं सम्पन्न है. हमारी पार्टी की स्थापना ही राष्ट्र, जन और संस्कृति को लेकर हुई थी. अब जो बदलाव हम लाए हैं उनकी बात हम बता रहे हैं ताकि बुद्धिजीवी भी राष्ट्र के लिए साथ आकार काम करें.’ इन सम्मेलनों में ख़ास तौर पर कश्मीर, धारा 370 हटाने, ट्रिपल तलाक जैसे विषय पर ज़ोर दिया जा रहा है, जिससे लोग खुद इन बदलावों के बारे में धारणा बना सकें.

प्रबुद्ध सम्मेलन 2.0: सम्पर्क और संवाद के जरिए फॉलोअप

ज़ाहिर है एक बार प्रबुद्ध सम्मेलन करने के बाद दूसरा चरण कर पार्टी इस बात का फॉलोअप करना चाहती है कि प्रबुद्ध वर्ग को साथ आने के लिए तैयार किया जाए. इस ‘संपर्क और संवाद’ के जरिए पार्टी मिशन 2022 के लक्ष्य में आगे बढ़ना चाहती है. प्रबुद्ध सम्मेलनों की ज़िम्मेदारी पार्टी के 34 विभागों और 27 प्रकोष्ठों की होगी जैसे अगर अधिवक्ताओं का सम्मेलन होना है, तो उसकी ज़िम्मेदारी विधि प्रकोष्ठ को दी जाएगी और पत्रकारों का प्रबुद्ध सम्मेलन होना है तो उसकी ज़िम्मेदारी मीडिया विभाग को दी जाएगी. बीएसपी की तुलना में भाजपा के प्रबुद्ध सम्मेलन पर पार्टी उपाध्यक्ष विजय बहादुर पाठक कहते हैं कि ‘ये कोई जाति आधारित लक्ष्य नहीं है. और सिर्फ़ चुनाव की दृष्टि से ही बीजेपी काम नहीं करती. पार्टी ने कोरोना काल में भी इस तरह के सम्मेलन वर्चुअल माध्यम से किए हैं. क्या किसी अन्य पार्टी ने ऐसा किया है? लोगों तक पहुंचना और उनको बताना कि बीजेपी सरकार ने क्या किया है हमारी ज़िम्मेदारी है.’ 

कोरोना काल में तैयार किया था डेटा बैंक

दरअसल, ये बीजेपी के माइक्रो मैनेजमेंट का हिस्सा है. विभागों और प्रकोष्ठों की संख्या भी इसीलिए बढ़ाई गयी थी कि पार्टी हर वर्ग तक प्रभावी तरीके से पहुंच सके. कोरोनाकाल में वर्चुअल सम्मेलन कर पार्टी ने अलग-अलग वर्गों के लोगों का डेटा बैंक भी तैयार कर लिया है जिससे आने वाले दिनों में भी उनसे सम्पर्क और संवाद किया जा सके. उन लोगों को प्रबुद्ध सम्मेलन में आमंत्रित किया जा रहा है. सांसद सुब्रत पाठक कहते हैं कि ‘ये सिर्फ़ औपचारिकता भर नहीं है. इन सम्मेलनों में जो प्रबुद्ध लोग शामिल होंगे उनसे ईमेल द्वारा और लिखित सुझाव भी मांगे जा रहे हैं.’

 

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