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Shekhupur Assembly Seat: बीजेपी के टिकट पर जीते थे धर्मेंद्र शाक्य, इस बार क्या होगा?

शेखूपुर विधानसभा सीट बदायूं जिले की छह विधानसभा सीटों में से एक है. शेखूपुर विधानसभा सीट 2008 के परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई थी.

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स्टोरी हाइलाइट्स
  • बदायूं जिले की एक सीट है शेखूपुर विधानसभा
  • 2012 के चुनाव से पहले अस्तित्व में आई थी ये सीट 

यूपी के बदायूं जिले की एक विधानसभा सीट है शेखूपुर विधानसभा सीट. शेखूपुर विधानसभा सीट के मतदाता केवल विधायक नहीं चुनते, सरकार बनाते हैं. पिछले 20 साल का इतिहास देखें तो जिस दल के उम्मीदवार को शेखूपुर विधानसभा सीट से जीत मिली, सूबे में उसी दल की सरकार बनी. शेखूपुर रेल और सड़क, दोनों मार्ग के जरिए आसपास के अन्य स्थानों से जुड़ा है.

शेखूपुर यूपी की राजधानी लखनऊ से 238 किलोमीटर और देश की राजधानी से दिल्ली से 248 किलोमीटर दूर है. जिला मुख्यालय से इसकी दूरी करीब चार किलोमीटर है. बताया जाता है कि प्राचीन काल मे शेखूपुर का नाम सौतबाद था. शेखूपुर सोत नदी के किनारे बसा है. कहा जाता है कि इस ऐतिहासिक बस्ती की नींव तीन सदी से भी पहले बदायूं के फारुकी फरीदी शेख शेख इब्राहिम अली फारूकी उर्फ नवाब मोहताशिम खान ने रखी थी. नवाब मोहताशिम खान को सम्राट जहांगीर ने बदायूं जिले में 4000 बीघा जागीर दी थी जहां उन्होंने जहांगीर के नाम पर शेखूपुर नाम का एक छोटा किला बनाया था.

नवाब मोहताशिम खान का निकाह शाहजहां की पत्नी मुमताज महल की बहन परवर खानम के साथ हुआ था. नवाब मोहताशिम ने भी अपनी पत्नी की याद में ताजमहल की तर्ज पर मकबरे का निर्माण कराया था. नवाब मोहताशिम की पत्नी के मकबरे को काला ताजमहल कहा जाता है. ये मकबरा बदायूं जिले के शेखूपुर में है.

राजनीतिक पृष्ठभूमि

शेखूपुर विधानसभा सीट बदायूं जिले की छह विधानसभा सीटों में से एक है. शेखूपुर विधानसभा सीट 2008 के परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई थी. शेखूपुर विधानसभा क्षेत्र का गठन उसैहत और विनावर विधानसभा के इलाकों को मिलाकर किया गया था. उसैहत और विनावर, दोनों विधानसभा सीटें नए परिसीमन में खत्म कर दी गई थीं. 

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शेखूपुर विधानसभा सीट के लिए साल 2012 में पहली दफे चुनाव हुए. 2012 के चुनाव में समाजवादी पार्टी (सपा) ने इस विधानसभा सीट से जीवनभर समाजवादी रहे पूर्व विधायक बनवारी सिंह यादव के पुत्र आशीष यादव को चुनाव मैदान में उतारा. लगातार पार्टी बदलने के लिए मशहूर भगवान सिंह शाक्य को कांग्रेस ने टिकट दिया. आशीष यादव ने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी कांग्रेस के भगवान सिंह शाक्य को हरा दिया और इस सीट से पहली, कुल मिलाकर दूसरी दफे विधानसभा पहुंचे.

2017 का जनादेश

शेखूपुर विधानसभा सीट से 2017 में भगवान सिंह की जगह उनके बेटे धर्मेंद्र शाक्य ने चुनाव लड़ा. पार्टी फिर बदल गई थी. 2012 में भगवान सिंह शाक्य जहां कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़े थे वहीं 2017 में उनके बेटे धर्मेंद्र शाक्य भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के टिकट पर चुनाव मैदान में उतरे थे. सपा से आशीष यादव ही मैदान में थे. बीजेपी के धर्मेंद्र शाक्य ने सपा के आशीष को 23386 वोट के अंतर से हरा दिया था.

सामाजिक ताना-बाना

शेखूपुर विधानसभा सीट के सामाजिक समीकरणों की बात करें तो इस इलाके में मुस्लिम मतदाताओं की अच्छी तादाद है. मौर्य, शाक्य, कुशवाहा, सैनी, यादव, लोधी, कश्यप, पॉली बिरादरी के मतदाता भी शेखूपुर विधानसभा क्षेत्र में अच्छी तादाद में हैं. वैश्य, ब्राह्मण, ठाकुर के साथ ही अनुसूचित जाति और जनजाति के मतदाता भी इस सीट का चुनाव परिणाम निर्धारित करने में निर्णायक भूमिका निभाते हैं.

विधायक का रिपोर्ट कार्ड

शेखूपुर विधानसभा सीट से विधायक बीजेपी के धर्मेंद्र शाक्य का जन्म राजनीतिक परिवार में हुआ था. इनके पिता भगवान सिंह शाक्य तीन बार विधायक रहे हैं. धर्मेंद्र शाक्य ने लखनऊ यूनिवर्सिटी से बीएससी (B.Sc.) की पढ़ाई की है. 2017 में पहली दफे बीजेपी के टिकट पर चुनाव मैदान में उतरे और जीतकर विधानसभा पहुंच गए.

शेखूपुर विधायक धर्मेंद्र शाक्य की गिनती उन नेताओं में होती है जो जनता से लगातार संपर्क में रहते हैं. विधायक विकास के दावे कर रहे हैं लेकिन विपक्षी दलों के नेता उन्हें विकास कार्य गिनाने की चुनौती दे रहे हैं. विपक्षी नेता धर्मेंद्र शाक्य की ओर से विकास के दावे खारिज करते हुए कहते हैं कि इलाके की समस्याएं पहले की ही तरह हैं.

 

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