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Rampur Assembly Seat: 9 बार विधायक रहे आजम खान, यहां कभी नहीं खिला कमल

रामपुर विधानसभा सीट से आजम खान नौ बार विधायक रहे हैं. 2017 के विधानसभा चुनाव में सपा के आजम खान ने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी बीजेपी के शिव बहादुर सक्सेना को शिकस्त दी.

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स्टोरी हाइलाइट्स
  • रामपुर सीट से विधायक हैं आजम खान की पत्नी
  • 1980 में पहली दफे विधायक बने थे आजम खान

उत्तर प्रदेश का रामपुर जिला ब्रिटिश शासनकाल के दौरान रियासत था. आजादी के बाद यहां नवाब खानदान का वर्चस्व रहा है. रामपुर को भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के मुख्तार अब्बास नकवी और फिल्म अभिनेत्री से नेत्री बनीं जयाप्रदा अपनी कर्मभूमि मानते हैं तो वही ये सांसद आजम खान की जन्मभूमि भी है. आजम खान इस सीट से नौ बार विधायक रहे हैं. इस विधानसभा क्षेत्र में कभी भी बीजेपी नहीं जीत सकी.

राजनीतिक पृष्ठभूमि

उत्तर प्रदेश में जब विधानसभा चुनाव होने शुरू हुए तो रामपुर शहर विधानसभा सीट पर पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के खानदान का खासा असर था. पंडित नेहरू के रिश्ते यहां के नवाब खानदान से बहुत गहरे थे. लंबे समय तक इस सीट से चुनाव में नवाब खानदान और उनके समर्थकों को ही जीत मिली. इस सीट से पहले चुनाव में कांग्रेस के फजलुल हक खान, दूसरी दफे स्वतंत्र विधानमंडलीय दल के असलम खान, तीसरे चुनाव में किश्वर आरा बेगम, चौथे चुनाव में स्वतंत्र पार्टी के अख्तर अली खान, नवाब सैयद मुर्तजा अली खान विधानसभा पहुंचे थे.

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हालांकि, बाद में यह मिथक टूटा और रामपुर की राजनीति में आजम खान का उदय हुआ. आजम खान ने 1977 में पहली दफे विधानसभा चुनाव लड़ा और कांग्रेस के शन्नू खान से मात खानी पड़ी. 1980 में आजम खान जनता पार्टी के टिकट पर पहली दफे विधानसभा पहुंचे और 1985 में लोक दल से विधायक निर्वाचित हुए. आजम खान 1989 में जनता दल के टिकट पर निर्वाचित हुए और पहली बार यूपी सरकार में मंत्री बने. 1991, 1993, 2002, 2007, 2012 और 2017 में भी आजम खान विधायक निर्वाचित हुए. इस बीच 1996 में कांग्रेस के अफरोज अली खान ने आजम खान को हराया भी. नौ बार विधायक रहे आजम खान 2019 में लोकसभा सदस्य निर्वाचित हुए जिसके बाद इस्तीफे से रिक्त हुई सीट पर हुए उपचुनाव में डॉक्टर तंजीम फातिमा विधायक निर्वाचित हुईं.

2017 का जनादेश

रामपुर विधानसभा सीट से साल 2017 के विधानसभा चुनाव में सपा के आजम खान नौवीं बार विधानसभा चुनाव जीतने में सफल रहे. आजम खान ने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी शिव बहादुर सक्सेना को शिकस्त दी. बीजेपी की लहर में भी आजम की जीत का अंतर 46 हजार से अधिक वोट का था. लोकसभा के लिए निर्वाचित होने के बाद आजम खान के इस्तीफे से रिक्त हुई सीट पर उपचुनाव में उनकी पत्नी तंजीम फातिमा विधायक निर्वाचित हुईं.

सामाजिक ताना-बाना

रामपुर विधानसभा सीट के सामाजिक समीकरणों की बात करें तो ये मुस्लिम बाहुल्य सीट है. इस विधानसभा क्षेत्र में हर जाति वर्ग के मतदाता रहते हैं. हालांकि, मुस्लिम वर्ग के मतदाता ही इस विधानसभा सीट का चुनाव परिणाम निर्धारित करते हैं.

विधायक का रिपोर्ट कार्ड

रामपुर विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी की विधायक डॉक्टर तंजीम फातिमा और उनके समर्थकों का दावा है कि उनके कार्यकाल में काफी विकास कार्य हुए हैं. इस सीट पर आजम खान के परिवार का ही कब्जा रहा है. विपक्षी दलों के नेता समस्याएं गिनाते हुए विधायक पर हमला बोल रहे हैं.

 

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