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Madhogarh Assembly Seat: बीहड़ की सीट पर बीजेपी है काबिज, विधायकी बचा पाएंगे मूलचंद?

माधौगढ़ विधानसभा सीट का अधिकांश हिस्सा बीहड़ में होने के कारण दस्युओं से प्रभावित रहा है. माधौगढ़ को दस्यु प्रभावित होने के कारण विकास की मुख्यधारा से जुड़ने में काफी वक्त लग गया.

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यूपी Assembly Election 2022 माधौगढ़ विधानसभा सीट
यूपी Assembly Election 2022 माधौगढ़ विधानसभा सीट
स्टोरी हाइलाइट्स
  • बीजेपी के मूलचंद निरंजन हैं विधायक
  • दस्यु प्रभावित रही है माधौगढ़ विधानसभा सीट

यूपी के जालौन जिले की माधौगढ़ विधानसभा सीट का स्वरूप आजादी के बाद अब तक चार बार बदला है. यहां पर पहले दो चुनाव में दो-दो विधायक चुने जाते थे. माधौगढ़ विधानसभा जिले की सबसे बड़ी विधानसभा सीट है. यहां अंग्रेजों से लेकर राजाओं तक ने आक्रमण किए, लेकिन यहां की रियासत कभी किसी की गुलाम न हुई.

बात ऐतिहासिक विरासतों की करें तो इस विधानसभा क्षेत्र में किले से लेकर पवित्र तीर्थस्थल मौजूद हैं. यहां मौजूद पंचनदा दुनिया का इकलौता ऐसा स्थल है जहां पांच नदियों का संगम है. उत्तर प्रदेश सरकार ने यहां बांध बनाने की मंजूरी दी है जिसकी अनुमानित लागत करीब तीन हजार करोड़ रुपये हैं. कुठौंद ब्लॉक की जगह नदीगांव और कोंच ब्लॉक के गांव इस विधानसभा क्षेत्र में शामिल किए गए.

माधौगढ़ विधानसभा सीट का अधिकांश हिस्सा बीहड़ में होने के कारण दस्युओं से प्रभावित रहा है. माधौगढ़ को दस्यु प्रभावित होने के कारण विकास की मुख्यधारा से जुड़ने में काफी वक्त लग गया. किसी जमाने में डकैतों ने यहां जमकर आतंक मचाया और चुनाव में भी उनका दखल रहा करता था. प्रमुख समस्याओं की बात करें तो बेरोजगारी, बाढ़, खराब सड़क इस इलाके की प्रमुख समस्याएं हैं.

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राजनीतिक पृष्ठभूमि

माधौगढ़ विधानसभा सीट का नाम कालपी-माधौगढ़ संयुक्त विधानसभा सीट था. इस सीट के लिए 1952 के विधानसभा चुनाव में कालपी-माधौगढ़ संयुक्त विधानसभा में दो सदस्यीय प्रणाली थी. तब इस संयुक्त विधानसभा से दो विधायक चुने जाते थे. एक मतदाता दो बार वोट डालकर दो प्रत्याशियों को चुनता था. ये रवायत साल 1957 के चुनाव में भी जारी रही.

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कालपी माधौगढ़ संयुक्त विधानसभा सीट से किसान मोर्चा के वीरेंद्र शाह और गरीब दास विधायक चुने गए थे. साल 1962 के विधानसभा चुनाव में इस विधानसभा सीट का नाम उमरी विधानसभा सीट हो गया. ये सीट सुरक्षित हो गई थी. इस चुनाव में कालपी को अलग विधानसभा क्षेत्र बनाया गया था और साल 1967 के चुनाव में इस सीट की सीमा फिर निर्धारित की गई. कुठौंद, माधौगढ़, रामपुरा ब्लॉक के साथ ही जालौन ब्लॉक के कुछ गांवों को जोड़कर माधौगढ़ विधानसभा सीट की नई सीमा निर्धारित कर दी गई. साल 2007 के चुनाव के बाद इस विधानसभा क्षेत्र का नक्शा फिर बदल गया. अब कोच और नदीगांव क्षेत्र को जोड़कर विधानसभा सीट का नाम कोच-माधौगढ़ कर दिया गया.

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माधौगढ़ विधानसभा सीट के चुनावी अतीत की बात करें तो 2012 के विधानसभा चुनाव में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के टिकट पर चुनाव मैदान में उतरे संतराम कुशवाहा विधायक निर्वाचित हुए थे. बसपा के संतराम को 71,671 वोट मिले थे. दूसरे नंबर पर समाजवादी पार्टी (सपा) के केशवेंद्र प्रताप सिंह रहे थे. सपा के केशवेंद्र को 50,319 वोट मिले थे. 2007 के विधानसभा चुनाव में बसपा के हरिओम उपाध्याय विधानसभा के लिए निर्वाचित हुए थे.

2017 का जनादेश

माधौगढ़ विधानसभा सीट से साल 2017 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने मूलचंद निरंजन को चुनाव मैदान में उतारा था. बीजेपी के टिकट पर मूलचंद निरंजन चुनावी बाजी जीतने में सफल रहे. मूलचंद निरंजन को 1 लाख 8 हजार 737 वोट मिले थे. दूसरे नंबर पर गिरीश अवस्थी रहे. गिरीश अवस्थी को 62 हजार 752 वोट मिले थे. कांग्रेस के विनोद चतुर्वेदी 46 हजार 915 वोट के साथ तीसरे स्थान पर रहे थे.

सामाजिक ताना-बाना

माधौगढ़ विधानसभा क्षेत्र के सामाजिक समीकरणों की बात करें तो यहां अनुसूचित जाति के मतदाताओं की बहुलता है. इस क्षेत्र में अनुसूचित जाति के मतदाता सबसे अधिक हैं. इस विधानसभा सीट के चुनाव परिणाम को क्षत्रिय, ब्राह्मण, मुस्लिम और पिछड़ा वर्ग के साथ ही वैश्य मतदाता भी प्रभावित करते हैं. यहां हर जाति-वर्ग के लोग रहते हैं.

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विधायक का रिपोर्ट कार्ड

माधौगढ़ विधानसभा सीट से बीजेपी के विधायक मूलचंद निरंजन अपने कार्यकाल के दौरान जमकर विकास कराने का दावा करते हैं. निरंजन का दावा है कि जितना विकास उनके कार्यकाल में हुआ उतना कभी नहीं हुआ. विधायक के समर्थक और बीजेपी के नेता विकास के दावे कर रहे हैं तो वहीं विरोधी दल इन दावों को खोखला बता रहे हैं.

 

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