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Jaswantnagar Assembly Seat: क्या शिवपाल यादव इस बार सपा को चुनौती देंगे?

जसवंतनगर विधानसभा सीट (Jaswantnagar assembly seat) पर पिछले पांच विधानसभा चुनाव से अधिक समाजवादी पार्टी ने कब्ज़ा जमाए रखा है. 2017 के विधानसभा चुनाव में शिवपाल सिंह यादव ने जीत हासिल की थी.

Jaswantnagar assembly seat Jaswantnagar assembly seat
स्टोरी हाइलाइट्स
  • जसवंतनगर की रामलीला को यूनेस्को के द्वारा धरोहर का दर्जा
  • जसवंतनगर विधानसभा सीट पर समाजवादी पार्टी का दबदबा
  • 2017 के चुनाव में मुलायम के भाई शिवपाल सिंह जीते थे

उत्तर प्रदेश विधानसभा में जसवंतनगर विधानसभा सीट (Jaswantnagar assembly seat) की क्रम संख्या 199 है. यह सीट प्रदेश के हाई प्रोफाइल और चर्चित सीटों में शुमार की जाती है. इसे समाजवादी पार्टी के गढ़ के रूप में जाना जाता है. 5 साल पहले शिवपाल सिंह यादव सपा के टिकट पर जीते थे लेकिन बाद में उन्होंने पार्टी छोड़कर अपनी खुद की पार्टी बना ली है. अब सबकी नजर है कि वह अपनी नई पार्टी के साथ चुनाव लड़ते हैं या नहीं.

जसवंतनगर विधानसभा सीट सैफई तहसील और ताखा तहसील सहित कई थाने को लेकर बनाई गई है. जसवंतनगर अपने आप में सबसे पुरानी तहसील बनी हुई है. जसवंतनगर विधानसभा में पुराना राजनीतिक क्षेत्र रहा है. जसवंतनगर कस्बा आगरा कानपुर हाईवे पर बसा हुआ है. जसवंतनगर विधानसभा की लगभग आबादी 3 लाख 82 हजार से अधिक है.

सामाजिक तानाबाना
सामाजिक दृष्टिकोण से जसवंतनगर विधानसभा की सबसे अधिक आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित है और क्षेत्रफल में भी सर्वाधिक है क्योंकि सैफई तहसील का क्षेत्र और ताखा तहसील के क्षेत्र भी इसी विधानसभा में लगता है. ग्रामीण क्षेत्रों में राजनीतिक दृष्टिकोण से ब्राह्मण, ठाकुर कम संख्या में हैं वहीं पिछड़े वर्ग में यादव, लोधी, शाक्य, पाल, राजपूत, निषाद, मल्लाह, बाथम, कहार, सविता, अनुसूचित समाज में जाटव, कोरी, धानुक समाज के लोग सर्वाधिक निवास करते हैं और यही लोग चुनाव में वोट करके अपना प्रत्याशी चुनते हैं. सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक दृष्टिकोण से पिछड़ा वर्ग का समाज जिस ओर जाता है. उसी की जीत होती है.

जसवंतनगर विधानसभा सर्वाधिक आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करती है इसलिए कस्बे में पहले की तरह कोई विशेष व्यापार नहीं हैं. यह प्रमुख समस्या बनी हुई है, सपा का गढ़ होने के नाते राजनीति का केंद्र बिंदु बना हुआ है. जबसे शिवपाल सिंह ने सपा छोड़कर अपनी अलग पार्टी बनाई है तभी से अब विवाद की स्थिति बनी रहती है. इसलिए इस क्षेत्र के लोगों ने हमेशा औद्योगिक क्षेत्र बनाने की मांग की लेकिन मांग नहीं पूरी है. आज भी वह समस्याएं मुद्दों के रूप में निरंतर बनी हुई हैं.

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आगरा-कानपुर हाईवे पर जसवंतनगर के कस्बा होने की वजह से वहां पहुंचना आना-जाना आसान है. एक बस स्टैंड भी बना हुआ है और जसवंतनगर की प्रसिद्ध रामलीला जो पूरे विश्व में मानी जाती है. यूनेस्को के द्वारा भी उसको धरोहर का दर्जा दिया गया है. इस विधानसभा में जसवंतनगर के नाम का एक रेलवे स्टेशन भी बना हुआ है. और इसी विधानसभा में सफाई होने की वजह से सैफई मेडिकल यूनिवर्सिटी और मेडिकल कॉलेज भी मौजूद है जो कि वर्तमान में कई जनपदों के लिए स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान कर रहा है.

राजनीतिक पृष्ठभूमि
जसवंतनगर विधानसभा सीट राजनीतिक दृष्टिकोण से समाजवादी पार्टी का गढ़ पूर्व से रहा है. जसवंतनगर विधानसभा की कुल आबादी 1 जनवरी 2021 प्रकाशन के अनुसार 3,82,477 पहुंच चुकी है. जिसमें पिछड़ा वर्ग की जनसंख्या सर्वाधिक है. अनुसूचित जाति, सामान्य वर्ग व अल्पसंख्यक की जनसंख्या कम है. इस विधानसभा में पिछड़ा वर्ग में यादव, लोधी राजपूत, शाक्य समाज प्रमुखता से जिस राजनीतिक दल को सपोर्ट करता है. उसी दल के प्रत्याशी की जीतने की संभावना अधिक होती है.

पिछले पांच विधानसभा चुनाव से अधिक समाजवादी पार्टी ने कब्ज़ा जमाए रखा है. 2017 के विधानसभा चुनाव में शिवपाल सिंह यादव ने समाजवादी पार्टी से 126834 वोट प्राप्त कर जीत हासिल की थी, वहीं दूसरे नंबर पर मनीष यादव उर्फ पतरे भारतीय जनता पार्टी से 74218 मत ही प्राप्त कर पाए थे और दुर्वेश कुमार शाक्य बहुजन समाजवादी पार्टी से 24509 वोट प्राप्त कर तीसरे स्थान पर रहे थे.

2017 का जनादेश
2017 के जसवंतनगर विधानसभा चुनाव में प्रत्याशियों की कुल संख्या 10 थी, जिनमें प्रमुख प्रत्याशी समाजवादी पार्टी से शिवपाल सिंह यादव, भाजपा से मनीष यादव उर्फ पतरे, बहुजन समाज पार्टी से दुर्वेश कुमार शाक्य थे.
 
समाजवादी पार्टी के दिग्गज नेता और पूर्व मंत्री शिवपाल सिंह यादव ने 126834 वोट प्राप्त किए थे, दूसरे नंबर पर भारतीय जनता पार्टी से मनीष यादव उर्फ पतरे ने 74218 मत प्राप्त किए थे और बहुजन समाज पार्टी से दुर्वेश कुमार शाक्य ने 24509 मत प्राप्त किए थे. 52616 वोट अधिक पाकर शिवपाल सिंह ने जीत हासिल की थी.

रिपोर्ट कार्ड 
समाजवादी पार्टी के राज में जसवंतनगर विधानसभा में सड़कों का जाल बिछा दिया गया था. प्रत्येक गांव को मुख्य मार्ग से जोड़ा गया है इसलिए वहां आवागमन की कोई भी समस्या नहीं है लेकिन 2017 में जैसे ही शिवपाल सिंह विधायक बने तभी समाजवादी पार्टी में विघटन होने के बाद से शिवपाल सिंह ने अपनी अलग पार्टी  बनाई तो वहां विधायक की तरफ से कोई भी विशेष कार्य नहीं हुआ.

हालांकि स्थानीय स्तर पर नगर पालिका का चेयरमैन, ग्राम पंचायत का चुनाव और पंचायत ब्लाक प्रमुख सभी लोग शिवपाल सिंह की पार्टी प्रसपा के कार्यकर्ता होने की वजह से स्थानीय नेताओं के द्वारा विकास कार्य सरकार की मंशा के अनुरूप सामान्य स्तर पर चलता रहा है. वर्तमान में शिवपाल सिंह की तरफ से सपा की सरकार के कार्यकाल में बड़े विकास कराए गए थे, उसके बाद से कुछ नया नहीं हुआ है.
(इनपुट -अमित तिवारी)

 

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