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Garh mukteshwar Assembly Seat: क्या BJP के कब्जे से यह सीट वापस ले सकेगी SP?

तीर्थ नगरी कही जाने वाली गढ़मुक्तेश्वर विधानसभा (Garh mukteshwar Assembly Seat) का सामाजिक-धार्मिक महत्व भी है. जहां पर हरिद्वार की तर्ज पर बृजघाट है और यहां पर दूर राज्यों से लोग गंगा स्नान करने के लिए पहुंचते हैं.

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Garh mukteshwar Assembly Seat
Garh mukteshwar Assembly Seat
स्टोरी हाइलाइट्स
  • समाजवादी पार्टी को लगातार 3 बार जीत, 2017 में बीजेपी की वापसी
  • गढ़मुक्तेश्वर क्षेत्र अपनी तीर्थ स्थली बृजघाट के कारण बेहद प्रसिद्ध है
  • पिछले चुनाव में भाजपा के कमल मालिक ने बड़ी जीत हासिल की थी

उत्तर प्रदेश विधानसभा में गढ़मुक्तेश्वर विधानसभा सीट (Garh mukteshwar Assembly Seat) क्षेत्र की चर्चित सीटों में से एक है. हापुड़ जिले की गढ़मुक्तेश्वर विधानसभा एक ऐसी विधानसभा है जिस पर लगातार तीन बार समाजवादी पार्टी का कब्जा रहा है. गढ़मुक्तेश्वर विधानसभा अपनी तीर्थ स्थली बृजघाट के कारण बेहद प्रसिद्ध है.

यह विधानसभा उन चुनिंदा विधानसभा सीटों में से एक है, जहां 2017 में ही कमल खिला है और भाजपा के कमल सिंह मलिक वर्तमान में विधायक हैं. इससे पहले गढ़मुक्तेश्वर की विधानसभा सीट पर लगातार तीन बार समाजवादी पार्टी का कब्जा रहा है और समाजवादी पार्टी के मदन चौहान लगातार तीन बार इस पर काबिज रह चुके हैं.

सामाजिक तानाबाना
तीर्थ नगरी कही जाने वाली गढ़मुक्तेश्वर विधानसभा का सामाजिक-धार्मिक महत्व भी है. जहां पर हरिद्वार की तर्ज पर बृजघाट है और यहां पर दूर राज्यों से लोग गंगा स्नान करने के लिए पहुंचते हैं. साथ ही ब्रजघाट में गंगा के किनारे गंगा घाट बने हुए हैं जिसे छोटा हरिद्वार भी कहा जाता है.

गंगा स्नान/कार्तिक पूर्णिमा के पर्व पर गंगा के खादर क्षेत्र में एक मेला भी लगाया जाता है. इस मेले को पहली बार प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राजकीय मेला घोषित किया. यह मेला राज्य स्तर पर अपना एक अलग महत्व रखता है क्योंकि यहां गंगा स्नान के मौके पर स्नान करने और दीपदान करने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु आते है. लेकिन यह मेला भाजपा सरकार आने के बाद राज्य के मानचित्र पर आ गया.

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राजनीतिक पृष्ठभूमि
गढ़मुक्तेश्वर जैसा की इसके नाम से ही साफ हो जाता है कि गणों की मुक्ति. पौराणिक महाभारत के युद्ध के बाद युद्ध में मारे गए योद्धाओं की आत्मा की शांति के लिए भगवान श्रीकृष्ण ने यहां पर गंगा नदी पर दीपदान किया था. इसी के कारण इस स्थान का नाम गढ़मुक्तेश्वर कहा जाने लगा.

गढ़मुक्तेश्वर हापुड़ जिले की 3 विधानसभा सीटों में से एक है. सन 2002 में हुए विधानसभा चुनावों में सपा के मदन चौहान ने 43808 वोट पाकर जीत हासिल की थी. उसके बाद सन 2007 में भी सपा के मदन चौहान (45606 वोट) दूसरी बाद गढ़मुक्तेश्वर से विधायक बने. साथ ही हैट्रिक के रूप में मदन चौहान 2012 में लगातार तीसरी जीत के साथ गढ़ से विधायक बने थे.

लेकिन 2017 के चुनाव में सपा और भाजपा का कड़ा मुकाबला रहा. जिसके बाद भाजपा विधायक कमल मालिक ने शानदार प्रदर्शन किया और जीत हासिल की. वर्तमान में कमल गढ़मुक्तेश्वर सीट से विधायक हैं.

2017 का जनादेश
2017 में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा के प्रत्याशी कमल सिंह मलिक ने 91,086 वोट पाकर विजयी हुए और गढ़ सीट से विधायक बनें. हालांकि 3 बार से सपा के विधायक रहे मदन चौहान को महज 48,810 वोट मिले जबकि बसपा प्रत्याशी प्रशांत चौधरी को 55,792 वोट मिले थे.

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हालांकि 2002 से पहले भाजपा का गढ़मुक्तेश्वर सीट पर कब्जा रहा और उसके बाद लगातार 3 बार सपा का कब्जा हो गया था लेकिन 2017 के चुनाव में भाजपा ने वापसी की और जीत हासिल की.

रिपोर्ट कार्ड

वर्तमान में गढ़मुक्तेश्वर सीट से विधायक कमल सिंह मलिक पोस्ट ग्रेजुएट हैं और उनकी उम्र लगभग 52 वर्ष है. गढ़मुक्तेश्वर विधायक कमल मलिक की संपत्ति की यदि हम बात करें तो कुल मिलाकर 11 करोड़ रुपये की संपत्ति है.

विविध
लगातार तीन चुनावों के बाद चौथी बार में जनता ने सपा की जगह भाजपा पर भरोसा जताया. भाजपा के विधायक कमल मलिक ने गढ़मुक्तेश्वर के प्रसिद्ध मेले को मानचित्र पर स्थान दिलाया, जिसके बाद गढ़ में लगने वाले कार्तिक पूर्णिमा मेले को राजकीय मेला घोषित किया गया.

साथ ही महाभारत कालीन के समय की जगह पूठ (पुष्पवती) की प्रसिद्धता कहीं खो गई थी लेकिन भाजपा विधायक के प्रयासों के बाद अब पूठ में भी हरिद्वार और बृजघाट की तर्ज पर गंगा घाट बनाए जा रहे हैं. साथ ही घाट से केवल 4 किलोमीटर की दूरी पर गंगा एक्सप्रेसवे निकल रहा है.

(इनपुट- देवेंद्र कुमार शर्मा)

 

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