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Agra district politics: ताजनगरी से भाजपा ने किया था बसपा का सफाया, कैसा रहा सपा का सियासी ग्राफ?

Agra politics: आगरा यूपी के बड़े जिलों में आता है. यहां की राजनीति में बहुजन समाज पार्टी का दबदबा रहा है. हालांकि, 2017 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने क्लीन स्वीप कर दिया था और यहां की सभी 9 सीटों पर जीत दर्ज की थी.

आगरा में विधानसभा की 9 सीटें हैं (फोटो-tajmahal.gov.in) आगरा में विधानसभा की 9 सीटें हैं (फोटो-tajmahal.gov.in)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • आगरा में विधानसभा की कुल 9 सीटें
  • 2017 में सभी सीटों पर जीती थी भाजपा
  • 2012 में बसपा ने जीती थीं 6 सीटें

यूपी का आगरा वो नाम है, जो देश के साथ ही पूरी दुनिया में मशहूर है. यहां मौजूद ताजमहल सिर्फ मोहब्बत की निशानी नहीं है, बल्कि दुनिया के सात अजूबों में भी इसका नाम शुमार है. आगरा का इतिहास बहुत प्रभावशाली रहा है और इसका वर्तमान भी कम नहीं है. आज भी दुनियाभर से लोग ताजमहल का दीदार पाने के लिए आते हैं, फर्क बस इतना है कि अब ये खूबसूरत इमारत कभी-कभी सियासी विवादों का केंद्र भी बन जाती है. लेकिन आगरा का पेठा आज भी पूरे देश का स्वाद मीठा कर रहा है. 

आगरा हेरिटेज इमारतों, जूतों और पेड़ों के कारोबार के लिए भी पहचाना जाता है. आगरा में ताजमहल और फतेहपुर सीकरी जैसी वर्ल्ड हेरिटेज मॉन्यूमेंट हैं. इसके अलावा भी आगरा में 192 संरक्षित इमारतें हैं जिन्हें भारत सरकार की तरफ से संरक्षण प्राप्त है.

आगरा में जूता बनाने का काम अघोषित रूप से कुटीर उद्योग में होता है और करीब 5000 इकाइयां यहां काम करती हैं. साथ ही आगरा में बड़ी संख्या में जूता निर्यात भी किया जाता है. दुनिया की तमाम नामचीन कंपनियों के जूते आगरा में बनते हैं.

स्वाद की दुनिया में आगरा का पेठा अपनी अलग ही पहचान रखता है. यहां आने वाले पर्यटक आगरा के पेठे को अपने साथ लेकर जाते हैं और अपने परिवार और सबके साथ पेठे की मिठास का आनंद लेते हैं.

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आगरा जिला मिश्रित आबादी वाला है. जिले में जाटव, ब्राह्मण, ठाकुर, जाट, मुसलमान की जनसंख्या किसी भी राजनीतिक और सामाजिक निर्णय पर विशेष स्थान रखती है. आगरा जिला मूल रूप से शांति प्रिय है.

9 विधानसभा सीटें

आबादी के हिसाब से आगरा काफी बड़ा जिला माना जाता है. यहां की आबादी 50 लाख से भी ज्यादा है. इसके अंतर्गत 6 तहसील आती हैं और जिले में 900 से ज्यादा गांव हैं जिनके लिए 40 पुलिस स्टेशन है. इससे आप जिले का अंदाजा लगा सकते हैं. यही वजह है कि जिले के अंतर्गत 9 विधानसभा सीटें आती हैं. 

आगरा कैंट, आगरा नॉर्थ, आगरा रुरल, आगरा साउथ, बाह, एत्मादपुर, फतेहाबाद, फतेहपुर सीकरी और खेरागढ़. आगरा के विधानसभा क्षेत्रों की शुरुआत चंबल और यमुना के बीहड़ों से होकर फतेहपुर सीकरी तक जाती है. 

चंबल और यमुना के बीहड़ों में बाह विधानसभा इलाका है. इस इलाके में ब्राह्मण मतदाता सर्वाधिक हैं जबकि दूसरे नंबर पर ठाकुर मतदाता माने जाते हैं.

फतेहपुर सीकरी, खेरागढ़ और एत्मादपुर विधानसभा सीटें ठाकुर और ब्राह्मण बाहुल्य मानी जाती हैं लेकिन इन विधानसभाओं में मल्लाह, कुशवाहा और जाटव भी अच्छी खासी संख्या में है.

2017 में भाजपा ने किया था क्लीन स्वीप

2017 के विधानसभा चुनाव में आगरा की सभी 9 विधानसभा सीटों पर भारतीय जनता पार्टी का परचम फहराया था. बीजेपी को यहां करीब पचास फीसदी वोट मिला था, जबकि दूसरे नंबर पर बसपा रही थी और उसके उम्मीदवारों को कुल 26 फीसदी वोट मिला था. सपा के खाते में जिले का सिर्फ 14 फीसदी वोट ही गया था. 

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आगरा की राजनीति में बहुजन समाज पार्टी का भी अच्छा खासा दखल रहा है. 2012 के चुनाव नतीजों में इसका असर भी देखने को मिला था. 9 में से 6 सीटें बसपा ने जीती थी, जबकि दो भाजपा और एक सपा जीत सकी थी. बता दें कि ये वो चुनाव था जब समाजवादी पार्टी ने पूर्ण बहुमत के साथ अखिलेश यादव के नेतृत्व में सरकार बनाई थी. लेकिन आगरा जिले में उसकी स्थिति काफी कमजोर रही थी. हालांकि, 2022 का यूपी चुनाव एक अलग ही मोड में नजर आ रहा है. बसपा के कई बड़े चेहरे सपा के साथ चले गए हैं.

आगरा से लोकसभा की राजनीति की बात करें तो साल 1989 में अजय सिंह लोकसभा का चुनाव जीते थे जो आजादी के बाद पहली बार केंद्र सरकार में रेल उप मंत्री बनाए गए थे. उनके बाद भारतीय जनता पार्टी के भगवान शंकर रावत तीन बार लोकसभा का चुनाव जीते और लोक लेखा समिति के अध्यक्ष भी रहे. भगवान शंकर रावत को चुनाव में शिकस्त जाने-माने सिने अभिनेता और समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी राजबब्बर ने 1997 में दी थी. राज बब्बर दो बार आगरा से चुनाव जीते और परिसीमन बदलने के कारण तीसरी बार फतेहपुर सीकरी से चुनाव लड़े थे, लेकिन बहुजन समाज पार्टी की उम्मीदवार सीमा उपाध्याय ने राज बब्बर को लोकसभा चुनाव में हरा दिया था. हालांकि राज बब्बर ने आगरा की फतेहपुर सीकरी से चुनाव हारने के बाद फिरोजाबाद से चुनाव लड़ा और जीत गए थे. जबकि आगरा में भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार रामशंकर कठेरिया चुनाव जीते थे. 

रामशंकर कठेरिया दो बार आगरा से चुनाव जीते और 2019 के लोकसभा चुनाव में उन्हें आगरा से इटावा लोकसभा का टिकट दे दिया गया और आगरा लोकसभा से एसपी सिंह बघेल को भारतीय जनता पार्टी ने अपना उम्मीदवार बनाया. बघेल चुनाव जीत गए. एसपी सिंह बघेल केंद्र सरकार में विधि राज्य मंत्री हैं.

 

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