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यूपी विधानसभा चुनाव

शंख, मंत्र, त्रिशूल, गणेश... मायावती की ब्राह्मण सभा में दिखे ये नजारे

मायावती
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उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) ने चुनावी शंखनाद कर दिया है. लखनऊ में बीएसपी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने मंगलवार को एक सभा को संबोधित किया. ब्राह्मण समाज की इस सभा में शंख बज रहे थे, मंत्रोच्चारण हो रहा था, त्रिशूल लहराए जा रहे थे और गणेश की प्रतिमाएं नजर आ रही थीं.

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दरअसल, बीएसपी ने पूरे प्रदेश में ब्राह्मण वोटरों को साधने के लिए प्रबुद्ध सम्मेलन किए हैं. इसका लखनऊ में आज समापन हुआ. समापन के मौके पर मायावती ने रैली को संबोधित किया. कार्यक्रम में मायावती के संबोधन से पहले जय श्री राम और जय परशुराम के नारे भी लगे. इसके साथ-साथ पार्टी का पुराना नारा, 'हाथी नहीं गणेश है, ब्रह्मा, विष्णु, महेश है.'

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मायावती ने रैली को संबोधित करते हुए कहा कि मुझे उम्मीद है कि 2007 की तरह फिर से सरकार बनेगी, एक हजार सक्रिय कार्यकर्ता पूरे जिले में तैयार करना है, पहले चरण के बाद दूसरे चरण में महिला कार्यकर्ताओं को भी प्रबुद्ध वर्ग के लिए तैयार किया जाएगा और उन्हें जोड़ा जाएगा.
 

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बीएसपी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने कहा कि बसपा सर्वजन हिताय और सर्वजन सुखाय की सोच वाली पार्टी है और ना ही कभी जनता को छलने का प्रयास किया है, बीएसपी की सरकार में किसी भी जाति धर्म के साथ भेदभाव नहीं किया गया, खासकर के अपर कास्ट के लोगों के साथ.

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मायावती ने कहा कि मैं सभी धर्म और जाति के लोगों से अपील करती हूं कि वह अपने परिवार के हित के लिए उनके अच्छे भविष्य के लिए बसपा से जरूर जुड़ें, भाजपा ने चुनाव से पहले किसानों की आमदनी दोगुनी करने का वादा किया था, लेकिन नहीं किया, भाजपा ने किसान को भूमि से वंचित करने का भी काम किया है.

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रैली को संबोधित करते हुए मायावती ने कहा कि बसपा को 2007 की तरह पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने से कोई नहीं रोक सकता, पिछले कुछ वर्षों में चाहे सपा की सरकार रही हो या फिर भाजपा की सरकार रही हो, दोनों सरकारों में ब्राह्मणों, दलितों, गरीबों का शोषण हुआ है.

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मायावती ने कहा, 'मोहन भागवत ने कहा था कि हिंदू और मुसलमान का डीएनए एक है और उनके पूर्वज एक हैं, मैं पूछना चाहती हूं कि अगर उनके पूर्वज एक हैं तो भाजपा सौतेला व्यवहार क्यों कर रही है.' उन्होंने कहा कि कोरोना के नाम पर भाजपा सरकार द्वारा हमारे पार्टी कार्यकर्ताओं को आवाज़ उठाने से रोकने का कार्य किया जा रहा है, उसके बावजूद हमारे कार्यकर्ता बड़ी संख्या में सक्रिय हैं.

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इस सभा के जरिए मायावती 2007 की कामयाबी को फिर से दोहराना चाहती थीं. उस समय भी सतीश चंद्र मिश्र ने ब्राह्मण वोटरों के बीच जाकर सम्मेलन किए थे. इसका फायदा हुआ और बसपा को दलितों के साथ ब्राह्मणों का वोट मिला और बहुमत की सरकार बनी. बीएसपी इसी सोशल इंजीनियरिंग को दोहराने की कोशिश कर रही है.